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अमेजन से टाटा, रिलायंस से वेदांत तक, कोरोना वायरस की रोकथाम में आगे आया उद्योग जगत

By भाषा | Updated: May 9, 2021 20:52 IST

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नयी दिल्ली, नौ मई कोविड-19 महामारी के भीषण का सामना कर रहे भारत को वैश्विक और घरेलू उद्योग जगत से बढ़चढ़ कर मदद मिल रही है, जिसमें उपकरणों के हवाई जहाज से लाना, मेडिकल ऑक्सीजन तैयार करना और अस्पतालों की स्थापना शामिल है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अतिरिक्त मदद की जाए।

इनमें अमेजन और गूगल के साथ ही टाटा संस, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और अडाणी समूह जैसी देशी समूह ने कोविड अस्पतालों की स्थापना की है, विदेशों से क्रायोजेनिक टैंकर मंगाए हैं और ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की है। इसके अलावा आर्थिक सहायता भी की है।

भारत में पिछले दो सप्ताहों से प्रतिदिन संक्रमण के तीन लाख से अधिक मामले सामने आ रहे हैं और पिछले कुछ दिनों से ये आंकड़ा चार लाख के पार हो गया है। कोविड संक्रमण से भारत में 2.42 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

इस महामारी से मुकाबले के लिए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने पिछले महीने 1.8 करोड़ अमरीकी डालर दान देने की घोषणा की। अमेजन ने कहा कि वह भारत में 1,000 मेडट्रोनिक वेंटिलेटर वितरित करेगा।

माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि वह भारत को 1,000 वेंटिलेटर और 25,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराएगा।

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी तेल रिफाइनरियों से प्रतिदिन 1,000 टन से अधिक मेडिकल ऑक्सीजन देने की व्यवस्था की, जो भारत की कुल मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति का 11 प्रतिशत से अधिक है। समूह ने जामनगर और मुंबई में कोविड रोगियों के मुफ्त इलाज के लिए कुल 1,875 बिस्तर वाले अस्पताल भी तैयार किए।

भारत की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता कंपनी जेएसडब्ल्यू ने कुछ इस्पात उत्पादों का विनिर्माण बंद कर दिया, ताकि सैकड़ों टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा सके।

विप्रो और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने पुणे में एक आईटी संयंत्र को 430 बिस्तरों वाले कोविड अस्पताल में परिवर्तित किया, वहीं इंफोसिस ने नारायण हेल्थ के सहयोग से बंगालुरु में 100 कमरे का कोविड अस्पताल स्थापित किया है, जो गरीबों की मुफ्त देखभाल करता है।

टाटा समूह ने अपनी कंपनियों के माध्यम से कोविड रोगियों के लिए लगभग 5,000 बिस्तर उपलब्ध करवाए। इसके अलावा समूह ने 1,000 क्रायोजेनिक कंटेनरों का आयात किया।

एसबीआई, टेक महिंद्रा, सिप्ला, वेदांत, आईटीसी और अडानी समूह ने भी ऐसी ही पहल कीं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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