Chaukidar chor hai Will turn into Maut ka saudagar, Rahul Gandhi and should learn Soniya Gandhi on PM Modi | सोनिया गांधी की गलती दोहरा रहे हैं राहुल गांधी, 'चौकीदार चोर है' का नारा 'मौत का सौदागर' बन सकता है?
सोनिया गांधी की गलती दोहरा रहे हैं राहुल गांधी, 'चौकीदार चोर है' का नारा 'मौत का सौदागर' बन सकता है?

Highlightsहाल ही में एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी कहा था कि नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत स्तर पर करप्शन नहीं कर सकते. भावनात्मक रूप से संवेदनशील देश में राहुल गांधी यह जोखिम क्यों उठा रहे हैं, इसका जवाब खुद वहीं दे सकते हैं. सोनिया गांधी की एक रैली 13 दिसंबर 2007 को हुई और इस दौरान उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'मौत का सौदागर बताया'.

किसानों की खराब माली हालत, युवाओं में महामारी की तरह फैली बेरोजगारी और देश में बढ़ती आर्थिक असमानता के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में राफ़ेल डील पर ही फ्रंटफूट पर खेलना चाह रहे हैं. 'चौकीदार चोर है' का नारा इसी गेमप्लान का हिस्सा है. भावनात्मक रूप से संवेदनशील देश में राहुल गांधी यह जोखिम क्यों उठा रहे हैं, इसका जवाब खुद वहीं दे सकते हैं. उनके सिपाहसलार कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी के गुजरात में दिए गए बयान की याद उन्हें क्यों नहीं दिला रहे हैं, यह राहुल गांधी के लिए चिंता का विषय है.

सोनिया गांधी ने दिया राजनीतिक जीवनदान 

साल 2007 गुजरात एक बार फिर विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो गया था. नरेन्द्र मोदी हिंदूत्व को पीछे छोड़कर विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का मन बना चुके थे. वाइब्रेंट गुजरात समिट के जरिये ब्रांड मोदी का अक्स तैयार करना और उसके बाद गुजरात की जीत के जरिये पूरे देश के सामने विकास का गुजरात मॉडल पेश करने को बेताब थे. लेकिन चुनौतियां उनके सामने मुंह बाये खड़ी थी. विकास को अपना साथी बनाना और हिंदूत्व को पीछे छोड़ने के कारण उनके परंपरागत साथी आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद ने उन्हें चुनाव में कोई मदद नहीं करने का मन बना लिया था. बीजेपी का कोई नेता कितना भी बड़ा हो जाये लेकिन संघ के समर्थन के बिना वैचारिक खाद-पानी उसे मिलता नहीं है. 

प्रवीण तोगड़िया और विहिप को ठिकाना लगाया 

2002 के गुजरात दंगे के कारण नरेन्द्र मोदी की वैश्विक स्तर पर आलोचना हुई थी. विहिप और बजरंग दल की गुजरात दंगों में सलिंप्तिता के कारण नरेन्द्र मोदी पर ये आरोप लगे थे कि उन्होंने इन संगठनों को जानबूझकर खुला छोड़ दिया था. खैर, तमाम न्यायिक प्रणालियों से गुजरने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दिया था. लेकिन मोदी के मन में कहीं न कहीं विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों के लिए कसक बाकी रह गई थी. और उन्होंने धीरे-धीरे राज्य में इन संगठनों को ठिकाना लगाना शुरू कर दिया. इसके लिए उन्होंने सबसे पहले अपने करीबी मित्र रहे प्रवीण तोगड़िया की राजनीतिक दखलंदाजी को शून्य कर दिया.

विहिप ने मोदी पर विकास के नाम पर कई मंदिरों को तोड़ने का आरोप लगाया. जिससे उनकी हिंदूवादी छवि को गहरा धक्का लगा. नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगा कि पहले तो उन्होंने प्रवीण तोगड़िया और उनके संगठन का इस्तेमाल कर खुद को हिन्दू ह्रदय सम्राट के रूप में स्थापित किया और उसके बाद हाशिये पर धकेल दिया. ये हकीकत है कि विकास के नाम पर उनके कार्यकाल में कई मन्दिर तोड़े गए लेकिन नरेन्द्र मोदी विहिप और बजरंग दल की कार्यप्रणाली से काफी ऊपर उठ चुके थे. 

'मौत का सौदागर' बना संजीवनी 

ऐसा लगने लगा था कि मोदी का गुजरात फतह का सपना इस बार अधूरा रह सकता है. क्योंकि गुजरात में हिंदूवादी सेंटिमेंट उस वक्त तक काफी मजबूत हो चुका था. बिना संघ और विहिप के समथन के मोदी अपने पॉलिटिकल परसेप्शन को मजबूत नहीं कर पा रहे थे. लेकिन इसी बीच कांग्रेस की तात्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी की एक रैली 13 दिसंबर 2007 को हुई और इस दौरान उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'मौत का सौदागर बताया'. सोनिया गांधी के इस बयान की चर्चा पूरे देश में होने लगी. और फिर वही हुआ जिसकी जरूरत नरेन्द्र मोदी को थी.

संघ और विहिप ने सोनिया गांधी के बयान की तीखी आलोचना की. आरएसएस ने अपने वैचारिक सिपाही के लिए चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया और सोनिया गांधी को सबक सिखाने के लिए विहिप के कार्यकर्ताओं ने भी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में जबरदस्त माहौल बनाया. चुनाव में बीजेपी की एकतरफा जीत हुई और नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित हो गए. सोनिया गांधी के एक बयान ने मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर हिंदुवादियों का लाडला बना दिया. 

नरेन्द्र मोदी का हिंदूत्व और विकास 

गुजरात चुनाव से नरेन्द्र मोदी को भी एक बात समझ कि राष्ट्रीय राजनीति में छाने के लिए उन्हें हिंदूत्व और विकास को साथ-साथ साधना होगा. और उन्होंने 2007 के बाद अपनी राजनीति में इसका मिश्रण सफलतापूर्वक लागू किया. इसमें कोई शक नहीं है कि सोनिया गांधी को अपने इस बयान का आज तक पछतावा जरुर होता होगा.

चौकीदार कितना चोर है 

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अस्तित्व को एक बार से स्थापित करने के लिए राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' का नारा इजाद किया है. मोदी सरकार आर्थिक रूप से जितनी भी असफल रही हो लेकिन पीएम मोदी के बारे में एक धारणा आम है कि वो खुद भ्रष्टाचारी नहीं हो सकते. हाल ही में एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी कहा था कि नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत स्तर पर करप्शन नहीं कर सकते. लेकिन राहुल गांधी उन्हें चोर साबित करने पर तुले हुए हैं. अपनी रैलियों में 'चौकीदार चोर है' के नारे को बुलंद कर रहे हैं. अब इस रणनीति के तहत उन्हें सफलता मिलेगी या 2007 की तरह नरेन्द्र मोदी को राजनीतिक जीवनदान देगी यह अगले 100 दिनों में स्पष्ट हो जायेगा. 


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