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राजद सांसद मनोज झा के समर्थन में उतरे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कहा-वह एक प्रोफेसर हैं

By एस पी सिन्हा | Updated: September 30, 2023 17:49 IST

दिल्ली दौरे के बाद पटना लौटे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि हम राजपूतों के खिलाफ कैसे हो सकते हैं? जितने राजपूत विधायक हमारी पार्टी में हैं, उतने भाजपा में भी नहीं है। 

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ठळक मुद्देतेजस्वी ने मनोज झा की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में कोई गलत बात नहीं बोलीतेजस्वी यादव ने कहा, हम राजपूतों के खिलाफ कैसे हो सकते हैं?बोले, जितने राजपूत विधायक हमारी पार्टी में हैं, उतने भाजपा में भी नहीं है

पटना: राजद सांसद मनोज झा के द्वारा राज्यसभा में ‘ठाकुर का कुआं’ कविता पाठ करने को लेकर गर्माती सियासत के बीच दिल्ली दौरे के बाद पटना लौटे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि हम राजपूतों के खिलाफ कैसे हो सकते हैं? जितने राजपूत विधायक हमारी पार्टी में हैं, उतने भाजपा में भी नहीं है। 

तेजस्वी ने मनोज झा की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में कोई गलत बात नहीं बोली। लेकिन मनोज झा के खिलाफ सबसे पहले मोर्चा खोलने वाले अपनी पार्टी के विधायक चेतन आनंद और उनके पिता के बारे में कुछ भी बोलने से परहेज कर गए। 

हालांकि राजद विधायक चेतन आनंद को तेजस्वी यादव ने सख्त नसीहत दे दी। तेजस्वी ने कहा कि मनोज झा ने संसद में जो भी कहा वह ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता है। कविता पाठ को लेकर अगर चेतन आनंद को कोई आपत्ति थी तो उन्हें पार्टी के फोरम पर अपनी बातें रखनी चाहिए थी। 

उन्होंने अपनी बातें सोशल मीडिया के माध्यम से रखी जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था। उन्होंने मनोज झा के समर्थन में कहा कि वह एक प्रोफेसर हैं। उन्हें संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिल चुका है। संसद में प्रभावशाली तरीके से अपनी बातों को रखने के लिए ही मनोज झा बुद्धिमत्ता की सराहना हुई है। 

ऐसे में उन्होंने जो कविता पाठ किया वह किसी जाति के लिए नहीं था बल्कि संसाधनों पर कब्जा जमाए लोगों को इंगित करके उन्होंने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ठाकुर नाम से कविता पाठ करने का यह मतलब नहीं है कि इसमें राजपूत या किसी एक जाति को निशाना बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि कई जातियों के उपनाम ठाकुर हैं। कर्पूरी ठाकुर भी अपना उपनाम ठाकुर ही लगाते थे, जबकि वे राजपूत नहीं थे। इसी तरह यादव में भी कई उपनाम हैं। तेजस्वी ने कहा कि हम अहीर हैं, लेकिन हमारा उपनाम यादव है। कुछ का नाम राय, प्रसाद, चौधरी रहता है। 

उन्होंने कहा कि राजद हमेशा से पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के सिद्धांत का अनुसरण करती है, जो राजपूत थे। हम राजपूत जाति से आने वाले अर्जुन सिंह को मानते हैं, जिन्होंने शिक्षा में 27 फीसदी आरक्षण ओबीसी को दिया। हमारे लिए रघुवंश सिंह जैसे राजपूत रहे, जिन्होंने मनरेगा का लाभ दिया। इसलिए राजपूतों को लेकर राजद में हमेशा से सम्मान रहा है। यहां बता दें कि राजद में राजपूत विधायकों की संख्या 6 है, जबकि भाजपा में राजपूत विधायकों की तादाद 15 है।

टॅग्स :तेजस्वी यादवआरजेडीबिहारमनोज झाBJP
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