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डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की स्मृतियों को समर्पित होगा विधि विश्वविद्यालय : योगी आदित्यनाथ

By भाषा | Updated: September 11, 2021 18:35 IST

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प्रयागराज, 11 सितंबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में शनिवार को कहा कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का प्रयागराज से गहरा संबंध था और यह विधि विश्वविद्यालय उनकी स्मृतियों को समर्पित होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत के प्रधान न्यायाधीश इस विश्वविद्यालय के ‘विजिटर’ होंगे और राज्य सरकार ने इस संबंध में आज ही एक कानून बनाकर पेश किया है।

उन्होंने कहा, “मैं शासन की ओर से इस बात का आश्वासन देता हूं कि न्यायिक क्षेत्र में किसी भी प्रकार के विकास, ढांचागत विकास, आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए राज्य सरकार भरपूर सहयोग करेगी। यह विधि विश्वविद्यालय न्यायिक क्षेत्र में नयी पीढ़ी को ना केवल अध्ययन और अध्यापन का मंच उपलब्ध कराएगा, बल्कि शोध के अनेक अवसर भी उपलब्ध कराएगा।”

योगी ने कहा कि राष्ट्रपति के कर कमलों से जिन परियोजनाओं का शिलान्यास आज हुआ है, प्रयागराज वासियों को उनकी प्रतीक्षा दशकों से थी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 599 अदालती कक्षों में से फिलहाल 311 का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि 288 निर्माणाधीन हैं। माननीय न्यायमूर्तियों की आवासीय व्यवस्था के लिए भी प्रदेश सरकार की ओर से 611 आवास स्वीकृत किए गए थे जिसमें से 247 बनकर तैयार हो गए हैं और 364 का निर्माण कार्य जारी है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अधीनस्थ अदालतों में डिजिटलीकरण के लिए 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। माननीय उच्च न्यायालय के कंप्यूटर क्रय के लिए 30 करोड़ रुपये, अधीनस्थ अदालतों में कंप्यूटर क्रय के लिए 20 करोड़ रुपये और न्यायिक अधिकारियों के नये लैपटॉप के लिए 18 करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार ने स्वीकृत की है।

इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा, “यह राष्ट्रपति का उत्तर प्रदेश के प्रति विशेष लगाव ही है कि 25 अगस्त को उन्होंने गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी थी और आज उन्होंने यहां इलाहाबाद उच्च न्यायालय में नवीन भवन और प्रयागराज में विधि विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी।”

उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य है कि यहां से पढ़कर निकले छात्र न्याय व्यवस्था में बेहतर योगदान करें। उन्होंने कहा कि कानून बनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून के सम्यक पालन से ही समाज को समान न्याय का लाभ प्राप्त होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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