पड़ोसी देशों में राजनीतिक उथल-पुथल थमने की बंधती उम्मीद

By शशिधर खान | Updated: January 2, 2026 06:02 IST2026-01-02T06:02:16+5:302026-01-02T06:02:16+5:30

भारत की पूर्वोत्तर सीमा से सटा म्यांमार एकमात्र ऐसा पड़ोसी है, जहां आजादी के 75 वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद सेना सत्ता पर काबिज है.

bangladesh pakistan nepal Hopes of political turmoil neighboring countries subsiding blog Shashidhar Khan | पड़ोसी देशों में राजनीतिक उथल-पुथल थमने की बंधती उम्मीद

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Highlightsचुनाव होते रहे हैं, मगर वहां की सैनिक जुंटा ने जनप्रतिनिधियों के हाथ में शासन नहीं जाने दिया. दूसरे दौर का मतदान 11 जनवरी को और तीसरा दौर 25 जनवरी को होगा.शेख हसीना को देश छोड़कर जाने को अगस्त, 2024 में मजबूर किया गया.

2025 पूरे वर्ष पड़ोसी देशों में राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता का दौर रहा, जिसका भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्ते पर भी असर कमोबेश पड़ा. लेकिन 2026 शायद अनुकूल साबित हो, ऐसी संभावना लग रही है, क्योंकि नए वर्ष की शुरुआत सैनिक तानाशाही वाले म्यांमार में चुनाव से हुई है, जहां की जनता ने आज तक सही मायने में लोकतंत्र देखा ही नहीं. बांग्लादेश और नेपाल में भी बिगड़े हालात में चुनाव हो रहे हैं. भारत की पूर्वोत्तर सीमा से सटा म्यांमार एकमात्र ऐसा पड़ोसी है, जहां आजादी के 75 वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद सेना सत्ता पर काबिज है.

चुनाव होते रहे हैं, मगर वहां की सैनिक जुंटा ने जनप्रतिनिधियों के हाथ में शासन नहीं जाने दिया. ऐसे देश म्यांमार से दिसंबर के अंतिम सप्ताह में चुनाव की खबर आई. झांसा देनेवाला और दिखावे के लिए ही सही, 28 दिसंबर 2025 को पहले दौर का मतदान हुआ. दूसरे दौर का मतदान 11 जनवरी को और तीसरा दौर 25 जनवरी को होगा.

चुनाव का ऐलान सैनिक जुंटा सरकार ने मतदान से एक हफ्ता पहले किया, लेकिन वोटों की गिनती कब होगी और चुनाव परिणाम कब घोषित होंगे, इसके बारे में कुछ नहीं बताया गया. अब देखिए कि बांग्लादेश और नेपाल में क्या हुआ.  बांग्लादेश में छात्र विद्रोह के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर जाने को अगस्त, 2024 में मजबूर किया गया.

भारत से अच्छे संबंध होने के कारण शेख हसीना ने यहीं पनाह ली हुई है. वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में बांग्लादेश में हिंसा और भारत विरोध चरम पर पहुंच गया. छात्र नेताओं ने नोबल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाई, जिस पर शेख हसीना विरोधी सबसे बड़ी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) द्वारा चुनाव कराने का दबाव है.

ठीक उसी समय सितंबर में नेपाल में नौजवानों ने विद्रोह कर दिया और प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा.  चुनाव 5 मार्च को होना है. सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए जोड़-तोड़ करनेवाले वामदलों से नाराज युवकों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट भवन में आग लगा दी.

भ्रष्टाचार के खिलाफ हिंसा और आगजनी के माहौल में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की अपील के बाद युवक इस आश्वासन पर शांत हुए कि 5 मार्च, 2026 को चुनाव कराए जाएंगे. इसके लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया. वर्ष 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने थे के.पी. शर्मा ओली.

2008 में रिपब्लिक बनने के बाद से 14 प्रधानमंत्री नेपाल में बन चुके हैं और कोई भी पद पर पांच साल नहीं रहा.  पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैनिक तख्तापलट होते रहे हैं. लेकिन चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि सरकार संभालते हैं. लेकिन म्यांमार की सेना जनभावना की परवाह नहीं करती.

भारत से ज्यादा चीन से नजदीकी रखना हमारे पड़ोसी देशों की नीति रही है, जिसमें पाकिस्तान, नेपाल के साथ-साथ श्रीलंका भी शामिल है. श्रीलंका में अब पहली बार वामपंथी पार्टी प्रमुख अनुरा दिसानायके राष्ट्रपति बने हैं, जिन्होंने भारत के साथ रिश्ते में संतुलन बनाने का संकेत दिल्ली आकर दिया है.

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