Case against four navy officers fake bill of Rs 6.76 crore CBI raids 28 places | नौसेना के चार अधिकारियों के खिलाफ मामला, 6.76 करोड़ रुपये के फर्जी बिल, सीबीआई ने 28 स्थानों पर मारे छापे
स्टार नेटवर्क, एसीएमई नेटवर्क्स, साइबरस्पेस इंफोविजन और मोक्ष इंफोसिस के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं।

Highlightsनेटवर्किंग संबंधी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान (डब्ल्यूएनसी) में 2016 में जनवरी से मार्च के बीच तैयार किए गए।जमा किए गए बिलों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए 2012 में एक वित्तीय सूचना प्रणाली (एफआईसी) लागू की थी। एफआईसी यूजर आईडी से फर्जी बिल तैयार किए गए, जिससे अपराध में उनकी सक्रिय मिलीभगत का पता चलता है।

नई दिल्लीः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिमी नौसेना कमान को तथाकथित आईटी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए 6.76 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाकर पैसा निकालने के आरोप में नौसेना के चार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और इसके बाद चार राज्यों में 28 स्थानों पर छापे मारे।

अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि दिल्ली, मुंबई, गुजरात और कर्नाटक में छापेमारी की कार्रवाई बुधवार आधी रात तक चली और इस दौरान 10 लाख रुपए की नकदी बरामद की गई। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी ने कैप्टन अतुल कुलकर्णी, कमांडर मंदर गोडबोले, कमांडर आर पी शर्मा और पेटी ऑफिसर एलओजी (एफ एंड ए) कुलदीप सिंह बघेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

उन्होंने बताया कि चारों अधिकारियों के खिलाफ यह मामला कथित तौर पर 6.76 करोड़ रुपये के सात फर्जी बिल बनाने को लेकर दर्ज किया गया है। सीबीआई की प्राथमिकी के मुताबिक, ‘‘सभी आरोपियो ने अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल कर नौसेना के प्राधिकारियों को धोखा दिया और सरकारी खजाने को लूटकर आर्थिक लाभ उठाया।’’

मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान (डब्ल्यूएनसी) में 2016 में जनवरी से मार्च के बीच तैयार किए गए

आरोप है कि ये बिल सूचना प्रौद्योगिकी एवं नेटवर्किंग संबंधी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान (डब्ल्यूएनसी) में 2016 में जनवरी से मार्च के बीच तैयार किए गए। सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘बिल में जिस सामान का जिक्र किया गया है, उनमें से किसी सामान की आपूर्ति डब्ल्यूएनसी के मुख्यालय में नहीं की गई।

बिलों की तैयारी संबंधी वित्तीय मंजूरी, खरीदारी के ऑर्डर, रसीद वाउचर इत्यादि जैसे कोई दस्तावेज मुख्यालय में नहीं हैं।’’ नौसेना ने बजट पर निगरानी के लिए और जमा किए गए बिलों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए 2012 में एक वित्तीय सूचना प्रणाली (एफआईसी) लागू की थी।

सभी बिल में एफआईसी संख्या होती है और एफआईसी यूजर आईडी किसी अधिकारी को आवंटित की गई निजी संख्या होती है और कोई और कर्मी उस तक नहीं पहुंच सकता। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि गोडबोले और शर्मा की एफआईसी यूजर आईडी से फर्जी बिल तैयार किए गए, जिससे अपराध में उनकी सक्रिय मिलीभगत का पता चलता है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि जिस इकाई में बिल तैयार किए गए थे, कुलकर्णी उसका पर्यवेक्षक अधिकारी था। एजेंसी ने रक्षा लेखा नियंत्रक के चार अधिकारियों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए हैं। इसके अलावा निजी कंपनियों स्टार नेटवर्क, एसीएमई नेटवर्क्स, साइबरस्पेस इंफोविजन और मोक्ष इंफोसिस के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं।

सीबीआई ने आईआईटीएम के दो पूर्व अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के दो पूर्व अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ खरीद की प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से संस्था के साथ धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि आईआईटीएम के एक पूर्व वैज्ञानिक एवं एक पूर्व वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी और मुंबई स्थित एक निजी कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं निदेशक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

दोनों पूर्व सरकारी कर्मियों ने 2011 से 2018 के बीच खरीद प्रक्रिया के दौरान अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित रूप से षड्यंत्र रचा और नियमों का उल्लंघन किया। सीबीआई की एक विज्ञप्ति में बताया गया है इन दोनों पूर्व अधिकारियों ने सफर-पुणे के लिए 12 ‘एलईडी डिस्प्ले बोर्ड’ समेत ‘डिजिटल डिस्प्ले’ प्रणाली की आपूर्ति और मरम्मत के लिए निर्धारित खरीद प्रक्रिया का उल्लंघन कर और बोली लगाने वाले अन्य लोगों को मामूली आधार पर अयोग्य करार देकर मुंबई की एक निजी कंपनी को ठेका दिया।

इसमें बताया गया है कि दोनों ने सफर परियोजना के लिए अधिक दाम पर घटिया और सस्ते डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड खरीदकर निजी आपूर्तिकर्ता को कथित रूप से अनुचित लाभ दिया, जिससे आईआईटीएम को काफी नुकसान हुआ। विज्ञप्ति में बताया गया है कि धारा 420 (धोखाधड़ी) समेत आईपीसी की प्रासंगिक धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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