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भारत में नवंबर में चरम पर होगा कोरोना वायरस, ICMR ने रिसर्च में किया दावा

By पल्लवी कुमारी | Updated: June 15, 2020 08:56 IST

भारत में कोरोना वायरस के 3 लाख 20 हजार 922 केस हैं। 9 हजार195 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस संक्रमण से मौत के मामले में भारत सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में नौंवे स्थान पर है।

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ठळक मुद्देरिसर्च में बताया गया है कि नवंबर में जब कोरोना पीक पर होगा तो ''आईसीयू बेड'' और ''वेंटिलेटर'' की कमी पड़ सकती है।ICMR द्वारा गठित 'ऑपरेशंस रिसर्च ग्रुप' के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए रिसर्च में दावा किया गया है कि लॉकडाउन ने महामारी के चरम पर पहुंचने को सम्भवत: 34 से 76 दिनों तक आगे बढ़ा दिया है। भारत में लगातार तीसरे दिन 10,000 से अधिक नए मामले सामने आये और यह कोविड-19 से सर्वाधिक प्रभावित चौथा देश हो गया है।

नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दुनियाभर से कोविड-19 का डेटा एकत्रित करने वाले जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय ने संक्रमण से मौत के लिहाज से भारत को नौंवे स्थान पर रखा है और संक्रमण के कुल मामलों को देखते हुए सर्वाधिक प्रभावित देशों में चौथे स्थान पर रखा है। इसी बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ( ICMR) द्वारा गठित ''ऑपरेशंस रिसर्च ग्रुप'' ने दावा किया है कि नवंबर के मध्य में भारत में कोरोना वायरस अपने चरम पर होगा। जिसके दौरान ''आईसीयू बेड'' और ''वेंटिलेटर'' की कमी पड़ सकती है। रिसर्च में सामने आया है कि लॉकडाउन ने महामारी के चरम पर पहुंचने को 34 से 76 दिनों तक आगे बढ़ा दिया। जिससे भारत में मेडिकल सेक्टर में तैयारी करने का वक्त मिल गया है।

ICMR द्वारा गठित ''ऑपरेशंस रिसर्च ग्रुप'' के रिसर्च में और क्या-क्या दावा किया गया?  

- रिसर्च में कहा गया है कि  लॉकडाउन ने संक्रमण के मामलों में 69 से 97 प्रतिशत तक कमी कर दी, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली को संसाधन जुटाने एवं बुनियादी ढांचा मजबूत करने में मदद मिली। लॉकडाउन के बाद जन स्वास्थ्य उपायों को बढ़ाये जाने और इसके 60 प्रतिशत कारगर रहने की स्थिति में महामारी नवंबर के प्रथम सप्ताह तक अपने चरम पर पहुंच सकती है। इसके बाद 5.4 महीनों के लिए आइसोलेशन बेड, 4.6 महीनों के लिए आईसीयू बेड और 3.9 महीनों के लिए वेंटिलेटर कम पड़ जाएंगे। यह अनुमान लगाया गया है।

ICMR (प्रतीकात्मक तस्वीर)

- रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं ने कहा कि बुनियादी ढांचा बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा सतत कदम उठाए जाने और विभिन्न क्षेत्रों में संक्रमण की दर अलग-अलग रहने के कारण महामारी के प्रभावों को घटाया जा सकता है। यदि जन स्वास्थ्य उपायों के कवरेज को बढ़ा कर 80 फीसदी कर दिया जाता है, तो महामारी के प्रभाव में कमी लाई जा सकती है। 

-भारत में कोविड-19 महामारी के मॉडल आधारित विश्लेषण के मुताबिक लॉकडाउन की अवधि के दौरान जांच, उपचार और रोगियों को पृथक रखने के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करने के साथ चरम पर मामलों की संख्या 70 फीसदी तक कम हो जाएगी और संक्रमण के (बढ़ रहे) मामले करीब 27 प्रतिशत घट जाएंगे। 

ICMR Director Balram Bhargava (File Photo)

-  रिसर्च में यह भी साफ हुआ है कि कोविड-19 से होने वाली मौतों के मामले में करीब 60 फीसदी मौतें टाली गई हैं और एक तिहाई मौतों को टाले जाने का श्रेय स्वास्थ्य सुविधा उपायों में वृद्धि को को जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 के प्रबंधन से नीतियों की उपयुक्त समीक्षा करने और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलेगी। 

-रिसर्च में कहा गया है, ''लॉकडाउन महामारी के चरम पर पहुंचने में देर करेगा और स्वास्थ्य प्रणाली को जांच, मामलों को पृथक करने, उपचार और संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए जरूरी समय प्रदान करेगा। ये कदम कोविड-19 का टीका विकसित होने तक भारत में महामारी का प्रभाव घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगा। 

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत में कोरोना वायरस के ताजा अपडेट

भारत में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के एक दिन में सर्वाधिक 11,929 नए मामले सामने आए । इसके साथ ही संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,20,922 हो गई है। संक्रमित लोगों में से 311 और लोगों की मौत के साथ मृतक संख्या 9,195 पर पहुंच गई है। 

कोरोना वायरस संक्रमण से मौत के मामले में भारत सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में नौंवे स्थान पर है। दुनियाभर से कोविड-19 का डेटा एकत्रित करने वाले जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय ने संक्रमण से मौत के लिहाज से भारत को नौंवे स्थान पर रखा है और संक्रमण के कुल मामलों को देखते हुए सर्वाधिक प्रभावित देशों में चौथे स्थान पर रखा है। यह लगातार तीसरा दिन है जब देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 10 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।

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