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Jamia Violence: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने अमित शाह को ठहराया जिम्मेदार, कहा- उनकी मर्जी के बिना पुलिस ऐसा कदम नहीं उठा सकती 

By धीरज पाल | Updated: February 16, 2020 19:04 IST

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने रविवार को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा ऐसा कोई नया वीडिया उसने जारी नहीं किया है जिसमें अर्द्धसैनिक और पुलिस वर्दी में कुछ लोग 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में विद्यार्थियों को पीटते हुए नजर आ रहे हैं।

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ठळक मुद्दे38 सेंकेंड के इस वीडियो में कथित तौर पर सात-आठ अर्द्धसैनिक और पुलिस वर्दीधारी लोग विश्वविद्यालय के ओल्ड रीडिंग हॉल में प्रवेश करते हुए और विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज करते नजर आ रहे हैं। विश्वविद्यालय 15 जनवरी को उस वक्त युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया था

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए हिंसा का वीडियो सामने आने के बाद राजनीति गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। कांग्रेस नेता कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस हिंसा का जिम्मेदार देश के गृह मंत्री अमित शाह को ठहराया है। 

उन्होंने कहा कि इसके लिए गृह मंत्री ज़िम्मेदार हैं, उनकी मर्ज़ी के बिना पुलिस ऐसा कदम नहीं उठा सकती। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमित शाह के सीने में दिल है तो इनके खिलाफ कार्रवाई करें, वरना पूरा देश समझेगा कि जो कुछ हो रहा है उसके लिए अमित शाह ज़िम्मेदार है।  

प्रियंका गांधी ने भी उठाए गृह मंत्री अमित शाह पर सवालबता दें कि इस वीडियो को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर अमित शाह पर आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि देखिए कैसे दिल्ली पुलिस पढ़ने वाले छात्रों को अंधाधुंध पीट रही है। एक लड़का किताब दिखा रहा है लेकिन पुलिस वाला लाठियां चलाए जा रहा है। गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने झूठ बोला कि उन्होंने लाइब्रेरी में घुस कर किसी को नहीं पीटा।

उन्होंने लिखा कि इस वीडियो को देखने के बाद जामिया में हुई हिंसा को लेकर अगर किसी पर एक्शन नहीं लिया जाता तो सरकर की नीयत पूरी तरह से देश के सामने आ जाएगी

विश्वविद्याल ने नहीं जारी किया यह वीडियो

वहीं, जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने रविवार को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा ऐसा कोई नया वीडिया उसने जारी नहीं किया है जिसमें अर्द्धसैनिक और पुलिस वर्दी में कुछ लोग 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में विद्यार्थियों को पीटते हुए नजर आ रहे हैं। अड़तालीस सेंकेंड के इस वीडियो में कथित तौर पर सात-आठ अर्द्धसैनिक और पुलिस वर्दीधारी लोग विश्वविद्यालय के ओल्ड रीडिंग हॉल में प्रवेश करते हुए और विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज करते नजर आ रहे हैं। इन लोगों ने अपने चेहरे ढक रखे हैं।यह वीडियो सीसीटीवी फुटेज जान पड़ता है।

विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी अहमद अजीम ने कहा, ‘‘हमारे संज्ञान में आया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के डॉ. जाकिर हुसैन पुस्तकालय में पुलिस बर्बरता के बारे में कोई वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस वीडियो को विश्वविद्यालय ने जारी नहीं किया है।’’ यह वीडियो जामिया समन्वय समिति (जेसीसी) ने जारी किया है। जेसीसी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों का संगठन है। पंद्रह दिसंबर को कथित पुलिस बर्बरता के बाद इसका गठन किया गया था। 

विश्वविद्यालय 15 जनवरी को उस वक्त युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया था, जब पुलिस उन बाहरी लोगों की तलाश में विश्वविद्यालय परिसर में घुसी, जिन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इस शैक्षणिक संस्थान से कुछ ही दूरी पर हिंसा और आगजनी की थी। 

जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार जेसीसी विश्वविद्यालय के गेट नंबर सात के बाहर मौलाना मोहम्मद अली जौहर रोड पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ आंदोलन चला रही है। अजीम ने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट किया जाता है कि जेसीसी विश्वविद्यालय का कोई आधिकारिक निकाय नहीं है। जेसीसी के साथ किसी भी संवाद को विश्वविद्यालय के साथ संवाद नहीं समझा जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ कई ट्विटर एकाउंट, फेसबुक पेज और विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के उपयोगकर्ता जामिया मिल्लिया इस्लामिया के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं और लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं।’’ उन्होंने सोशल मीडिया पर आधिकारिक ट्विटर हैंडल और फेसबुक पेज की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा , ‘‘हमने ट्विटर से हमारे आधिकारिक हैंडल का सत्यापन करने का अनुरोध भी किया है और हम अन्य सोशल मीडिया मंचो से भी ऐसा ही करने को कहेंगे। ’’

(इनपुट समाचार एजेंसी भाषा से) 

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