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कोविड-19 टीकों की बर्बादी नहीं होने देने को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किये गये:स्वास्थ्य सचिव

By भाषा | Updated: January 28, 2021 19:59 IST

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नयी दिल्ली, 28 जनवरी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 के टीकों की किसी भी तरह की बर्बादी नहीं होने देने को सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये हैं।

साथ ही, मंत्रालय ने कहा है कि इस उद्देश्य (टीकों की बर्बादी नहीं होने देने) के लिए टीकाकरण केंद्रों को प्रत्येक दिन के लिए निर्धारित 100 लाभार्थियों के अलावा अतिरिक्त लाभार्थियों को जोड़ने की अनुमति दी गई है, बशर्ते कि निर्धारित लाभार्थी टीका लगवाने नहीं पहुंचें।

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने यहां बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा कि जब टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया था, तब 10 फीसदी बर्बादी होने की हिसाब लगाया गया था।

दरअसल, उनसे पूछा गया था कि देश में टीकों की बर्बादी से निपटने के लिए मंत्रालय क्या कर रहा है।

भूषण ने कहा, ‘‘टीकों की बर्बादी कैसे रोकी जाए, इस पर हमने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये हैं। हमने अपने डिजिटल मंच को स्थिति के अनुरूप ढालने लायक बनाया है और यह अनुमति दी है कि 100 निर्धारित लाभार्थियों के अलावा, किसी टीकाकरण स्थल पर टीकाकरण सत्र का संचालन करा व्यक्ति डेटाबेस के आधार पर अतिरिक्त लोगों को शामिल कर सकता है। टीकों की बर्बादी को कम करने को सुनिश्चित करने के लिए यह किया जा रहा है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘इससे आगे बढ़ते हुए, हम टीके की बर्बादी का विश्लेषण किये जाने के बाद इसके आंकड़े भी साझा करेंगे।’’

भूषण ने कहा कि भारत में टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद से बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे तक 25,07,556 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने टीकाकरण कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन किया है तथा जहां स्वास्थ्य कर्मियों का 35 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण कवरेज किया गया है, उनमें लक्षद्वीप (83.4 प्रतिशत), ओडिशा (50.7 प्रतिशत), हरियाणा (50 प्रतिशत), अंडमान निकोबार द्वीप समूह (48.3 प्रतिशत), राजस्थान (46.8), त्रिपुरा (45.6 प्रतिशत), मिजोरम (40.5 प्रतिशत), तेलंगाना (40.3 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (38.1 प्रतिशत), कर्नाटक (35.6 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश(35.5 प्रतिशत) शामिल हैं।

भूषण ने कहा कि वहीं, दिल्ली में 15.7 प्रतिशत, झारखंड में 14.7 प्रतिशत, उत्तराखंड में 17.1 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 20.6 प्रतिशत, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 20.7 प्रतिशत है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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