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बिहार में सियासी चक्रव्यूह में फंसी जदयू! लड़ाई अब भाजपा बनाम राजद होने की संभावना

By एस पी सिन्हा | Updated: November 7, 2022 15:44 IST

बिहार में मोकामा और गोपालगंज के नतीजों ने राजद और भाजपा दोनों पार्टियों को उत्साहित कर दिया है। मोकामा में भाजपा भले ही हार गई हो लेकिन उसने कड़ी टक्कर जरूर दी।

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पटना: बिहार विधानसभा के दो सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद आए परिणाम से एक ओर जहां भाजपा नेता खासे उत्साहित दिख रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर राजद का जोश भी बढ़ गया है। भाजपा भले ही मोकामा सीट हार गई हो, लेकिन गोपालगंज की जीत और मोकामा की कड़ी टक्कर ने भाजपा के उत्साह को बढ़ा दिया है। 

उसी तरह से मोकामा सीट पर मिली जीत ने राजद के जोश को भी ठंढा नही होने दिया है। ऐसे में अब यह अनुमान लगाया जाने लगा है कि बिहार की सियासत अब भाजपा बनाम राजद लड़ाई होगी। मोकामा सीट पर राजद और गोपालगंज पर भाजपा का कब्जा बरकरार रहा। 

बिहार में बदल रहा राजनीतिक समीकरण!

राज्य में सत्ता समीकरण बदलने के बाद हुए इस उपचुनाव के नतीजे पर पूरे देश की नजर थी। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा से अलग होकर महागठबंधन में शामिल होने का कोई असर नहीं पड़ा। विधानसभा के 2020 के चुनाव में नीतीश कुमार भाजपा के साथ एनडीए सरकार के मुखिया थे। नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद संभावना व्यक्त की जा रही थी कि राज्य में भाजपा बहुत कमजोर हो जायेगी। लेकिन इस उपचुनाव में भाजपा अपनी गोपालगंज सीट बचाने में कामयाब हो गई। 

भले ही जीत का अंतर बहुत अधिक नही हो। लेकिन राजद ही अपने आधार वोट बैंक ’एमवाय’ को जोडे रखने में असफल रहा। अल्पसंख्यक वोटों में औबैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सेंधमारी कर दी। जबकि यादव वोट बैंक में और कोई नही बल्कि उपमुख्यमंत्री की मामी इंद्राणी देवी ने सेंध लगा दी। वह बसपा की उम्मीदवार थीं और उन्हें आठ हजार से कुछ अधिक वोट मिले। 

इंद्राणी देवी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के साले और पूर्व सांसद साधु यादव की पत्नी हैं। राजद उम्मीदवार मोहन प्रसाद गुप्ता को हराने में तेजस्वी के मामा-मामी की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। जानकारों के अनुसार उपचुनाव के नतीजे भाजपा और महागठबंधन दोनों के लिए एक संदेश है।

मोकामा में राजद की जीत के अंतर में कमी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के किसी भी कारण से प्रचार में नहीं जाना आंतरिक कलह का संदेश भी सामने आया था। मोकामा में अनंत सिंह की जीत राजद के लिए कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जीत का अंतर वहां गिर गया है। 

वहीं, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पैतृक जिले गोपालगंज में जीत का मतलब तेजस्वी प्रसाद यादव के लिए कुछ जरूर बड़ा होता। ऐसे में कहा जा रहा है कि मतदाताओं ने दोनों को आईना दिखाया है कि आने वाले दिनों में लड़ाई और भी तेज हो सकती है। गोपालगंज में राजद के लिए संदेश जोरदार है कि सत्ता परिवर्तन के लिए चीजों को जल्दी न करें।

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