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जानिए क्या है Write Off? 21 सरकारी बैंकों ने पिछले 4 साल में तीन लाख 16 हजार करोड़ का कर्ज किया राइट ऑफ

By स्वाति सिंह | Updated: October 1, 2018 19:17 IST

सरकारी बैंकों द्वारा कर्ज को Write Off करने को लेकर कुछ महीने पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में कहा था कि राइट ऑफ के अर्थ पर न जाएं। जेटली ने कहा था कि राइट ऑफ का मतलब कर्ज माफी नहीं है बल्कि इस पैसे को वसूला जाएगा। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है?  

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नई दिल्ली, 1 अक्टूबर: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2014 से लेकर अप्रैल 2018 के बीच देश के 21 सरकारी बैंकों ने 3,16,500 करोड़ रुपये का कर्ज राइट ऑफ कर दिया। वहीं, रिकवरी के नाम पर बैंकों के पास 44,900 करोड़ रुपये आए। कांग्रेस राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर भारी कर्ज लेकर न चुकाने वाले कारोबारियों को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया है। लेकिन कुछ महीने पहले ही जब विजय माल्या समेत कुछ कारोबारियों के कर्ज को बैंकों द्वारा Write Off की खबर आयी थी तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में सफायी देते हुए कहा था कि इसका मतलब कर्जमाफी नहीं बल्कि ये पैसा वसूला जाएगा। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़े बतात हैं कि सरकारी बैंकों ने जो कर्ज Write Off किया था उसका मामूली हिस्सा ही रिकवर (वापसी) हो सका।  

क्या है बैंकों का Write Off?

जब कोई भी कंपनी या व्यक्ति किसी भी बैंक से लोन लेता है और उसके बाद लोन का ब्याज नहीं चुका पाता है, ऐसी स्थिति में मैच्योरिटी पीरियड के पूरा होने के बाद बैंक तीन महीने तक इंतजार करता है। अगर तीन महीने तक कोई रिटर्न नहीं आता तब बैंक उसे नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित करता है। इसके बाद बैंक एनपीए को अपने बहीखाते से हटा देता है। आम कारोबारी इस राइट ऑफ को "बट्टा खाता" कहते हैं। साफ है कि बट्टा खाता उसी को कहते हैं जो पैसा डूबा हुआ मान लिया गया है। अगर ये पैसा मिल जाए तो भागते भूत की लंगोटी सही।

बैंक क्यों करता है Write Off का इस्तेमाल?

बताया जाता है कि अपनी साख (गुडविल) बचाने के लिए बैंक एनपीए को बट्टा खाता में डालता है। इसके जरिए वह अपने बैलेंस शीट में इसे कर्ज माफी का नाम देकर नुकसान छिपा लेता है। ताकि उसे नया बैलेंसशीट बनाने में कोई दिक्कत ना हो। हालांकि वह रिकवरी की प्रक्रिया भी जारी रखता है। इस रिकवरी अमाउंट को बैंक अपनी इनकम में जोड़ता है। यह पूरा प्रोसेस अपारदर्शी तरीके से होता है।

Write Off पर वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान 

ध्यान देने वाली बात ये है कि इस मामले को लेकर जब मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा था कि एसबीआई ने जानबूझकर लोन लेने वालों का कर्ज बट्टे खाते में डाला।  इसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उनके इस आरोप का जवाब राज्यसभा में दिया। उन्होंने साफ-साफ कहा कि केवल 'बट्टे खाते' के अर्थ पर न जाएं। बट्टे खाते में डाले जाने का मतलब कर्ज माफी नहीं है। इसे वसूला जाएगा।  

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए Write Off?

केंद्र सरकार मार्च 2019 में बैंकिंग क्षेत्र के सुधारों पर रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी। इधर, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आइबीए) ने बैंकों की स्वतंत्र रैंकिंग तैयार करने के लिए भी कदम उठाए हैं। इसके अलावा बीते चार सालों में बैंकों ने एनपीए के कारण हुए नुकसान के लिए 5.88 लाख करोड़ रुपये की प्रॉविजनिंग भी की है। अगस्त 2018 में कर्ज में 13. 5 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसके साथ ही फंसे कर्ज को वसूलने के लिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के रूप में प्रमुख कदम भी उठाया गया है।

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