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'पत्थर खाकर जिंदा नहीं रह सकते, दिल्ली में कोई किसी का नहीं', लॉकडाउन के ऐलान के बाद सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल घर जाने को मजबूर हैं ये मजदूर

By पल्लवी कुमारी | Updated: March 26, 2020 10:07 IST

भारत में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। हर दिन नए मामलों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बुधवार को कोरोना संक्रमित लोगों का आंकड़ा 600 के पार चला गया। इस दौरान कल (25 मार्च) को 70 नए मामले सामने आए।

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ठळक मुद्देदेश में कोरोना से 12 लोगों की मौत हो चुकी है। पूरे देश में 25 मार्च से 21 दिनों का लॉकडाउन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 मार्च को  पूरे देश में 21 दिनों के कंप्लीट लॉकडाउन की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूरों ने पलायन शुरू किया।

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के मद्देनजर की गई लॉकडाउन की वजह से दिहाड़ी मजदूरों का काम-धंधा ठप्प हो गया है। दिल्ली-एनसीआर में उत्तर प्रदेश ,बिहार, एमपी, राजस्थान के रह रहे रोज कमाने और खाने वाले शख्स और मजदूरों का बुरा हाल है। रोजगार बंद होने की वजह से यह पैदल ही अपने घर जाने को मजबूर हैं। 25 मार्च से देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इस दौरान रेलवे और बस सेवा भी बंद है, जिसकी वजब से ये लोग सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर है। सरकार के तमाम आश्वासनों के बावजूद न तो अपने मालिकों की तरफ से इन लोगों को  कोई मदद मिल रही है और ना मकान मालिक या राशन देने वाले उनपर मेहरबान हो रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया से लगभग 10 घंटे पैदल चलने के बाद बात करते हुए ठेका मजदूर अंकित कुमार ने कहा, मेरठ से 135 किलोमीटर दूर सहारनपुर में मेरा घर है। पिछले कुछ दिनों से कोई आय नहीं है और आने वाले महीने में कोई उम्मीद दिख रही है। मेरे पास छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। मुझे अभी कुछ दूर और चलना होगा।

कोई साधन नहीं मिल रहा है तो पैदल ही जाएंगे: दिहाड़ी मजदूर

वहीं दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली और यूपी पुलिस के कड़े पहरे के बीच 20-21 साल के कुछ लड़कों को पैदल चलते हुए देखा गया। जब पुलिस ने इनसे रोककर पूछा कि, कहां जा रहे हो तो इन्होंने कहा, वे लोग हापुड़ जा रहे हैं। पुलिस ने पूछा- इतनी दूर कैसे जाओगे? बस-ट्रेनें तो चल नहीं रही हैं। एक लड़के ने जवाब दिया- कोई साधन नहीं मिला, तो पैदल ही जाएंगे। 

पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि पैदल जा रहे ये युवा लड़के गांधी नगर इलाके में दिहाड़ी पर मजदूरी करते थे। लॉकडाउन की वजह से वहां काम ठप हो गया है। 

हम पत्थर खाकर जिंदा नहीं रह सकते: दिल्ली में काम करने वाला दिहाड़ी मजदूर बंटी

एनडीटीवी ने एक दिल्ली में काम करने वाले मजदूर बंटी की कहानी लिखी है। बंटी का गांव दिल्ली से 150 किलोमीटर दूर है। उसे अपने तीन बच्चों के साथ घर पहुंचने में 2 दिन लगेंगे। न तो उनके पास पर्याप्त पैसा है और न ही भोजन। बंटी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पैदल ही दिल्ली से यूपी के अपने गांव जाने को मजबूर है। 

बंटी का कहना है, "दिल्ली में कोई भी आपकी मदद नहीं करता है, जिस तरह से लोग गांव में करते हैं। हम नमक या चटनी के साथ रोटी खा सकते हैं। लेकिन वह शांतिपूर्ण होगा। लेकिन यहां, हमारे पास कुछ भी नहीं है। दिल्ली में कोई भी किसी की मदद नहीं करता है।" बंटी का कहना है, हम यहां (दिल्ली) में क्या खाएंगे? कोई भी पत्थर नहीं खा सकता है। 

24 मार्च की रात से बड़ी संख्या में मजदूरों ने शुरू किया पलायन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 मार्च को  पूरे देश में 21 दिनों के कंप्लीट लॉकडाउन की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूरों ने पलायन शुरू किया। मंगलवार रात से ही बड़ी तादाद में लोग अपना बोरिया-बिस्तर लेकर यूपी, बिहार, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में स्थित अपने घरों के लिए निकल पड़े।

मजदूरों के पलायन की चर्चा सोशल मीडिया पर भी

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