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दुर्घटनाओं और आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र देश का सबसे असुरिक्षत राज्य, NCRB के आंकड़ों से खुलासा

By नितिन अग्रवाल | Updated: September 3, 2020 08:03 IST

महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसानों के आत्महत्या के भी मामले आए हैं. आकस्मिक मौत के सबसे अधिक 15,358 मामले भी महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं. सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोगों की मौत उत्तर प्रदेश में हई.

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ठळक मुद्देएनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसानों ने की आत्महत्याआकस्मिक मौत के भी सबसे अधिक 15,358 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए, मुंबई और दिल्ली में दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोग मरे

नई दिल्ली:  दुर्घटनाओं और आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र देश का सर्वाधिक असुरिक्षत राज्य साबित हुआ है. देशभर में होने वाली दुर्घटनाओं में से प्रत्येक छठी दुर्घटना और ख़ुदकुशी करने वाले प्रत्येक 100 में लगभग 14 प्रतिशत महाराष्ट्र के थे. इतना ही नहीं दुर्घटना में होने वाली मौत के मामले में भी महाराष्ट्र की स्थिति सबसे खराब राज्यों में रही.

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल के दौरान महाराष्ट्र में 18,916 लोगों ने खुद अपनी ही जिंदगी खत्म कर ली. इनमें से सबसे अधिक 33.5 प्रतिशत लोगों ने घरेलू और 18.5 प्रतिशत लोगों ने बीमारी के चलते अत्महत्या की। 

आत्महत्या करने वालों में 2,737 गृहणियां, 186 सरकारी कर्मचारी, 1807 निजी क्षेत्र के कर्मचारी और 1,487 छात्र थे.  इसके अतिरिक्त 1511 बेराजगारों ने भी अपनी ही जान ले ली. महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु में 13,493, प.बंगाल में 12,665, मध्यप्रदेश में 12,457 और कर्नाटक में सबसे अधिक 11,288 लोगों ने अत्महत्या कर ली.

महाराष्ट्र में सबसे अधिक किसान आत्महत्या

साल भर के दौरान आत्महत्या करने वालों में कुल 10,281 किसानों भी शामिल थे. जिनमें से सबसे अधिक 38.2 प्रतिशत यानि 3927 से अधिक महाराष्ट्र के थे.

इसके अलावा 19.4 प्रतिशत कर्नाटक, 10 प्रतिशत आंध्रप्रदेश, 5.3 प्रतिशत 5.3 प्रतिशत और 4.9 प्रतिशत छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के थे. हालांकि किसानों की आत्महत्या के कारणों का खुलासा इस रिपोर्ट में नहीं किया गया है.

एनसीआरबी 2019 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 70,329 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. यह देशभर में होने वाली कुल दुर्घटनाओं का 16.7 प्रतिशत है. यह स्थिति तब है जब देश की कुल आबादी की केवल 9.2 प्रतिशत आबादी ही महाराष्ट्र में निवास करती है.

महाराष्ट्र के बाद सबसे अधिक दुर्घटनाएं मध्यप्रदेश (42,431), उत्तप्रदेश (40,596), राजस्थान (28,697), कर्नाटक (25451), गुजरात (23910), तमिलनाडु (22404), छत्तीसगढ़ (19,789) और आंध्रप्रदेश (17,938) में हुईं.

हादसों में होने वाली मौत के मामले में सबसे खराब स्थित केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ की रही. वहां हादसों का शिकार होने वालों में से क्रमश: 72.8 और 68.6 प्रतिशत लोगों की मौत हुई.

इसके बाद महाराष्ट्र में 57.4, हरियाणा में 54.3 और गोवा तथा मध्यप्रदेश में दुर्घटनाओं का शिकार होने वालों में से 51 प्रतिशत से अधिक की मौत हो गई. हालांकि दुर्घटना में जान गंवाने वालों का राष्ट्रीय औसत 31.5 प्रतिशत रहा.

महाराष्ट्र में आकस्मिक कारणों से सबसे अधिक मौत  

सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक 27,661 लोगों की मौत उत्तर प्रदेश में हई, जबकि आकस्मिक मौत के सबसे अधिक 15,358 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए. जबकि मध्यप्रदेश में डूबने और जहर की वजह से सबसे अधिक क्रमश: 4,904 और 4041 लोगों की जान गई.

मुंबई, दिल्ली में दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मरे. साल 2019 में देश के 53 प्रमुख शहरों में कुल 61,404 लोगों की जान दुर्घटनाओं में गई. जिनमें सबसे अधिक 9,246 लोगों की मौत (15.1त्न) अकेले मुम्बई में हुई। इसके बाद राजधानी दिल्ली में 4,516, बेंगलुरु में 4016, पुणे में 3949, जयपुर में 2628 और गुजरात के सूरत में 2353 लोगों की मौत हुई. 

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