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ब्लॉग: आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत के हौसले और मजबूत होंगे

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 11, 2024 10:47 IST

चुनाव को विफल करने के लिए कश्मीर में आतंकवादी लगातार सक्रिय थे लेकिन उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो सके और वोट के जरिये कश्मीर की जनता ने साफ संदेश दे दिया कि वह शांति तथा विकास का रास्ता पसंद करती है और अब राज्य में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है.

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ठळक मुद्देराज्य में जल्द ही विधानसभा के चुनाव करवाने का रास्ता लोकसभा चुनाव की सफलता से प्रशस्त हो गया है.चुनाव के पहले आशंका जताई जा रही थी कि कश्मीर की जनता मतदान के लिए आगे आएगी या नहीं.18वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में कश्मीर घाटी में मतदान का चालीस साल का रिकॉर्ड टूट गया. 

तीर्थयात्रियों पर रविवार को पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों ने कायराना हमला किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का जब शपथग्रहण समारोह चल रहा था, उसी वक्त कश्मीर में यह निंदनीय हमला हुआ. कश्मीर में दम तोड़ चुके आतंकवाद को जिंदा साबित करने की आतंकवादियों की ऐसी अमानवीय हरकतें कभी सफल नहीं होंगी. आतंकवादियों की बौखलाहट स्वाभाविक है. 

कश्मीर में आतंकवादियों का शीर्ष नेतृत्व तथा समूचा नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है. जब भी वे सिर उठाने की नाकाम कोशिश करते हैं, उसे सख्ती के साथ कुचल दिया जाता है. आतंकवादियों के जले पर उस वक्त नमक लगा, जब लोकसभा चुनाव में कश्मीर की जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. 18वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में कश्मीर घाटी में मतदान का चालीस साल का रिकॉर्ड टूट गया. 

राज्य में जल्द ही विधानसभा के चुनाव करवाने का रास्ता लोकसभा चुनाव की सफलता से प्रशस्त हो गया है. चुनाव के पहले आशंका जताई जा रही थी कि कश्मीर की जनता मतदान के लिए आगे आएगी या नहीं.

चुनाव को विफल करने के लिए कश्मीर में आतंकवादी लगातार सक्रिय थे लेकिन उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो सके और वोट के जरिये कश्मीर की जनता ने साफ संदेश दे दिया कि वह शांति तथा विकास का रास्ता पसंद करती है और अब राज्य में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है. 

कश्मीर के रियासी क्षेत्र में रविवार को तीर्थयात्रियों पर आतंकियों ने हमला कर भारत की एकता तथा संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की है. लेकिन ऐसी कायराना हरकतों से न तो भारत की एकता और अखंडता पर कोई आंच आने वाली है और न ही कश्मीर को आतंकवाद के चंगुल से पूरी तरह मुक्त करवाने का मोदी सरकार का इरादा कमजोर हो सकता है. 

इसके विपरीत ऐसी हरकतों से आतंकवाद के विरुद्ध कश्मीर की जनता का आक्रोश और बढ़ेगा तथा पाकिस्तान के समर्थन एवं संरक्षण में फल-फूल रहे आतंकियों से लोहा लेने के कश्मीरी जनता के इरादे ज्यादा मजबूत होंगे. कश्मीर पाकिस्तान की दुखती रग है. पाकिस्तान भुखमरी के कगार पर है. वह आर्थिक सहायता के लिए विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, एशियाई विकास बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ कई देशों के सामने गिड़गिड़ा रहा है. 

घरेलू समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान के सत्ताधीश ही नहीं विपक्षी दल भी कश्मीर का राग अलापते रहते हैं और आतंकवादियों का नैतिक व आर्थिक समर्थन करते रहते हैं. पाकिस्तानी सेना तो इन आतंकवादियों की संरक्षक है और वह इस मुगालते में है कि किराए के लोगों के हाथ में हथियार थमाकर वह भारत से कश्मीर को छीन लेगी.

पाकिस्तानी सरकार तथा सेना में अब इतना नैतिक बल नहीं बचा है कि वह भारत से सीधा मुकाबला कर सके. इसीलिए वे कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए आतंकवादियों के मददगार बन गए हैं. 

भारत में शांतिपूर्ण लोकसभा चुनावों ने हमारे यहां लोकतंत्र की गहरी होती जड़ों से पूरी दुनिया को परिचित करवाया है. दुनिया ने देखा कि कैसे 98 करोड़ मतदाताओं के देश में कितने पारदर्शी तरीके से लोग अपनी सरकार का चुनाव करते हैं. पाकिस्तान में लोकतंत्र के नाम पर मजाक होता है. वहां सेना तय करती है कि सरकार किसकी बनेगी, कैसे चलेगी और कितने दिन चलेगी. 

पाकिस्तान को भारत में लोकसभा चुनाव की सफलता भी पच नहीं पा रही है. इसीलिए आश्चर्य नहीं कि अपनी खीझ मिटाने के लिए उसने आतंकवादियों से रियासी में तीर्थयात्रियों पर हमला करवाया हो. पिछले दस वर्षों में मोदी सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़कर रख दी है.

देश को आतंकवाद से मुक्त करवाने में हमारे सैनिक तथा सुरक्षा बलों के जवानों ने प्राणों की आहुति दी है. उसके फलस्वरूप कश्मीर में अब सुरक्षा और शांति का माहौल है. वह जमाना गया, जब श्रीनगर के लाल चौक पर कोई तिरंगा नहीं फहरा सकता था. 

अब न केवल लाल चौक बल्कि कश्मीर के हर हिस्से में तिरंगा शान से फहराया जाता है. अगर आतंकवादियों ने यह मुगालता पाल लिया है कि शपथग्रहण के दौरान कश्मीर में तीर्थयात्रियों पर हमला कर उन्होंने कोई बड़ा तीर मार लिया है तो वे गलतफहमी में हैं. कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उनके सूत्रधारों को हमारी सरकार ने ढूंढ़-ढूंढ़कर मार गिराया है. रियासी हमले के दोषी भी ज्यादा दिन बच नहीं सकेंगे.

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