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आर्ट थेरेपी क्या है और इससे मरीजों को कैसे मदद मिलती है?

By उस्मान | Updated: September 25, 2018 07:57 IST

कभी-कभी पीड़ित व्यक्ति इतने गहरे अवसाद, दुख और पीड़ा में होता है कि वह अपने विषय में कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं होता। वह खुलकर अपने बारे में बहुत पूछने पर भी कुछ नहीं बताता। ऐसी स्थिति में आर्ट थेरेपी का सहारा लिया जाता है

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कभी-कभी पीड़ित व्यक्ति इतने गहरे अवसाद, दुख और पीड़ा में होता है कि वह अपने विषय में कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे व्यक्ति से अपनी बात कहलवाने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा लेना पड़ता है। काउंसलर आजकल इस दूसरे माध्यम के रूप में अकसर आर्ट थैरेपी का सहारा लेते हैं। किसी भी प्रकार की समस्या को सुलझाने के लिए जब किसी की काउंसिलिंग करने या कराने की बात की जाती है, तो दिमाग में एक तस्वीर उभरकर सामने आती है कि किसी काउंसलर यानी साइकेट्रिस्ट के सामने बैठा पेशेंट साइकेट्रिस्ट से अपने बचपन से लेकर आजतक के जीवन अनुभवों को शेयर कर रहा है। 

वास्तव में किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए या समस्या की जड़ तक जाने के लिए काउंसलर की मदद ली जाती है और काउंसलर की मदद से इस तरह समस्याओं को अकसर सुलझा लिया जाता है। पेशेंट को इससे काफी हद तक उबरने में मदद मिलती है। लेकिन कभी-कभी पीड़ित व्यक्ति इतने गहरे अवसाद, दुख और पीड़ा में होता है कि वह अपने विषय में कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं होता। वह खुलकर अपने बारे में बहुत पूछने पर भी कुछ नहीं बताता। वह अपने भीतर की पीड़ा को छुपाकर खामोश बना रहता है। भले ही उस पर कुछ बताने के लिए कितना ही दबाव क्यों न डाला जाए। 

ऐसे में शब्द अनुपयोगी साबित होते हैं। विशेषज्ञों की राय में ऐसे व्यक्ति से अपनी बात कहलवाने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा लेना पड़ता है। काउंसलर आजकल इस दूसरे माध्यम के रूप में अकसर आर्ट थैरेपी का सहारा लेते हैं। इसके जरिये पेसेंट बिना ज्यादा कुछ बोले अपनी कला द्वारा अपने मनोभावों को व्यक्त करता चला जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आर्ट थैरेपी क्या है? 

आर्ट थेरेपी क्या है?

आर्ट थैरेपी के भीतर कलात्मक तकनीकी माध्यमों जैसे ड्राइंग, पेंटिंग, कोलाज, कलरिंग या मूर्ति बनाने के द्वारा लोगों से उनकी अपनी बात कहलवाने के लिए कला का सहारा लिया जाता है और उनकी मानसिक तथा भावनात्मक स्थिति-दुख, पीड़ा और दबाव को कला के माध्यम में ढालकर उनका अध्ययन किया जाता है। इसमें आर्ट थैरेपिस्ट के दिशा-निर्देश में, उस व्यक्ति द्वारा की गई अभिव्यक्ति के भावनात्मक व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। आर्ट थैरेपी और काउंसलिंग स्पीच थैरेपी और ऑक्यूपेशनल थैरेपी बच्चों व बड़ों के इलाज में काफी कारगर साबित हुई है।

आर्ट थेरेपी क्यों उपयोगी है?

आर्ट थैरेपी यौन शोषण वाले बच्चों, बीमारियों से जूझने वाले लोग या वैवाहिक संबंधों में होने वाले झगड़ों से परेशान कपल्स, जब एक दूसरे के साथ सहज होकर यानी खुलकर बात नहीं कर पाते हैं, तो इस थैरेपी का सहारा लिया जाता है। यह काउंसलिंग का एक अलग हिस्सा है। इसके द्वारा उनके आत्मविश्वास को वापस लाकर उसके तनाव, दुख, परेशानी की वजह को जांच, समझकर उसमें सुधार लाकर उसकी शारीरिक बीमारी या अक्षमता को कम किया जाता है।

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