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दुनिया के 5 सबसे खतरनाक वायरस, कुछ ही घंटों में मौत बन जाता है दूसरा वायरस, ऐसे बचें

By उस्मान | Updated: April 20, 2019 14:57 IST

वैज्ञानिक और डॉक्टर मानते हैं कि वायरस के लक्षणों की शुरुआत में जांच करके और समय पर इलाज कराने से मौत से बचा जा सकता है। इसलिए किसी भी इंसान को बुखार, सिरदर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी जैसी सामान्य बीमारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 

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दुनिया में इबोला, रेबीज, हेपेटाइटिस, रूबेला, इंफ्लूएंजा, निपाह और जिका जैसे कई खतरनाक वायरस मौजूद हैं। यह वायरस इतने खतरनाक हैं कि इससे पीड़ित मरीज का अगर सही समय पर इलाज नहीं कराया गया, तो उसे मौत से कोई नहीं बचा सकता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में इनसे भी ज्यादा खतरनाक मौजूद हैं जिनके बारे में बहुत से लोगों को जानकारी नहीं है। दुखद यह है कि इन वायरस की मृत्यु दर 90 प्रतिशत तक है। 

1) इबोला वायरस (Ebola virus) इबोला वायरस पांच तरह का होता है, प्रत्येक का नाम अफ्रीका के पांच क्षेत्रों ज़ैरे, सूडान, ताई वन, बुंडिबुग्यो और रेस्टन के नाम पर रखा गया है। ज़ैरे इबोला वायरस सबसे घातक है, जिसकी मृत्यु दर 90 प्रतिशत है। यह वर्तमान में गिनी, सिएरा लियोन और लाइबेरिया और उससे आगे तक फैला हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ज़ैरे इबोला वायरस फ्लाइंग फॉक्स के कारण आया।

2) मारबर्ग वायरस (Marburg virus) सबसे खतरनाक वायरस मारबर्ग वायरस है। इसका नाम लाहन नदी पर एक छोटे शहर के नाम पर रखा गया है। मारबर्ग वायरस एक रक्तस्रावी बुखार वायरस है। इबोला की तरह, मारबर्ग वायरस श्लेष्म झिल्ली, त्वचा और अंगों की ऐंठन और रक्तस्राव का कारण बनता है। इसकी मृत्यु दर 90 प्रतिशत है। 

3) हंटावायरस (Hantavirus) हंटावायरस कई प्रकार के विषाणुओं से मिलकर बना है। इसका नाम एक नदी के नाम पर रखा गया है, जहां अमेरिकी सैनिकों को पहली बार 1950 में कोरियाई युद्ध के दौरान हंटावायरस से संक्रमित होने के बारे में पता चला था। इसके लक्षणों में फेफड़े की बीमारी, बुखार और किडनी फेलियर शामिल हैं।

4) बर्ड फ्लू (Bird Flu) बर्ड फ्लू एक खतरनाक वायरस है जिसकी मृत्यु दर 70 प्रतिशत है। लेकिन H5N1 के संपर्क में आने का खतरा कम ही होता है। आप केवल पोल्ट्री के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से ही संक्रमित हो सकते हैं। यह कहा जाता है कि एशिया में लोग अक्सर चिकन के संपर्क में रहते हैं इसलिए यहां बर्ड फ्लू के मामले अधिक होते हैं।

5) लस्सा वायरस (Lassa virus) नाइजीरिया की एक नर्स पहली बार लसा वायरस से संक्रमित हुई थी। यह वायरस कृन्तकों के द्वारा फैलता है। इसके मामले स्थानिक हो सकते हैं- जैसे कि पश्चिमी अफ्रीका और यह यहां कभी भी हो सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अफ्रीका में लगभग 15 फीसदी कृन्तक वायरस है।

इस बात का रखें ध्यानवैज्ञानिक और डॉक्टर मानते हैं कि ऊपर बताए गए वायरस के लक्षणों की शुरुआत में जांच करके और समय पर इलाज कराने से मौत से बचा जा सकता है। इसलिए किसी भी इंसान को बुखार, सिरदर्द, सर्दी-जुकाम, खांसी जैसी सामान्य बीमारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 

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