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Coronavirus: आईसीएमआर का दावा, चिकित्सा कर्मियों को कोरोना पॉजिटिव होने से बचा सकती हैं ये 2 चीजें

By भाषा | Updated: June 1, 2020 09:04 IST

आईसीएमआर के अनुसार अप्रैल के अंतिम तक संक्रमितों के कुल मामलों में 5 फीसदी केवल मेडिकल स्टाफ थे

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ठळक मुद्देचिकित्साकर्मियों को मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की सही खुराक लेना जरूरीचार से पांच संतुलित खुराक देने लेने से कोरोना के मामले में कमी देखी गयी

देश में कोरोना वायरस का संकट गहराता जा रहा है। संक्रमण के मामलों अचानक बढ़ोतरी होने से भारत दुनिया के प्रभावित देशों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गया है। हैरानी की बात यह है कि इन मामलों में मेडिकल स्टाफ भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। 

इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन में नतीजे सामने आए हैं कि मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की सही खुराक लेने के साथ ही उपयुक्त तरीके से पीपीई (व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) किट का इस्तेमाल करने से स्वास्थ्यकर्मियों में कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने का खतरा कम हो सकता है।

आईसीएमआर के इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में ऑनलाइन प्रकाशित मामलों को नियंत्रण करने वाले अध्ययन में पाए गए नतीजों के मुताबिक, अध्ययन में शामिल लोगों को चार से पांच संतुलित खुराक देने पर उनमें सार्स-सीओवी-2 संक्रमण के खतरे में महत्वपूर्ण कमी देखी गई।

अनुसंधानकर्ताओं ने अध्ययन में कहा कि इसके साथ ही पीपीई किट का उपयुक्त इस्तेमाल भी लाभकारी साबित हुआ। अध्ययन में कहा गया कि स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमित होने का सबसे अधिक जोखिम होता है।  

एम्स में 200 से ज्यादा मेडिकल स्टाफ पॉजिटिव

दो दिन पहले ही एम्स के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर डी. के. शर्मा ने कहा कि पिछले दो महीने में एम्स के 200 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। एम्स में कोविड के फैलते संक्रमण का असर ओपीडी शुरू करने की योजना पर हो सकता है। अगर, इसी तरह स्टाफ संक्रमित होता रहा तो शायद ओपीडी शुरू करने की योजना टालनी पड़ सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अप्रैल के आखिरी तक देश के कोरोना के कुल मामलों में 5 फीसदी केवल मेडिकल स्टाफ शामिल हैं। जाहिर हैं पिछले एक महीने में यह आंकड़ा बहुत ज्यादा बढ़ गया होगा। 

भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या दो लाख के करीब

देश में रविवार को पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक 8,380 नए मामले सामने आए, जिसके बाद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 1,82,143 हो गए हैं जबकि मृतक संख्या बढ़कर 5,164 हो गई है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत कोरोना वायरस संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित देशों की सूची में सातवें स्थान पर आ गया है।

भारत लगभग एक हफ्ते में कोरोना वायरस संक्रमण मामले में वैश्विक स्तर पर 10वें स्थान से सातवें स्थान पर पहुँच गया। इस दौरान देश में कोविड-19 मरीजों की संख्या में लगभग 50,000 की वृद्धि देखी गई है। कोरोना वायरस मामले में 25 मई को 1.38 लाख मरीजों की संख्या के साथ भारत 10वाँ सबसे पायदान पर था तो रविवार को यह लगभग 1.82 लाख तक पहुंच गया।

भारत सातवां सर्वाधिक प्रभावित देश हालांकि, भारत अभी भी अमेरिका से पीछे है। डब्ल्यूएचओ ट्रैकर के अनुसार, अमेरिका, ब्राजील, रूस, ब्रिटेन, स्पेन और इटली के बाद भारत कोविड-19 से सातवां सबसे अधिक प्रभावित देश है। अमेरिका संक्रमण के 17,16,078 मामलों के साथ सबसे अधिक प्रभावित देश है, जबकि 1,82,143 मामलों के साथ भारत सातवें स्थान पर है। जर्मनी में कोरोना वायरस संक्रमण के1,81,482 , तुर्की में 1,63,103 और ईरान में1,48,950 मामले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में 89,995 लोग अब भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, 86,983 लोग स्वस्थ हो गए हैं और एक मरीज विदेश चला गया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “अब तक करीब 47.75 प्रतिशत मरीज स्वस्थ हुए हैं।” मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 4,614 मरीज स्वस्थ हुए। उसने कहा कि सरकार कोरोना वायरस की रोकथाम और उसके प्रबंधन के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर कई कदम उठा रही है ओर इसके लिए एक श्रेणीबद्ध और अति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

मंत्रालय ने कहा कि इन कदमों की उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा एवं निगरानी की जा रही है। संक्रमण के कुल मामलों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। शनिवार सुबह से अब तक 193 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है जिनमें से महाराष्ट्र में 99 , गुजरात में 27, दिल्ली में 18 , मध्य प्रदेश और राजस्थान में नौ-नौ, पश्चिम बंगाल में सात , तमिलनाडु और तेलंगाना में छह-छह, बिहार में पांच, उत्तर प्रदेश में तीन, पंजाब में दो और हरियाणा एवं केरल में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। इस वैश्विक महामारी से देश में कुल 5,164 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से सबसे अधिक 2,197 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई।

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