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अडाणी गैस ने अधिगृहीत किए जय मधोक एनर्जी के तीन भौगोलिक क्षेत्रों के गैस लाइसेंस

By भाषा | Updated: November 4, 2020 19:38 IST

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नयी दिल्ली, चार नवंबर अडाणी गैस लिमिटेड ने जय मधोक एनर्जी के पंजाब में लुधियाना और जालंधर एवं गुजरात में कच्छ (पूर्व) के शहरी गैस वितरण लाइसेंस का अधिग्रहण करने की बुधवार को जानकारी दी।

कंपनी ने इस अधिग्रहण का मूल्य नहीं बताया है। इससे अडाणी गैस देश की सबसे बड़ी शहरी गैस वितरण कंपनी बन जाएगी। इस सौदे से अडाणी की झोली में तीन और उच्च संभावना वाले भौगोलिक गैस वितरण क्षेत्र आ गए हैं।

जय मधोक एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को पेट्रोलियम क्षेत्र के नियामक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने बकाया चुकाने में देरी और नगरीय गैस लाइसेंस हासिल करने में कथित अनियमितताओं के चलते ‘कारण बताओ’ नोटिस दिया था।

सूत्रों ने बताया कि पीएनजीआरबी अब लाइसेंस की बिक्री की वैधानिकता की जांच करेगी। साथ ही देखेगी कि मूल लाइसेंस मिलने वाली कंपनी द्वारा की गयी चूक का क्या होगा।

कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘अडाणी गैस लिमिटेड ने लुधियाना, जालंधर और कच्छ (पूर्व) में नगरीय गैस लाइसेंस के अधिग्रहण के लिए एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।’’

बयान में कहा गया है कि इन तीनों भौगोलिक क्षेत्रों में अगले दस साल में 65 लाख घन मीटर प्रति दिन तक की मांग पैदा करने की क्षमता है। यह तीनों क्षेत्र भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की भारतमाला परियोजना के पहले चरण में शामिल हैं। इससे इन क्षेत्रों में विकास तेज होने और मांग बढेगी।

अडाणी गैस के पास अब कुल 22 शहरी गैस वितरण लाइसेंस हो गए हैं। कंपनी के पास सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के साथ संयुक्त उपक्रम में 19 और गैस वितरण लाइसेंस हैं। इन 22 भौगोलिक गैस वितरण क्षेत्र के दायरे मे देश के 74 जिले आते हैं।

इस बारे में अडाणी गैस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश पी. मंगलानी ने कहा, ’’इन तीन भौगोलिक गैस वितरण क्षेत्रों में पीएनजी और सीएनजी की अच्छी मांग है।’’

जय मधोक को 2013 में जालंधर में वाहनों के लिए सीएनजी और घरेलू उपयोग के लिए पीएनजी गैस वितरण का लाइसेंस मिला था, जबकि इसके दो वर्ष बाद उसे लुधियाना और कच्छ (पूर्व) के लाइसेंस हासिल हुए।

लेकिन पीएनजीआरबी के मुताबिक कंपनी ने अपनी प्रतिबद्धताओं पर बहुत कम प्रगति की और इसके चलते 2016 में उसके लाइसेंस रद्द कर दिए गए।

इसके बाद जय मधोक ने अपीलीय न्यायाधिकरण में इस फैसले को चुनौती दी। अप्रैल 2017 में न्यायाधिकरण ने पीएनजीआरबी के फैसले को किनारे कर दिया और नियामक को लाइसेंस रद्द करने की तय प्रक्रिया के पालन का आदेश दिया। उसके बाद से यह मामला पीएनजीआरबी के सामने लंबित पड़ा था।

मार्च 2019 में पीएनजीआरबी ने जय मधोक को लाइसेंस हासिल करने के लिए दिखायी गयी नेटवर्थ में कथित अनियमिताओं के लिए फिर से नोटिस जारी किया।

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