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असम की राज्यसभा सीट के लिए सहयोगियों का भाजपा पर दबाव

By संतोष ठाकुर | Updated: May 26, 2019 02:38 IST

असम की दो सीटों में से एक भाजपा ने असम गण परिषद को देने का वादा किया था। ऐसे में उसकी ओर से भाजपा पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह इसकी घोषणा करे।

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ठळक मुद्देभाजपा की मुश्किल यह है कि असम में दो साल के अंदर चुनाव होने हैं। राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की ओर से पार्टी हाईकमान पर दबाव है कि वह किसी स्थानीय भाजपा नेता को ही यहां से राज्यसभा सीट दें।

असम से राज्यसभा की दो सीटें भाजपा के कोटे में आने वाली है। इसको लेकर सहयोगी दलों ने भाजपा पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। इन सहयोगियों में असम गण परिषद भी शामिल है, जिसने भाजपा के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा है। फिलहाल इन दो सीटों पर कांग्रेस काबिज है। इसमें से एक सीट से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा के सदस्य हैं। जून के दूसरे सप्ताह में ये दोनों सीटें खाली होने वाली हैं और उसके बाद चुनाव में इन पर भाजपा सदस्यों का निर्वाचन सुनिश्चित है। असम की दो सीटों में से एक भाजपा ने असम गण परिषद को देने का वादा किया था। ऐसे में उसकी ओर से भाजपा पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह इसकी घोषणा करे। इधर, भाजपा ने लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान को भी राज्यसभा सीट का वादा किया है। लोजपा भी चाहती है कि उन्हें पहले ही चरण में राज्यसभा सीट मिल जाए जिससे रामविलास पासवान पहले ही सत्र से संसद में उपस्थित रहें। हालांकि इधर, भाजपा की मुश्किल यह है कि असम में दो साल के अंदर चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की ओर से पार्टी हाईकमान पर दबाव है कि वह किसी स्थानीय भाजपा नेता को ही यहां से राज्यसभा सीट दें। ऐसा नहीं करने पर यह संदेश जाएगा कि भाजपा भी कांग्रेस की तरह ही बाहरी लोगों को असम की सीट राजनैतिक हानि—लाभ के लिहाज से बांट रही है। राज्य सरकार के इस रूख से भाजपा यहां की सीटों को लेकर असमंजस में है। दूसरी ओर, यह चर्चा भी हो रही है कि भाजपा आलाकमान को दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा के हारने का दुख है और वह शायद मनोज सिन्हा को राज्यसभा के रास्ते संसद में लाए। ऐसे में उन्हें भी असम से लाने की संभावना जाहिर की जा रही है। हालांकि इसको लेकर अधिकारिक रूप से किसी ने कुछ नहीं कहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि असम की सीटों को लेकर कोई समस्या उन्हें नहीं दिखती है। इसकी वजह यह है कि पार्टी के कई नेता जो राज्यसभा में हैं, वे लोकसभा चुनाव जीत गए हैं। ऐसे में इन सीटों पर भी भाजपा के सदस्य ही राज्यसभा में आएंगे। इनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अहमदाबाद सीट से रिकार्ड मतों से जीते हैं तो वहीं अपना पहला चुनाव लड़ने वाले कानून—सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद भी शत्रुघन सिन्हा को हराकर रिकार्ड मतों से पटना साहिब से जीत गए हैं। जबकि इस चुनाव में राजनैतिक रूप से सबसे बड़ी जीत करते हुए कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनाव में हरा दिया है। रामविलास पासवान को जहां रविशंकर प्रसाद की सीट से राज्यसभा भेजा जा सकता है वहीं अगर किसी अन्य को राज्यसभा से संसद लाना है तो पार्टी के पास कई अन्य सीट भी राज्यसभा में होगी। संभव है कि हम अपने सहयोगी दलों को गुजरात या किसी अन्य राज्य से राज्यसभा में ले आएं। 

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