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बसपा प्रमुख मायावती ने दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 23, 2019 14:12 IST

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने रविवार को पार्टी की मीटिंग बुलाई थी इसमें दानिश अली को नेता बनाने का फैसला लिया गया। इसके अलावा मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। वहीं भतीजे आकाश आनंद और रामजी आनंद को पार्टी का नेशनल कोर्डिनेटर बनाया है।

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ठळक मुद्दे मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है।बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने रविवार को पार्टी की मीटिंग बुलाई थी इसमें दानिश अली को नेता बनाने का फैसला लिया गया।

दानिश अली लोकसभा में बहुजन समाज पार्टी के नेता होंगे। दानिश अली ने लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश के अमरोहा संसदीय सीट से जीत हासिल की है। अली लोकसभा चुनाव शुरू होने से पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का साथ छोड़कर बीएसपी में शामिल हुए थे।

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने रविवार को पार्टी की मीटिंग बुलाई थी इसमें दानिश अली को नेता बनाने का फैसला लिया गया। इसके अलावा मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। वहीं भतीजे आकाश आनंद और रामजी आनंद को पार्टी का नेशनल कोर्डिनेटर बनाया है।

अभी हाल ही में बजट सत्र शुरू होने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार की ‘एक देश एक चुनाव’ पहल पर नई दिल्ली में आयोजित बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें मायावती शामिल नहीं हुई थीं और उन्होंने कहा था कि ‘एक देश एक चुनाव’ भाजपा का नया ढकोसला है ताकि ईवीएम की सुनियोजित धांधलियों आदि के जरिये लोकतन्त्र पर कब्जा किए जाने को लेकर उपजी गम्भीर चिन्ता की तरफ से लोगों का ध्यान बंटाया जा सके। भाजपा सरकार को ऐसी सोच, मानसिकता एवं कार्यकलापों से दूर रहना चाहिये जिससे देश के संविधान एवं लोकतन्त्र को आघात पहुँचता है। 

उन्होंने कहा था कि भारत जैसे विशाल, 130 करोड़ से अधिक आबादी वाले 29 राज्यों व 7 केन्द्र शासित प्रदेशों पर आधारित लोकतान्त्रिक देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ के बारे में सोचना ही प्रथम दृष्टया अलोकतान्त्रिक व गैर-संवैधानिक प्रतीत होता है। देश के संविधान निर्माताओं ने ना तो इसकी परिकल्पना की और ना ही इसकी कोई गुन्जाइश देश के संविधान में रखी। दुनिया के किसी छोटे से छोटे देश में भी ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आती है।

मायावती का कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव कभी कोई समस्या नहीं हो सकता और न ही चुनाव को कभी धन के व्यय-अपव्यय से तौलना उचित है। देश में ’एक देश, एक चुनाव’ की बात वास्तव में गरीबी, महंगाई, बेरोजबारी, बढ़ती हिंसा जैसी ज्वलन्त राष्ट्रीय समस्याओं से ध्यान बांटने का प्रयास और छलावा है।

टॅग्स :मायावतीबीएसपी
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