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भारत-चीन के बीच बढ़े विवाद के चलते परेशानी में चीनी छात्र, अपनाई दूसरे छात्रों से बच के चलने की नीति

By एसके गुप्ता | Updated: June 18, 2020 21:01 IST

भारत-चीन सीमा पर सोमवार रात गलवान घाटी में दोनों सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना 20 सैनिक शहीद हो गए। पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है ।

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ठळक मुद्देचीन से भारत में शिक्षा प्राप्त करने आए छात्रों को कहा जा रहा है कि बच के चलो। जेएनयू कैंपस में चीन के कई बच्चे कुछ विभागों में पढ़ रहे हैं।

नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच बढ़े विवाद को ध्यान में रखते हुए चीन से भारत में शिक्षा प्राप्त करने आए छात्रों को कहा जा रहा है कि बच के चलो। जेएनयू कैंपस में चीन के कई बच्चे कुछ विभागों में पढ़ रहे हैं। यह लोग अभी भी कैंपस में रह रहे हैं। यहां छात्रों ने दूसरे छात्रों से बच के चलने की नीति बनाई हुई है। 

एक छात्र ने कहा कि जब यहां छोटी-छोटी बातों पर राष्ट्रवादी और राष्ट्रविरोधी छात्रों का तमगा लगा दिया जाता है। ऐसे में चीन से होने का खामियाजा हमें भुगतना पड़ सकता है। अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखकर हमें काफी सोच विचारकर रहना पड़ रहा है। जेएनयू के सेंटर फोर चाइनिज एंड साउथ ईस्ट एशिया के कुछ प्रोफेसर ने भारत-चीन विवाद पर बात करने से साफ मना करते हुए कहा कि जेएनयू को विवादों में नहीं रहना चाहिए। यहां छात्र पढ़ने आए हुए हैं। कैंपस में चीन ही नहीं कई अन्य देशों के छात्र भी रह रहे हैं।

चीन में पढाई करने के गए हुए छात्रों के संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सालाना करीब 7 हजार छात्र चीन में पढ़ने के लिए जाते हैं। इनमें से अधिकाशं वहां डॉक्टर बनने के लिए जाते हैं। लेकिन जब से कोरोना संक्रमण फैला है। तब से नए छात्रों का वहां जाना नहीं हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों के लिए के लिए मंत्रालय स्टडी इन इंडिया स्कीम चला रहा है। जिससे वहां छात्रों को जाने की जरूरत ही न पड़े।

भारत-चीन सीमा पर सोमवार रात गलवान घाटी में दोनों सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना 20 सैनिक शहीद हो गए। पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय में सबसे बड़े सैन्य टकराव के कारण क्षेत्र में सीमा पर पहले से जारी गतिरोध और भड़क गया है । सेना ने शुरू में मंगलवार को कहा कि एक अधिकारी और दो सैनिक शहीद हुए । लेकिन, देर शाम बयान में कहा गया कि 17 अन्य सैनिक “जो अत्यधिक ऊंचाई पर शून्य से नीचे तापमान में गतिरोध के स्थान पर ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्होंने दम तोड़ दिया है। इससे शहीद हुए सैनिकों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।” सरकारी सूत्रों ने कहा है कि चीनी पक्ष के सैनिक भी “उसी अनुपात में” हताहत हुए हैं । 

टॅग्स :चीनलद्दाखजवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू)
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