How to solve our problems | बढ़ती समस्याओं से ऐसे निपटें
बढ़ती समस्याओं से ऐसे निपटें

ललित गर्ग

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हर व्यक्ति को निराशा एवं प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन सफल और सार्थक जीवन वही है जो सफलता और असफलता, अनुकूलता और प्रतिकूलता, दुख और सुख, हर्ष और विषाद के बीच संतुलन स्थापित करते हुए अपने चिंतन की धारा को सकारात्मक बनाए रखता है। जीवन की समग्र समस्याओं का समाधान व्यक्ति चिंतन के द्वारा खोज सकता है। समस्याएं चाहे व्यक्तिगत जीवन से संबंधित हों, पारिवारिक जीवन से संबंधित हों या फिर आर्थिक हों. इन प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष कर रहे व्यक्ति का यदि नकारात्मक चिंतन होगा तो वह भीतर ही भीतर टूटता रहेगा, नशे की लत का शिकार हो जाएगा और अपने जीवन को अपने ही हाथों बर्बाद कर देगा।

जो व्यक्ति इन प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ नहीं पाते वे आत्महत्या तक कर लेते हैं या परहत्या जैसा कृत्य भी कर बैठते हैं। इस तरह की घटनाएं वर्तमान में बढ़ती ही जा रही हैं कुछ व्यक्ति इन परिस्थितियों में असामान्य हो जाते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हमारे सामने हैं जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं के जीवन को और अधिक जटिल बना देता है।

प्रतिकूल परिस्थितियों में व्यक्ति अपना संतुलन कैसे बनाए रख सकता है यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। किसी नियमित काम के छूट जाने की वजह से टूटने और उससे दूर भागने के बजाय आवश्यकता है नई शुरुआत किए जाने की। जब हम अपनी परेशानियों का सामना करेंगे तो इस प्रयोग एवं प्रशिक्षण से हम उनका मुकाबला करने का तरीका भी निकाल ही लेंगे। एक बात का हमें ध्यान रखना होगा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान नहीं है। अगर उसका समाधान नहीं है तो वह स्वयं में कोई समस्या नहीं है। हम यह बात ध्यान में रखें तो बहुत सी समस्याओं से मुक्ति पाना आसान हो जाएगा।

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