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कमलनाथ सरकार के खिलाफ नौकरी नियमित करने की मांग को लेकर गेस्ट लेक्चरर ने मुंडवाया सिर, कहा- 72 दिनों से यहां बैठे हैं लेकिन...

By राजेंद्र पाराशर | Updated: February 20, 2020 06:29 IST

मोर्चा के प्रवक्ता डॉ. आशीष पांडे ने बताया कि संगठन द्वारा 2 दिसंबर से छिंदवाड़ा से आंदोलन शुरू किया गया था. इस हिसाब से आंदोलन के 90 दिन बीत चुके हैं.

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ठळक मुद्देअतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डा. देवराज सिंह ने बताया कि फिलहाल एक महिला अतिथि विद्वान ने 19 फरवरी को 1 बजे मुंडन कराया है.विरोध प्रदर्शन में आईं एक गेस्ट लेक्चरर ने कहा- यदि यही चलता रहा तो यहां बैठीं सभी महिलाएं सिर मुंडवाएंगी.

भोपाल में के यादगार ए शाहजहांनी पार्क में अतिथि विद्वानों का 72 वें दिन भी आंदोलन जारी रहा. आंदोलन के दौरान महिला अतिथि विद्वानों ने मुंडन कराकर विरोध जताया. मुंडन धरने पर बैठी महिला अतिथि विद्वान डा. शाहीन खान ने कराया. डा. शाहीन खान कटनी जिले में अतिथि विद्वान है. उन्होंने कहा कि हम अपनी मांगों को लेकर एक महीने से ज्यादा समय से धरने पर बैठे हुए हैं, मगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि सरकार बनने के पहले कांग्रेस ने वचन पत्र में हमें नियमित करने का वादा किया था, वह वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है. सरकार के मंत्री धरना स्थल पर आते हैं, आश्वासन देकर चले जाते हैं, मगर जब तक हमें लिखित में आदेश नहीं दिया जाएगा, हम इसी तरह धरने पर बैठें रहेंगे.

विरोध प्रदर्शन में आईं एक गेस्ट लेक्चरर ने अपना सिर मुंडवा लिया। उन्होंने कहा,"हम पिछले 72 दिनों से यहां बैठे हैं, लेकिन सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है. यदि यही चलता रहा तो यहां बैठीं सभी महिलाएं सिर मुंडवाएंगी."

मोर्चा के प्रवक्ता डॉ. आशीष पांडे ने बताया कि संगठन द्वारा 2 दिसंबर से छिंदवाड़ा से आंदोलन शुरू किया गया था. इस हिसाब से आंदोलन के 90 दिन बीत चुके हैं. स्वर्गी संजय कुमार की पत्नी लालसा देवी भी 3 दिन से अस्थि कलश लेकर धरने पर बैठी हैं. उन्होंने कहा हमें मुख्यमंत्री के आने का इंतजार है. जब तक वे नहीं आएंगे तब तक हम यहीं डटे रहेंगे.

26 को 4 महिला अतिथि विद्वान कराएंगी मुंडन

अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डा. देवराज सिंह ने बताया कि फिलहाल एक महिला अतिथि विद्वान ने 19 फरवरी को 1 बजे मुंडन कराया है.इसके बाद भी अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुई तो 26 फरवरी को 4 महिला अतिथि विद्वान मुंडन कराएंगी. इसके बाद यह क्रम जारी रहेगा. बाद में 4 मार्च को महिला और पुरुष दोनों अतिथि विद्वान मुंडन कराएंगे।

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