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प्रेगनेंसी में किसी भी कीमत पर इस काम से बचें महिलाएं, बच्चा हो सकता है 'मंदबुद्धि'

By उस्मान | Updated: February 23, 2019 11:08 IST

एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान लिपस्टिक और मॉइश्चराइजर जैसे सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करना महिलाओं और उनके आने वाले बच्चे के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। 

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होने वाले बच्चे का बेहतर स्वास्थ्य और विकास काफी हद तक गर्भवती मां पर निर्भर करता है। प्रेगनेंसी के दौरान सिर्फ खराब खानपान ही नहीं खराब लाइफस्टाइल का भी होने बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान लिपस्टिक और मॉइश्चराइजर जैसे सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करना महिलाओं और उनके आने वाले बच्चे के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। 

दरअसल, एक अध्ययन में चेताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान मॉइश्चराइजर और लिपस्टिक जैसे सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं के बच्चों को किशोरावस्था में 'मोटर स्किल' विकार (Motor Skills Disorder) का सामना करना पड़ सकता है। खासकर लड़कियों पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

'मोटर स्किल' क्या है?  मोटर स्किल डिसऑर्डर को मोटर डिस्प्रेक्सिया (motor dyspraxia) के नाम से भी जाना जाता है. 'मोटर स्किल' विकार के पीड़ितों को नृत्य करने, जिमनास्टिक जैसी गतिविधियों और कुछ मामलों में चलने-फिरने में दिक्कतें आती हैं। इतना ही नहीं बच्चा कोई भारी काम भी नहीं कर पाता है. 

क्या कहती है रिसर्च'एन्वायरॉमेंटल रिसर्च' नाम की पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में थैलेट (प्लास्टिक रसायन की प्रचुर मात्रा वाले उत्पाद) और गर्भावस्था के आखिरी दिनों के दौरान महिलाओं और उनके बच्चों की तीन, पांच एवं सात वर्ष की आयु के वक्त उनके मूत्र के नमूनों में इसके मेटाबोलाइट (चयापचयी तत्व) के स्तरों को मापा गया।

मोटर समस्याओं की स्क्रीनिंग टेस्ट 'ब्रूइनइंक्स-ओसेरेट्स्की टेस्ट ऑफ मोटर प्रोफिशियेंसी' (बीओअी-2) 11 वर्ष की उम्र में कराई गई ताकि चलने-फिरने और जटिल गतिविधियां करने की क्षमता जांची जा सके।

अध्ययन के निष्कर्षों से पता चला कि गर्भावस्था के दौरान मां के थैलेट के संपर्क में आने से बच्चों को किशोरावस्था में चलने-फिरने और जटिल गतिविधियां करने में दिक्कतें पेश आती हैं। ऐसा खासकर लड़कियों में होता है।

इस बात के भी साक्ष्य मिले कि बचपन में थैलेट के संपर्क में आने से खासकर लड़कों पर ज्यादा नकारात्मक प्रभाव होता है।

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पाम फैक्टर-लिटवेक ने बताया, 'हमारे अध्ययन में लगभग एक-तिहाई बच्चों का मोटर स्किल औसत से नीचे था। छोटी-मोटी मोटर समस्याओं की चपेट में आए बच्चों को बचपन में रोजमर्रा की गतिविधियों, खासकर खेलने में दिक्कतें आती हैं।'

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