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शोभना जैन का ब्लॉगः कनाडा की राजनीति का इंडिया कनेक्ट

By शोभना जैन | Updated: October 26, 2019 14:50 IST

पंजाबी को अब कनाडा की संसद में अंग्रेजी और फ्रेंच के बाद तीसरी सबसे बड़ी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिल चुका है. अमेरिका, इंग्लैंड जैसे पश्चिमी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय मूल के जनप्रतिनिधि निर्वाचित हो रहे हैं, लेकिन कनाडा की तरह सरकार बनाने की निर्णायक स्थित में अभी वे नहीं पहुंचे हैं.

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कनाडा में नई सरकार के गठन को लेकर इंडिया कनेक्ट सुर्खियों में है. वर्तमान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में तो उभरी है लेकिन अपने बूते पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. 338 सदस्यों की संख्या वाले सदन में ट्रूडो  की पार्टी को बहुमत के आंकड़े के लिए 13 सीटों की जरूरत है. 

इस अंकगणित में भारतीय मूल के वामपंथी रुझान वाले कनाडा के सिख नेता और न्यू डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख जगमीत सिंह एक किंगमेकर की तरह उभरे हैं, हालांकि ट्रूडो जिस तरह से गठबंधन सरकार की संभावना से इंकार कर चुके हैं, उसके चलते उनकी पार्टी के सरकार में शामिल होने की संभावना तो नहीं है, लेकिन यह बात ध्यान देने की है कि कनाडा में भारतीयों की लगभग चार प्रतिशत आबादी में से 1.5 प्रतिशत सिख हैं. 

पंजाबी को अब कनाडा की संसद में अंग्रेजी और फ्रेंच के बाद तीसरी सबसे बड़ी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिल चुका है. अमेरिका, इंग्लैंड जैसे पश्चिमी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय मूल के जनप्रतिनिधि निर्वाचित हो रहे हैं, लेकिन कनाडा की तरह सरकार बनाने की निर्णायक स्थित में अभी वे नहीं पहुंचे हैं. वैसे मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम जैसे कैरेबियाई देशों की तरह फिलहाल आयरलैंड में भारतीय मूल के लियो वराडकर प्रधानमंत्नी हैं. 

यह पहली मर्तबा है जब आयरलैंड में भारतीय मूल का व्यक्ति प्रधानमंत्नी बना है. ऐसे में जबकि कनाडा में नई सरकार के गठन के लिए जद्दोजहद चल रही है, भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो एक सवाल यह भी है कि खालिस्तान समर्थक रुख के लिए जाने जाने वाले पेशे से वकील जगमीत सिंह, जो कि इस  मुद्दे को ले कर  मुखर रूप से भारत सरकार की नीतियों की आलोचना भी करते रहे हैं, जिसकी वजह से भारत में उनका काफी विरोध भी हुआ है, यह देखना अहम होगा कि ट्रूडो सरकार को समर्थन देने के बाद उनका भारत के प्रति क्या रुख रहता है. पिछले कुछ बरसों से कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी अलगाववदियों की वजह से भारत-कनाडा संबंधों में असहजता की धुंध सी भी छायी थी.  बहरहाल,  भारत - कनाडा  संबंध बहुआयामी हैं जो व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा जैसे कितने ही क्षेत्नों में व्यापक सहयोग से जुड़े हैं. लेकिन अगर कनाडा की राजनीति का इंडिया कनेक्ट खास तौर पर सिखों के प्रभाव को देखें तो दिलचस्प बात यह है कि भारत की लोकसभा में जहां 13 सिख सांसद हैं, वहीं कनाडा की संसद में इस बार पिछली बार की ही तरह 18 सिख सांसद  निर्वाचित हुए हैं, जब कि भारत और कनाडा दोनों में ही सिख आबादी का प्रतिशत लगभग दो ही है. वैसे इस बात पर नजर रहेगी कि अगर ऐसी सरकार बनती है तो भारत से जुड़े इस पहलू के साथ ही आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर दो धुरों पर खड़ी वामपंथी रुझान वाली जगमीत सिंह की पार्टी और लिबरल जैसे दो धुरों के बीच तालमेल कैसा बनता है.

टॅग्स :कनाडाजस्टिन ट्रूडो
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