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कान के कैंसर का इलाज : कान में कैंसर होने से पहले मिलती हैं 7 चेतावनी, ऐसे करें बचाव

By उस्मान | Updated: December 5, 2020 12:41 IST

जानिये किन लोगों को होता है कान के कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा

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ठळक मुद्देकान के दर्द या बार होने वाले इन्फेक्शन को हल्के में न लें सही कारण ज्ञात नहीं, कुछ आदतें बढ़ा सकती हैं जोखिमकुछ बातों को ध्यान में रखकर बचा जा सकता है

कान का कैंसर कान के अंदरूनी और बाहरी दोनों हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। यह अक्सर बाहरी कान पर एक त्वचा कैंसर के रूप में शुरू होता है जो फिर इयर कैनल ईअरड्रम सहित विभिन्न कान संरचनाओं में फैलता है।

कान का कैंसर कान के भीतर से भी शुरू हो सकता है। यह टेम्पोरल हड्डी कहे जाने वाले कान के अंदर की हड्डी को प्रभावित कर सकता है। टेम्पोरल हड्डी में मास्टॉयड हड्डी भी शामिल है। यह वह बोनी गांठ है जिसे आप अपने कान के पीछे महसूस करते हैं।

कान में कई बार हवा घुसने से भी दिक्‍कत होती है लेक‍िन ये द‍िक्‍कत को समझने की जरूरत होती है। अगर आपको लगता है क‍ि लगातार कान से कम सुनाई देने या पानी बहने की द‍िक्‍कत बढ़ रही है, तो आप उसे सामान्‍य तरीके से न लें। 

कैंसर होने से पहले कुछ संकेत जरूर देता है, जिसे कई बार अनदेखा कर दिया जाता है या सामान्य बीमारी समझा जाता है। चलिए जानते हैं कान के कैंसर के कुछ शुरूआती लक्षण जानते हैं।

कान के कैंसर के लक्षण

कान के कैंसर के मुख लक्षणों में कान से पानी जैसा लिक्विड निकलना। कई बार ये अचानक से शुरू होता है। यही नहीं कई बार खून भी निकलने लगता है। ईअरड्रम डैमेज हो तो डॉक्टर को जरूर दिखा लें क्योंकि ये दिक्कत कई बार कैंसर का कारण भी हो सकती है।

अगर कान में दर्द या इंफैक्शन बार-बार हो रहा तो उसे ठीक से जांच कराएं। क्योंकि ये भी कैंसर का लक्षण होता है। कान में हवा या पानी जाने पर जैसे बंद होने जैसा अहसास होता है वैसा कभी भी और लगातार महसूस होना खतरे का संकेत हो सकता है।

वैसे तो कान में खुजली होना सामान्य बात है लेककिन अगर खुजली लगातार कई दिन तक हो या रुकने का नाम न ले तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं। अगर मुंह खोलते समय कानों में तेज दर्द हने लगे तो भी कान के कैंसर का खतरा हो सकता है। इसलिए इस संकेत को अनदेखा बिल्कुल न करें।

कान के कैंसर के कारण

शोधकर्ता कान के कैंसर के मुख्य कारणों की अभी तक पहचान नहीं कर पाए हैं। हालांकि वो धूप में ज्यादा रहना, कान में बार-बार किसी भी तरह का संक्रमण होना और उम्र का बढ़ना इसका जोखिम कारक मानते हैं। 

कान के कैंसर का उपचार

कान के कैंसर का उपचार आमतौर पर कैंसर के विकास के आकार और यह स्थित पर निर्भर करता है। कान के बाहर की तरफ त्वचा के कैंसर आम तौर पर काटे जाते हैं। यदि बड़े क्षेत्रों को हटा दिया जाता है, तो आपको सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

इयर कैनल या टेम्पोरल हड्डी के कैंसर में रेडिएशन सर्जरी की आवश्यकता होती है। कान का कितना हिस्सा हटाया जाता है यह ट्यूमर की सीमा पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में इयर कैनल हड्डी को निकालना पड़ता है।

कान के कैंसर से बचने के उपाय

थोड़ी सी लापरवाही कान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यदि कान में मैल जम जाए और ठीक से सफाई नहीं की जाए तो मैल की परत धीरे-धीरे पत्थर जैसा रूप धारण कर लेती है। इससे कान का रास्ता बंद हो जाता है तथा रोगी को दर्द के साथ ऊंचा भी सुनाई देने लगता है। 

आपको रोजाना नहाते समय कानों की सही तरह सफाई करनी चाहिए। इसके अलावा कान को किसी नुकीली चीज से खुजलाने से या कान छेदने से कान में संक्रमण हो सकता है।

कुछ वस्तुएं जैसे क्रीम, इत्र कान में उपयोग में आने वाली दवाइयों की एलर्जी से भी संक्रमण होता है। कान लाल हो जाता है, खुजली आती है एवं दर्द हो सकता है। लोगों को इन चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।

टॅग्स :कैंसरहेल्थ टिप्समेडिकल ट्रीटमेंट
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