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आईओबी को दूसरी छमाही में 18,000 करोड़ रुपये के एनपीए के समाधान की उम्मीद

By भाषा | Updated: November 22, 2020 15:30 IST

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नयी दिल्ली, 22 नवंबर सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के तहत चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 18,000 करोड़ रुपये की गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के समाधान की उम्मीद है। इस कदम से बैंक के मुनाफे में सुधार होगा।

इसके अलावा चेन्नई का बैंक अगले वित्त वर्ष के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) व्यवस्था से बाहर आने की उम्मीद कर रहा है।

आईओबी के प्रबंध निदेशक पीपी सेनगुप्ता ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में लंबित 18,000 करोड़ रुपये के एनपीए के मामलों के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। एनसीएलटी में कुछ बड़े खातों के समाधान से हमारे बही-खाते में सुधार होगा।’’

एनपीए खातों के समाधान तथा ऋण की मांग बढ़ने से बैंक मार्च तक अपने सकल एनपीए को 10 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य कर रहा है। दूसरी तिमाही में बैंक का सकल एनपीए कुल ऋण का घटकर 13.04 प्रतिशत रह गया। सितंबर, 2019 के अंत तक यह 20 प्रतिशत था।

मूल्य के हिसाब से बैंक का सकल एनपीए घटकर 17,659.63 करोड़ रुपये पर आ गया है, जो एक साल पहले 28,673.95 करोड़ रुपये था। इसी तरह बैंक का शुद्ध एनपीए घटकर 4.30 प्रतिशत या 5,290.60 करोड़ रुपये रह गया है, जो एक साल पहले 9.84 प्रतिशत या 12,507.97 करोड़ रुपये था।

पीसीए पर सेनगुप्ता ने कहा, ‘‘हम इसको लेकर जल्दी में नहीं हैं। हम नहीं चाहते कि हम हड़बड़ी में पीसीए से बाहर आ जाएं और बाद में हमें इन्हीं मुद्दों का सामना करना पड़े। संभवत: मार्च तिमाही के नतीजों के बाद हम पीसीए ढांचे से बाहर निकलने के लिए रिजर्व बैंक से संपर्क करेंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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