बिहार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में बिहार भाजपा के कद्दावर नेता मंगल पांडेय को नहीं मिली तवज्जो, सियासी गलियारे में बना चर्चा का विषय

By एस पी सिन्हा | Updated: May 7, 2026 16:10 IST2026-05-07T16:09:45+5:302026-05-07T16:10:10+5:30

बता दें कि मंगल पांडे न केवल बिहार भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में प्रभारी के तौर पर भी उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की है।

In the recent cabinet expansion in Bihar, prominent state BJP leader Mangal Pandey was overlooked, becoming a subject of intense discussion in political circles | बिहार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में बिहार भाजपा के कद्दावर नेता मंगल पांडेय को नहीं मिली तवज्जो, सियासी गलियारे में बना चर्चा का विषय

बिहार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में बिहार भाजपा के कद्दावर नेता मंगल पांडेय को नहीं मिली तवज्जो, सियासी गलियारे में बना चर्चा का विषय

पटना: बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा फेरबदल देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा ने कई पुराने चेहरों का पत्ता साफ कर दिया। सबसे ज्यादा चर्चा बिहार भाजपा के कद्दावर नेता और पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी मंगल पांडेय को मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने को लेकर हो रही है। इसके अलावा पूर्व मंत्री सुरेंद्र मेहता और नारायण प्रसाद को भी इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। तीनों नेता पिछली नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके थे, लेकिन सम्राट सरकार के पहले विस्तार में इनका नाम सूची से गायब रहा।

राज्य में कई सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले और पार्टी के संगठन में ‘संकटमोचक’ माने जाने वाले मंगल पांडे को ड्रॉप किया जाना आम लोगों को जरूर हैरान कर रहा है। लेकिन, राजनीति के जानकारों की नजर से देखा जाए तो यह केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि भाजपा की सोची-समझी दूरगामी रणनीति का हिस्सा है। मंगल पांडे को मंत्रिमंडल से बाहर रखने के पीछे सबसे प्रबल तर्क जो सामने आ रहा है, वह यह कि भाजपा उन्हें अब सरकार के बजाय संगठन में किसी बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार कर रही है। 

बता दें कि मंगल पांडे न केवल बिहार भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में प्रभारी के तौर पर भी उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की है। अब जब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना बना रही है। 

वहीं, चर्चा यह भी है कि संभव है कि उन्हें राष्ट्रीय महासचिव या किसी बड़े राज्य का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा जाए। हालांकि, एक और चर्चा यह भी है कि संभव है कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाया जाए। भाजपा में यह परंपरा रही है कि कद्दावर नेताओं को अक्सर सरकार से हटाकर संगठन के उन जटिल कार्यों में लगाया जाता है जहां अनुभव की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी आने वाले दिनों में उन्हें दिल्ली की राजनीति में क्या भूमिका सौंपती है।

Web Title: In the recent cabinet expansion in Bihar, prominent state BJP leader Mangal Pandey was overlooked, becoming a subject of intense discussion in political circles

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