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खुशखबरी: बेहतरीन काम कर रहा है चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर, इसरो ने जारी की चंद्रमा के सतह की तस्वीरें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 5, 2019 13:58 IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रमा के सतह की तस्वीरें जारी की हैं। ये तस्वीरें चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने क्लिक की हैं।

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ठळक मुद्देऑर्बिटर ने चंद्रमा की सतह से 100 किमी ऊपर से ये तस्वीरें ली हैं। इन तस्वीरों में बोल्डर और छोटे क्रेटर भी दिखाई दे रहे हैं।

चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर भले ही क्रैश हो गया हो लेकिन ऑर्बिटर बेहतरीन तरीके से काम कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रमा के सतह की तस्वीरें जारी की हैं। ये तस्वीरें चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने ही क्लिक की हैं। इसरो के मुताबिक ऑर्बिटर ने चंद्रमा की सतह से 100 किमी ऊपर से ये तस्वीरें ली हैं। इन तस्वीरों में बोल्डर और छोटे क्रेटर भी दिखाई दे रहे हैं।

दूसरी तरफ इसरो ने करीब चार सप्ताह से अधिक समय पहले चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के दौरान संपर्क से बाहर हुए ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क कायम करने की कोशिशें अभी छोड़ी नहीं हैं। गत सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से कुछ मिनट पहले ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था। इसके बाद से ही बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए ‘‘हरसंभव’’ कोशिशें कर रही है, लेकिन चंद्रमा पर रात शुरू होने के कारण 10 दिन पहले इन कोशिशों को स्थगित कर दिया गया था।

इसरो ने प्रक्षेपण से पहले कहा था कि लैंडर और रोवर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिनों के बराबर होगा। कुछ अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि लैंडर से संपर्क स्थापित करना अब काफी मुश्किल लगता है। इसरो के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘मुझे लगता है कि कई दिन गुजर जाने के बाद संपर्क करना काफी मुश्किल होगा लेकिन कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है।’’ 

यह पूछे जाने पर कि क्या चंद्रमा पर रात के समय अत्यधिक ठंड में लैंडर दुरुस्त स्थिति में रह सकता है, अधिकारी ने कहा, ‘‘सिर्फ ठंड ही नहीं, बल्कि झटके से हुआ असर भी चिंता की बात है क्योंकि लैंडर तेज गति से चंद्रमा की सतह पर गिरा होगा। इस झटके के कारण लैंडर के भीतर कई चीजों को नुकसान पहुंच सकता है।’’ इस बीच, सिवन ने कहा था कि ऑर्बिटर ठीक है।

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से इनपुट्स लेकर

टॅग्स :चंद्रयानभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
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