SBI ने एक महीने में दूसरी बार उधार दर में बढ़ोतरी की, होम और पर्सलन लोन की EMI बढ़ेगी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Published: May 16, 2022 12:23 PM2022-05-16T12:23:14+5:302022-05-16T12:25:21+5:30

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस महीने की शुरुआत में रेपो दर को 0.40 प्रतिशत बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद एसबीआई ने यह बढ़ोतरी की। एसबीआई द्वारा उधार दर में संशोधन के बाद अनुमान है कि आने वाले दिनों में दूसरे बैंक भी ऐसा करेंगे।

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SBI ने एक महीने में दूसरी बार उधार दर में बढ़ोतरी की, होम और पर्सलन लोन की EMI बढ़ेगी

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Highlightsदेश के सबसे बड़े बैंक ने एक महीने में दूसरी बार एमसीएलआर में बढ़ोतरी की है।दोनों बार मिलाकर अब तक 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।अनुमान है कि आने वाले दिनों में दूसरे बैंक भी ऐसा करेंगे।

नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी सीमांत लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) में 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस कदम से होम लोन और पर्सनल लोन लेने वालों के लिए ईएमआई बढ़ेगी।

देश के सबसे बड़े बैंक ने एक महीने में दूसरी बार एमसीएलआर में बढ़ोतरी की है, और दोनों बार मिलाकर अब तक 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस महीने की शुरुआत में रेपो दर को 0.40 प्रतिशत बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद एसबीआई ने यह बढ़ोतरी की। 

एसबीआई द्वारा उधार दर में संशोधन के बाद अनुमान है कि आने वाले दिनों में दूसरे बैंक भी ऐसा करेंगे। इस वृद्धि के साथ उन ग्राहकों की ईएमआई बढ़ जाएगी, जिन्होंने एमसीएलआर पर कर्ज लिया है। हालांकि, अन्य मानकों से जुड़े कर्ज की ईएमआई नहीं बढ़ेगी। 

एसबीआई की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार संशोधित एमसीएलआर दर 15 मई से प्रभावी है। इस संशोधन के बाद एक साल की एमसीएलआर 7.10 फीसदी से बढ़कर 7.20 फीसदी हो गई है। ज्यादातर कर्ज एक साल की एमसीएलआर दर से जुड़े होते हैं। 
एक रात, एक महीने और तीन महीने की एमसीएलआर 0.10 प्रतिशत बढ़कर 6.85 फीसदी हो गई, जबकि छह महीने की एमसीएलआर बढ़कर 7.15 फीसदी हो गई।

क्या होता है एमसीएलआर?

सीमांत लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) किसी भी लोन की न्यूनतम ब्याज दर तय करने को परिभाषित करता है और किसी वित्तीय संस्थान का अंदरुनी बेंचमार्क होता है।

एमसीएलआर को आरबीआई ने भारतीय वित्तीय प्रणाली में 2016 में शामिल किया था. इससे पहले 2010 में लागू किए गए बेस रेट सिस्टम के तहत ब्याज तय किया जाता था. इसे एमसीएलआर के लागू होने के साथ बंद कर दिया गया।

(भाषा से इनपुट के साथ)

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