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उदार मौद्रिक नीति रुख से चालू वित्त वर्ष में हटने की संभावना नहीं: पूर्व आरबीआई डिप्टी गवर्नर

By भाषा | Updated: September 24, 2021 19:10 IST

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मुंबई, 24 सितंबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी ने शुक्रवार को कहा कि आरबीआई के अत्यंत उदार मौद्रिक नीति रुख में बदलाव की संभावना कम-से-कम 2021-22 में नहीं है क्योंकि अथर्व्यवस्था अभी भी महामारी-पूर्व के स्तर से नीचे है।

गांधी ने केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा के हाल के बयान का भी उल्लेख किया। पात्रा ने अपने बयान में साफ किया था कि केंद्रीय बैंक कोई भी कठोर कदाम उठाने के बजाय स्पष्ट रूप से संप्रेषित धीरे-धीरे बदलाव के रास्ते को प्राथमिकता देगा।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर में सुधार और दूसरी तरफ उच्च मुद्रास्फीति को देखते हुए ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि आरबीआई महामारी संकट को देखते हुए कब उदार रुख को वापस ले सकता है। उदार रुख के कारण अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ी है। यह अलग बात है कि जीडीपी वृद्धि का प्रमुख कारण पिछले साल के तुलनात्मक आधार का कमजोर होना है।

उल्लेखनीय है कि कमजोर तुलनात्मक आधार और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में रिकार्ड 20.1 प्रतिशत रही। कोविड-महामारी की दूसरी लहर के बावजूद उच्च वृद्धि दर हासिल की जा सकी है।

गांधी ने ‘ऑनलाइन’ कार्यक्रम में कहा, ‘‘मेरे आकलन के हिसाब से उदार मौद्रिक नीति को वापस लेना अभी कई तिमाही दूर की बात है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस बात को लेकर दृढ़ है कि बाजार के लिये उदार रुख के बदलाव या मौद्रिक नीति कड़ा किये जाने को लेकर पर्याप्त संकेत उपलब्ध होंगे। जब भी यह होगा, पूर्व-चेतावनी उपलब्ध होगी।’’

गांधी ने कहा कि अर्थव्यवस्था अभी भी महामारी-पूर्व स्तर पर नहीं पहुंची है और नीतिगत रुख कड़ा करने को लेकर यह पहला जरूरी लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि में तेजी का अच्छा संकेत बैंक कर्ज में वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष में अब तक यह नकारात्मक दायरे में रहा है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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