लाइव न्यूज़ :

COVID prevention: एक्सपर्ट्स का दावा, कोरोना की दूसरी लहर से बचना है तो मास्क पहनने का यह तरीका आएगा काम

By उस्मान | Updated: April 19, 2021 15:35 IST

हेल्थ एक्सपर्ट्स से जानिये कोरोना से बचने के उपाय

Open in App
ठळक मुद्देहेल्थ एक्सपर्ट्स से जानिये कोरोना से बचने के उपाय मास्क कोरोना से बचाव का बेहतर उपायजानिये कैसा मास्क पहनना चाहिए

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महामारी से बचने के लिए दो डबल मास्किंग या दो मास्क पहनने की सलाह दी है। उनका मानना है कि इससे सुरक्षा स्तर को 95% तक बढ़ाया जा सकता है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में वायरस का प्रसार जिस तेजी से हो रहा है, उसके लिए अधिकतम सुरक्षा की आवश्यकता है। इसके लिए दो मास्क पहनने की जरूरत है - एक डिस्पोजेबल और उसके ऊपर कपड़े का मास्क। 

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना हेल्थ केयर अध्ययन का सुझाव है कि दो मास्क पहनने से SARS-CoV-2 के आकार के कणों को छानने की प्रभावशीलता दोगुनी हो जाएगी। 

गल्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट्स का मानना है कि पहली लहर में सिंगल मास्क को ठीक से पहनने पर संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता था लेकिन। लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। 

सीडीसी के लिए किये अध्ययन में शोधकर्ताओं पाया कि एक मास्क पहनने से कणों को 40 प्रतिशत अवरुद्ध किया जा सकता है जबकि दो मास्क पहनकर कणों को 80 प्रतिशत से अधिक कम किया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि अगर आप एक बेहतर एन 95 मास्क पहन रहे हैं, तो आपको दो मास्क पहनने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शॉपिंग मॉल, अस्पताल, खराब वेंटिलेशन वाले सार्वजनिक स्थान और बस, मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन जैसी जगहों पर डबल-मास्किंग की आवश्यकता है।

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी से ज्यादा कारगर है मास्क 

किसी कमरे में कोविड-19 के हवा से होने वाले प्रसार को रोकने के लिए शारीरिक दूरी से अधिक महत्वपूर्ण मास्क और बेहतर वेंटिलेशन व्यवस्था है। एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है।

फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स पत्रिका में प्रकाशित अनुसंधान में, अनुसंधानकर्ताओं ने विद्यार्थियों और एक शिक्षक के साथ एक कक्षा का कंप्यूटर मॉडल तैयार किया है। इसके बाद अनुसंधानकर्ताओं ने हवा के प्रवाह और बीमारी के प्रसार के संबंध में नमूना तैयार किया और हवा से संक्रमण फैलने के खतरे को मापा।

कक्षा का मॉडल 709 वर्ग फुट का था जिसमें नौ फुट ऊंची छत थी। यह किसी छोटे आकार वाली कक्षा के समान थी। प्रारूप में मास्क लगाए हुए विद्यार्थियों - जिसमें से कोई भी एक संक्रमित हो सकता है और कक्षा में आगे मास्क लगाए एक शिक्षक को रखा गया।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा में सहायक प्राध्यापक माइकल किनजेल ने कहा, “यह अनुसंधान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आंतरिक वातावरण में सुरक्षा को हम कैसे समझ रहे हैं इस पर मार्गदर्शन देता है।” किनजेल ने कहा, ‘‘अध्ययन में पाया गया कि हवा से होने वाले प्रसार को रोकने के लिए छह फुट की दूरी की जरूरत नहीं है जब आपने मास्क जरूर लगाया हो।” अ

नुसंधानकर्ताओं के मुताबिक अध्ययन दर्शाता है कि मास्क लगाने से, प्रसार की आशंका शारीरिक दूरी बढ़ने के साथ घटती नहीं है जो इस बात पर जोर देता है कि स्कूलों या अन्य स्थानों पर क्षमता बढाने के लिए मास्क को आवश्यक बनाने की कितनी जरूरत है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

टॅग्स :कोरोना वायरसकोविड-19 इंडियाहेल्थ टिप्समेडिकल ट्रीटमेंट
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

स्वास्थ्यरात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम

स्वास्थ्यरूमेटॉइड आर्थराइटिस विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शारदा को Guinness World Records से अंतरराष्ट्रीय सम्मान

स्वास्थ्यक्या हीटवेव के दौरान आपकी किडनी को खतरा है? पीक गर्मी आने से पहले जानने हैल्थ टिप्स की ज़रूरी बातें

स्वास्थ्यकौन हैं डॉ. आरती किनिकर?, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में खास उपलब्धि के लिए लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यस्तन एवं सर्वाइकल कैंसर की निःशुल्क जांच?, दिल्ली पुलिस मुख्यालय में 5वें CAPS शिविर का सफल आयोजन

स्वास्थ्यबांग्लादेश खसरा प्रकोपः 100 से अधिक बच्चों की मौत?, मार्च से अब तक 900 से अधिक केस, खसरा-रूबेला का आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाया?

स्वास्थ्यJammu-Kashmir: जम्‍मू कश्‍मीर में कैंसर का बढ़ता बोझ, 2018 से कश्मीर में 50,000 से ज्‍यादा मामले सामने आए

स्वास्थ्यविश्व स्वास्थ्य दिवसः वैज्ञानिक सोच से बदलेगी सेहत की तस्वीर

स्वास्थ्यपुष्पा… नाम सुनकर फ्लावर समझे क्या? फायर है मैं…”