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हर महिला को हफ्ते में जरूर करना चाहिए ये काम, वरना हमेशा के लिए छिन सकता है मां बनने का सुख

By उस्मान | Updated: January 16, 2020 10:29 IST

मेनोपॉज का मतलब है मासिक धर्म का बन्द होना जिसका मतलब यह है कि इस स्थिति में महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती हैं।

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एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं नियमित रूप से यौन संबंध नहीं बनाती हैं उन्हें बहुत जल्दी मेनोपॉज का सामना करना पड़ सकता है। यानी जो महिलाएं यौन संबंध बनाती रहती हैं उन्हें इसका कम खतरा होता है। मेनोपॉज को रजोनिवृत्ति (मासिक धर्म का बन्द होना) कहा जाता है जिसका मतलब यह है कि इस स्थिति में महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती हैं।

नोमपेनपोस्ट पर प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हफ्ते में एक बार यौन संबंध बनाने वाली महिलाओं में रजोनिवृत्ति की संभावना महीने में एक बार संभोग करने वाली महिलाओं से 28 फीसदी कम होती है। कहा गया है कि जो महिलाएं 35 या इससे अधिक उम्र में बार-बार संभोग नहीं करती हैं, उनमें जल्द रजोनिवृत्ति देखने को मिलती है। अगर कोई महिला यौन संबंध नहीं बना रही है और गर्भधारण का कोई मौका नहीं है, तो शरीर अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) बंद कर देता है क्योंकि यह व्यर्थ होगा।

मेनोपॉज क्या है?

किसी महिला का मासिक धर्म या पीरियड्स का बंद हो जाना मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति है। यह प्रक्रिया महिलाओं में 45 से 50 की उम्र के आसपास होती है। एक साल तक मासिक धर्म नहीं आए तो इसे रजोनिवृत्ति मानते हैं। यह स्थिति तब आती है जब महिलाओं के हार्मोन में बदलाव होता है और ओवुलेशन बंद हो जाता है।

मेनोपॉज की स्थिति में महिलाएं गर्भवती नहीं हो सकती हैं। महिलाओं में फॉलिकल्स के कारण अंडाशय के अंडे रिलीज होते हैं। मेनोपॉज की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब हर महीने विकसित होने वाले फॉलिकल्स की मात्रा कम होने लगती है। 

मेनोपॉज के लक्षण

मेनोपॉज के दौरान सबसे पहला लक्षण है पूरे शरीर में गर्माहट महसूस होना यानी हॉट फ्लैश। इसके अलावा, योनि में सूखापन और दर्द का अनुभव, नींद न आना, मूत्रमार्ग में संक्रमण, लगातार पेशाब आना, वजन बढ़ना और मेटाबॉलिज्म कम होना, डिप्रेशन, बालों, त्वचा और अन्य टिश्यूज में बदलाव आदि लक्षण शामिल हैं।  मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस रोग भी हो सकता है। इसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। अचानक फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। 

मेनोपॉज के जोखिम

हालांकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन इस फेज में एंटर करने के बाद महिलाएं विभिन्न रोगों का शिकार हो जाती हैं। घुटनों में दर्द, स्वभाव में चिढ़चिढापैन, माइग्रेन, स्किन संबंधी ग्ताक्लीफें, आदि होने लगती हैं। दरअसल पीरियड्स के दौरान महिलाओं की बॉडी से कई तरह के बुरे हार्मोन्स रिलीज हो जाते हैं, लेकिन मीनोपॉज के बाद ये शरीर के अन्दर ही इकट्ठे होते रहते हैं और कई तरह के रोगों को जन्म देते हैं।

मेनोपॉज से होने परेशानियों को कम करने के लिए क्या करें

रोजाना की डायट में कुछ बदलाव लाए जाएं तो मेनोपॉज से होने वाली परेशानियों को काफी कम किया जा सकता है। इसके लिए अधिक से अधिक कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें, रोज की डायट में आयरन और फाइबर की मात्रा बढ़ा दें, सुबह-शाम दो बार हरी सब्जियां और फल खाएं, बॉडी को हाइड्रेट रखने की कोशिश करें, अधिक से अधिक पानी पिएं और बॉडी वेट को मेनटेन रखने की कोशिश करें।

डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही और चीज़ भी पर्याप्त मात्रा में लें, ताकि शरीर को कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्निशियम, विटामिन डी और विटामिन के मिल पाए। डिब्बाबंद खाना, चिप्स आदि ना खाएं और खाने में नमक भी कम से कम ही लें। किसी भी तरह के धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें। चाय-कॉफी का सेवन भी कम से कम करें।

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