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Crohn's disease : आंतें गलाने वाली इस बीमारी के होने से पहले शरीर देता है 12 चेतावनी, ऐसे बचें

By उस्मान | Updated: February 26, 2020 15:45 IST

signs and symptoms Crohn's disease : यह रोग दर्दनाक और कमजोर कर देने वाला है और कभी-कभी मौत का कारण भी बन जाता है

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क्रोन (क्रोहन) रोग (crohn's disease) आंतों की एक खतरनाक बीमारी है जिसमें आंतों में सूजन आ जाती है जिसकी वजह से पीड़ित को पेट दर्द, दस्त, थकान, कमजोरी, खून की कमी और मल से खून आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस बीमारी के होने पर आपको खाने से पौष्टिक तत्व और ऊर्जा पूरी तरह नहीं मिल पाते हैं।  

इस रोग के लक्षण स्थिर रह सकते हैं या हफ्ते या महीने में बार-बार आ और जा सकते हैं। यह रोग दर्दनाक और कमजोर कर देने वाला है और कभी-कभी मौत का कारण भी बन जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस रोग का मुख्य कारण शरीर का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होना है लेकिन सही कारण अभी ज्ञात नहीं है।

यह माना जाता है कि कमजोर इम्यून के चलते कोई वायरस या बैक्टीरिया आंतों में पहुंचकर इसे प्रभावित कर सकता है जिससे आंतों में सूजन आ सकती है। यह समस्या जेनेटिक भी मानी जाती है। 

क्रोन (क्रोहन) रोग के लक्षण

इस समस्या के शुरू होने पर आपको कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं जिसमें मुख्यतः पेट में दर्द, पेट में ऐंठन, गंभीर दस्त, बदबूदार मल, भूख में कमी, कमजोरी महसूस होना, बुखार, शरीर में खून की कमी, स्किन रैश, आर्थराइटिस, मल में खून आना और आंखें में सूजन आदि शामिल हैं। 

क्रोन (क्रोहन) रोग के कारण

इस रोग का सही कारण अज्ञात है। ऐसा माना जाता है कि इम्युनिटी सितम कमजोर होना इसका बड़ा कारण है। इसके अलावा इसे एक जेनेटिक रोग भी माना जाता है। कुछ अज्ञात कारण जैसे वायरस, बैक्टीरिया, डाइट, स्मोकिंग, स्ट्रेस या वातावरण में कोई विषाक्त पदार्थ भी इस रोग का कारण बन सकते हैं।

क्रोन (क्रोहन) रोग का इलाज

यह एक जटिल रोग है और इसका इलाज रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है। अगर आपको लंबे समय से ऊपर बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो आपको तुरंत किसी बेहतर गैसट्रोएंट्रोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। 

इस रोग को सही होने में समय लग सकता है। इलाज के बीच लक्षण बेहतर महसूस होने पर भी बिना डॉक्टर की सलाह पर दवाईयां लेनी बंद नहीं करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि इलाज बीच में बंद करने से यह समस्या दोबारा शुरू हो सकती है।

क्रोन (क्रोहन) रोग में क्या खाना चाहिए

इसमें आपको अधिक कैलोरी वाली चीजें, ऐसी चीजें जिनमें लैक्टोज न हो, कम फैट वाली चीजें, कम फाइबर और कम नमक वाली चीजों का ही सेवन करना चाहिए। इनके अलावा खूब मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन करना चाहिए। आपको कार्बोनेटेड और बर्फ वाले पेय पदार्थों से बचना चाहिए। पॉपकॉर्न, सब्जियों के छिलके, ड्राई फ्रूट्स आदि से भी दूर रहे। यह चीजें लक्षणों को बढ़ा सकती हैं। 

इन बातों का रखें ध्यान

जब भी आपको भूख लगे खा लें। भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों तोड़कर और खूब चबाकर खाएं। अपने घर पर ऐसे खाद्य पदार्थों को रखें जिनको आप खा सकते हैं और वे किसी प्रकार के लक्षण पैदा ना करें। एक बार में अधिक खाने की बजाए दिन भर में थोड़ा-थोड़ा करके खाएं, यह टिप्स काफी लोगों में लक्षणों को कम करने में मदद करती है।

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