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स्वतंत्रता दिवस: वीर रस से भरी आजादी की इन कविताओं को सुनकर आज भी भर जाता है जोश!

By स्वाति सिंह | Updated: August 15, 2019 06:55 IST

Independence Day: आजादी की 73वीं सालगिरह पर देशभर धूमधाम से मनाई जा रही है। छोटे बच्चों से लेकर राजनीति के गलियारों में भी आजादी का जश्न मनाया जाता है।

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आज पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा है। हर कोई आजादी के इस दिन को सेलिब्रेट कर रहा है। आज ही के दिन देश को 1947 में आजादी मिली थी। इस साल भारत अपनी 73वीं आजादी मना रहा है। आप ने भी देशभक्ति से भरे संदेश लोगों को भेजे होंगे मगर इस आजादी के दिन अपने दोस्तों को मात्र संदेश भेजने के बजाए उन्हें देशभक्ति से जुड़ी कविताएं भेजिए। ऐसी कविताएं जो आपके मन में देश के प्रति और भी प्यार जगा देंगी। 

1. स्वतंत्रता दिवस की पुकार 

पंद्रह अगस्त का दिन कहता- आज़ादी अभी अधूरी हैसपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है

जिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आईवे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई

कलकत्ते के फुटपाथों पर जो आंधी-पानी सहते हैंउनसे पूछो, पन्द्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैं

हिन्दू के नाते उनका दुख सुनते यदि तुम्हें लाज आतीतो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जाती

इंसान जहाँ बेचा जाता, ईमान ख़रीदा जाता हैइस्लाम सिसकियाँ भरता है,डालर मन में मुस्काता है

भूखों को गोली नंगों को हथियार पिन्हाए जाते हैंसूखे कण्ठों से जेहादी नारे लगवाए जाते हैं

लाहौर, कराची, ढाका पर मातम की है काली छायापख़्तूनों पर, गिलगित पर है ग़मगीन ग़ुलामी का साया

बस इसीलिए तो कहता हूँ आज़ादी अभी अधूरी हैकैसे उल्लास मनाऊँ मैं? थोड़े दिन की मजबूरी है

दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएँगेगिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएँगे

उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करेंजो पाया उसमें खो न जाएँ, जो खोया उसका ध्यान करें

-अटल बिहारी वाजपेयी

2. सारे जहाँ से अच्छाहिंदुस्तान हमारा

सारे जहाँ से अच्छाहिंदुस्तान हमारा

हम बुलबुलें हैं उसकीवो गुलसिताँ हमारा।

परबत वो सबसे ऊँचाहमसाया आसमाँ का

वो संतरी हमारावो पासबाँ हमारा।

गोदी में खेलती हैंजिसकी हज़ारों नदियाँ

गुलशन है जिनके दम सेरश्क-ए-जिनाँ हमारा।

मज़हब नहीं सिखाताआपस में बैर रखना

हिंदी हैं हम वतन हैहिंदुस्तान हमारा।

- मुहम्मद इक़बाल

3 ध्वज-वंदना 

नमो, नमो, नमो।नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो!

नमो नगाधिराज – शृंग की विहारिणी!नमो अनंत सौख्य – शक्ति – शील – धारिणी!प्रणय – प्रसारिणी, नमो अरिष्ट – वारिणी!नमो मनुष्य की शुभेषणा – प्रचारिणी!नवीन सूर्य की नई प्रभा, नमो, नमो!

हम न किसी का चाहते तनिक अहित, अपकार।प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार।सत्य न्याय के हेतु, फहर-फहर ओ केतुहम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतुपवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो!

तार-तार में हैं गुँथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग!दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग।सेवक सैन्य कठोर, हम चालीस करोड़कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओरकरते तव जय गान, वीर हुए बलिदान,अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिंदुस्तान!प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो!

- रामधारी सिंह ‘दिनकर’

4. रोटी और स्वाधीनताआजादी तो मिल गई, मगर, यह गौरव कहाँ जुगाएगा मरभुखे! इसे घबराहट में तू बेच न तो खा जाएगा आजादी रोटी नहीं, मगर, दोनों में कोई वैर नहींपर कहीं भूख बेताब हुई तो आजादी की खैर नहीं

हो रहे खड़े आजादी को हर ओर दगा देनेवालेपशुओं को रोटी दिखा उन्हें फिर साथ लगा लेनेवालेइनके जादू का जोर भला कब तक बुभुक्षु सह सकता है है कौन, पेट की ज्वाला में पड़कर मनुष्य रह सकता है 

झेलेगा यह बलिदान? भूख की घनी चोट सह पाएगा आ पड़ी विपद तो क्या प्रताप-सा घास चबा रह पाएगा है बड़ी बात आजादी का पाना ही नहीं, जुगाना भीबलि एक बार ही नहीं, उसे पड़ता फिर-फिर दुहराना भी

-रामधारी सिंह दिनकर

5. आजादी

इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं,हमें तोहमत लगाते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैंकभी आज़ाद करते हैं, कभी बेदाद करते हैंमगर इस पर भी हम सौ जी से उनको याद करते हैंअसीराने-क़फ़स से काश, यह सैयाद कह देतारहो आज़ाद होकर, हम तुम्हें आज़ाद करते हैंरहा करता है अहले-ग़म को क्या-क्या इंतज़ार इसकाकि देखें वो दिले-नाशाद को कब शाद करते हैंयह कह-कहकर बसर की, उम्र हमने कै़दे-उल्फ़त मेंवो अब आज़ाद करते हैं, वो अब आज़ाद करते हैं

सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी,वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैंयह बात अच्छी नहीं होती, यह बात अच्छी नहीं करतेहमें बेकस समझकर आप क्यों बरबाद करते हैं?कोई बिस्मिल बनाता है, जो मक़तल में हमें ‘बिस्मिल’तो हम डरकर दबी आवाज़ से फ़रियाद करते हैं

-राम प्रसाद बिस्मिल

यह सारी कविताएं कविताकोश ली गईं हैं।

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