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क्या कपूर, लौंग और अजवाइन को एक पोटली में बांधकर उसे सूंघने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है ?

By उस्मान | Updated: October 9, 2021 07:28 IST

कोरोना संकट में दावा किया जा रहा है कि ऐसा करने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने में मदद मिल सकती है

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ठळक मुद्देदावा है कि ऐसा करने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ सकता हैक्या यह सच है या कोई मिथक, डॉक्टर ने दिया जवाबकोरोना संकट में इन चीजों से कितना फायदे, जानें एक्सपर्ट्स की राय

कपूर, लौंग, अजवाइन और नीलगिरी के तेल को कपड़े में डालकर सूंघने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने में मदद मिल सकती है और इससे सांस की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है। कोरोना संकट में ऑक्सीजन की कमी के बीच इस तरह का दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है। 

क्या है दावालिखा है कि कपूर, लौंग, अजवाइन और कुछ बूंदे नीलगिरी के तेल की मिलाकर एक पोटली बनाएं और इसे पूरे दिन सूंघते रहें। यह ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने में मदद करता है। यह पोटली लद्दाख में पर्यटकों को दी जाती है जब ऑक्सीजन का स्तर कम होता है। यह एक घरेलू उपचार है।

क्या है सचइंडिया डॉट कॉम ने क्विंट की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है- इस दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। वास्तव में चेस्ट स्पेशलिस्ट भी इस दावे को मिथक मानते हैं। 

अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि कपूर, लौंग या अजवाइन रक्त ऑक्सीजन को बढ़ा सकते हैं या श्वसन संकट के दौरान राहत प्रदान कर सकते हैं। हालांकि इससे हल्के श्वसन संक्रमण के दौरान थोड़ी बहुत राहत जरूर मिल सकती है। 

दर्द और खुजली को कम करने के लिए त्वचा पर रगड़ने के लिए कपूर का उपयोग किया जाता है और कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि इनका नाक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

एक अध्ययन से यह भी पता चलता है कि नाक के अवरोध को दूर करने से ऑक्सीजन में सुधार नहीं होता है। इसी तरह, कोई अध्ययन नहीं है जो बताता है कि लौंग, अजवाइन और नीलगिरी का तेल ऑक्सीजन के स्तर और बेचैनी को कम करता है।

एक फिजीशियन डॉक्टर नरोत्तम कुमार ने आईएएनएस को बताया कि होम आइसोलेशन के दौरान रोगियों को एक इसी तरह का नुस्खा दिया जा रहा है जिसमें उन्हें दालचीनी पाउडर के पांच चम्मच गर्म पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है। 

उन्होंने कहा कि दालचीनी वास्तव में पेट में उत्पादित कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को बढ़ा सकती है, जो आपके रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके रक्त परिसंचरण को प्रतिबंधित करती है।  उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सलाह दी जा रही है कि महामारी के दौरान हर दो घंटे में मसालों का काढ़ा पीना चाहिए लेकिन यह हानिकारक है।

ईएनटी एक्सपर्ट डॉक्टर आर के खन्ना ने कहा कि कपूर की पोटली को सूंघने के पीछे कोई तर्क नहीं है। इससे बात यह पता चल सकता है कि उनके नाक की सूंघने की गंध की भावना बरकरार है या नहीं। ऐसा करने से अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर सूर्य कांत ने अब लोगों से अपील की है कि वे डॉक्टरों से सलाह किए बिना किसी नुस्खे को न आजमाएं।

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