indian forces: Special Forces Division Game Changer Initiative' | सारंग थत्ते का ब्लॉगः स्पेशल फोर्सेस डिवीजन गेमचेंजर पहल  
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अप्रैल 1980 में तेहरान में अमेरिकन दूतावास के 52 कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया था. अमेरिका ने अपने सबसे बेहतर स्पेशल फोर्सेस को इस किस्म की परिस्थिति से निपटने के लिए इस्तेमाल किया. कुल आठ हेलिकॉप्टर इस मिशन के लिए नामजद हुए, लेकिन सिर्फ पांच ही नियत स्थान डेल्टा वन पर पहुंच पाए. ऑपरेशन को बीच में ही छोड़ने का हुक्म हुआ. तब भी एक हेलिकॉप्टर दूसरे भारवाहक विमान से टकरा गया. इसमें नुकसान न सिर्फ जानमाल का हुआ लेकिन विश्व में अमेरिका की साख तुरंत गिर गई थी.    

जब इस ऑपरेशन की कमजोरी पर मंथन  किया गया तब तीन अहम बातें उभरकर कर सामने आईं- खराब योजना, त्नुटिपूर्ण कमांड संरचना, अपर्याप्त  प्रशिक्षण. अमेरिका ने इस हताशा के बाद  अपने विशेष दस्तों की संरचना के लिए कड़े कदम उठाए और 90 के दशक से अफगानिस्तान, मध्य-पूर्व और पृथ्वी के हर कोने में अपने स्पेशल फोर्सेस से अभूतपूर्व सफलता हासिल की है.

अब भारत सरकार ने भी एक दूर की सोच को काफी समय के बाद जमीन पर एहतियात से मूर्तरूप देने की योजना में पहला कदम उठाया है. भारतीय सेना के पास मौजूद स्पेशल फोर्सेस जिन्होंने अपने दमखम पर उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान के भीतर घुसकर सफलतापूर्वक आतंकवादी कैंपों को बर्बाद किया - एक बेहद मजबूत प्रदर्शन था. वायुसेना ने भी बालाकोट में अपने बमों से लैस मिराज 2000 लड़ाकू जहाजों से जो नुकसान पहुंचाया है वह तारीफ के काबिल है. 

जब देश की सीमा पर खतरे के बादल निरंतर मंडराते रहे हों, तब सेना को भी एकीकृत कमान संरचना के साथ अपनी कार्रवाई को अंजाम देना निहायत जरूरी निर्णय था. अब रक्षा मंत्नालय के अधीन थल सेना के स्पेशल फोर्सेस के पैरा कमांडो, नौसेना के मार्कोस ( मरीन कमांडो ) तथा वायुसेना के गरुड़ कमांडो को एक सूत्न में पिरोने के लिए एक नई इकाई का गठन किया गया है. तीनों सेनाओं की एकीकृत कमांडो यूनिट को एक साथ लाने के लिए रक्षा मंत्नालय ने देश में पहली बार स्पेशल फोर्सेस डिवीजन बनाने का निर्णय लिया है.


Web Title: indian forces: Special Forces Division Game Changer Initiative'
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