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क्या उंगलियां चटकाना सेहत के लिए खतरनाक होता है? जानें

By गुलनीत कौर | Updated: June 15, 2019 17:31 IST

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो उंगलियां अधिक चटकाने से उंगलियों के बीच का पानी यानी लिगामेंट साइनोवायल फ्लूइड कम होने लगता है। यह अपनी जगह से हिलने लगता है।

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हमारे आसपास कई लोगों को अपने हाथों की उंगलियां चटकाने की आदत होती है। हम खुद भी इस आदत से मजबूर होकर कई बार सारे काम छोड़कर पहले उंगलियां चटकाते हैं और फिर आगे कोई काम करते हैं? उंगलियां चटकाते हुए हड्डियों में से आवाज भी आती है, कई बार दर्द होता है और कई बार लोगों को ऐसा करने से रिलैक्स भी फील होता है। लेकिन क्या उंगलियां चटकाना एक गलत आदत है? क्या ये सेहत के लिए हानिकारक है? क्या इस आदत को छोड़ना चाहिए?

उंगलियां चटकाने में आवाज क्यूं आती है?

सबसे पहले तो यह जानते हैं कि उंगलियां चटकाते हुए आवाज क्यूं आती है। दरअसल हमारी उंगलियों के बीच जहां जोड़ होता है वहां एक प्रकार का पानी भरा हुआ होता है। इस पानी को लिगामेंट साइनोवायल फ्लूइड कहा जाता है। जब हम उंगलियां चटकाते हैं तो इस पानी की मूवमेंट से आवाज आती है। 

कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कई बार जब उंगलियों के जॉइंट्स में हवा भर जाती है, तब बहे उंगलियां चटकाने पर ये हवा अचानक रिलीज होती है। जिस वजह से चटक आवाज आती है। कई बार आवाज काफी तेज आती है तो कई बार धीमी होती है। आवाज आना या ना आना पूरी तरह से मेडिकल कारण है। 

क्या उंगलियां चटकाने से गठिया हो जाता है?

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो उंगलियां अधिक चटकाने से उंगलियों के बीच का पानी यानी लिगामेंट साइनोवायल फ्लूइड कम होने लगता है। यह अपनी जगह से हिलने लगता है। इस आदत को अगर काफी बढ़ा दिया जाए तो धीरे धीरे ये पानी ख़त्म हो जाता है और इसकी जगह उंगलियों के बीच कार्बन जमा होने लगती है। इस कार्बन की वजह से उंगलियों की हड्डियां आपस में टकराती हैं और गठिया रोग का कारण बनती हैं। 

उंगलियां चटकाने से सूजन हो जाती है

उंगलियां चटकाने से जॉइंट्स में सूजन भी आ जाती है। अगर समय रहते इस सूजन की पहचान ना हो और आदत भी छोड़ी ना जाए तो ये परेशानी गंभीर रूप ले सकती है। हरा समय सूजन और दर्द का शिकार हो सकते हैं। कई बार तो इस तरह के दर्द ताउम्र भी पीछा नहीं छोड़ते हैं। डॉक्टरों की मानें तो यह दर्द उंगलियों के सॉफ्ट टिश्यूज में सूजन के कारण होता है और बिना इलाज के नहीं जाता।

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