ब्लॉग: एक के बाद एक इस्तीफे, पीएमओ में हो रहे चौंकाने वाले फेरबदल!

By हरीश गुप्ता | Published: March 3, 2022 09:38 AM2022-03-03T09:38:43+5:302022-03-03T09:38:43+5:30

ऐसी खबरें हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने हाल ही में अपनी उम्र को देखते हुए इस्तीफा देने की इच्छा व्यक्त की थी. डोभाल 77 साल के हैं.

Harish Gupta blog: one resignation after another shocking reshuffle taking place in PMO | ब्लॉग: एक के बाद एक इस्तीफे, पीएमओ में हो रहे चौंकाने वाले फेरबदल!

पीएमओ में हो रहे चौंकाने वाले फेरबदल!

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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में कुछ दिलचस्प फेरबदल देखने को मिल रहे हैं और नौकरशाह असमंजस में हैं. पीएमओ में वरिष्ठ सलाहकार अमरजीत सिन्हा ने अगस्त 2021 में अपने कार्यकाल से सात महीने पहले अचानक नौकरी छोड़ दी थी. उनसे पहले पीएमओ में प्रधान सलाहकार पी.के. सिन्हा ने पिछले साल पद छोड़ दिया था. 

सिन्हा पीएमओ में शामिल होने से पहले कैबिनेट सचिव थे. यह अफवाह थी कि उन्हें दिल्ली के एलजी के रूप में लाया जा सकता है. लेकिन एक साल से अधिक समय हो गया है और वे प्रतीक्षा ही कर रहे हैं. अब भास्कर खुल्बे, जिन्हें प्रधानमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था, ने इस्तीफा दे दिया है. खुल्बे पहले पीएमओ में सचिव थे और उन्हें सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई थी. 

कुछ महीनों के बाद, 2020 में उन्हें पीएम के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था. लेकिन अचानक, उन्होंने भी अपना इस्तीफा देकर पद छोड़ दिया. 

दिलचस्प बात यह है कि एक साल से भी कम समय में तीन वरिष्ठ अधिकारियों के पद छोड़ने के बाद पीएमओ में कोई भी उनके स्थान पर नहीं लाया गया है. पीएम के प्रधान सचिव पी. के. मिश्र सरकार में मैन पॉवर कम करने के पक्ष में बताए जा रहे हैं और इसकी शुरुआत पीएमओ से ही हो गई है. 

अधिकृत तौर पर यह पता चला है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने हाल ही में अपनी उम्र को देखते हुए इस्तीफा देने की इच्छा व्यक्त की थी. डोभाल 77 साल के हैं और अवकाश ग्रहण करना चाहते हैं. लेकिन बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया. 

इससे पहले, पीएम के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र ने भी 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी की बड़ी जीत के बाद प्रतिष्ठित पद पर फिर से नियुक्त होने के कुछ महीने बाद इस्तीफा दे दिया था.

नीतीश कुमार को कोई पूछने वाला नहीं!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेहद चिंतित हैं. जब से भाजपा 2020 के विधानसभा चुनावों में नंबर-एक पार्टी के रूप में उभरी है, जनता दल (यू) को दूसरे स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर रही है, ‘सुशासन बाबू’ कोई रास्ता खोजने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. वह दिन दूर नहीं जब भाजपा यूपी विधानसभा चुनाव जीतने की स्थिति में बिहार में अन्य दलों को विभाजित करेगी और अपनी सरकार बनाएगी. 

इस पृष्ठभूमि में जुलाई 2022 में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार का नाम अचानक सुर्खियों में आया. पता चला है कि इसके पीछे स्वतंत्र चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का हाथ था. तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की मुंबई में करीब चार घंटे तक मुलाकात के बाद यह खबर फैली. 

पूछे जाने पर शिवसेना नेता संजय राऊत ने यह कहते हुए इनकार किया कि चार घंटे की लंबी बैठक के दौरान राष्ट्रपति चुनाव पर कोई चर्चा नहीं हुई क्योंकि राऊत पूरे समय मौजूद थे. यह किशोर ही हैं जो चाहते हैं कि नीतीश कुमार गैर-भाजपाई ताकतों के बीच खालीपन को भरने के लिए राष्ट्रीय परिदृश्य की ओर बढ़ें. लेकिन विपक्षी खेमे में नीतीश कुमार को कोई पूछने वाला नहीं है क्योंकि उनकी राजनीतिक छवि को बड़ा धक्का लगा है.

रूस के लिए जयशंकर का गुप्त मिशन?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर शायद मोदी की कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) में एकमात्र ऐसे मंत्री हैं जो शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, मीडिया से बातचीत नहीं करते हैं और अपने कई अन्य मंत्री सहयोगियों की तरह बयान जारी नहीं करते हैं. वे एक निजी व्यक्ति बने रहना पसंद करते हैं और चुपचाप काम करते हैं. यही कारण है कि किसी को भी नहीं पता था कि उन्होंने पिछले हफ्ते पीएम द्वारा सौंपे गए मिशन पर वायु सेना के विशेष विमान में रूस के लिए उड़ान भरी थी. 

पता चला है कि मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से बात करने के बाद जयशंकर को भेजा गया था. मॉस्को की संक्षिप्त यात्र के दौरान क्या हुआ, यह अभी ज्ञात नहीं है. यह सब एक दिन में हो गया और जयशंकर रात के अंधेरे में सीधे साउथ ब्लॉक के लिए रवाना हो गए. उनकी यात्र को गुप्त रखा गया है और कोई विवरण नहीं दिया गया है. जाहिर है, भारत अपने पत्ते नहीं खोलना चाहता है क्योंकि यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है.

अरविंद केजरीवाल का आत्मविश्वास प्रबल

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल इन दिनों पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत के प्रति आश्वस्त हैं. केजरीवाल एक प्रमुख कानूनविद् के आवास पर गए और कहा कि आप पंजाब में जीत रही है, भले ही चुनावी विशेषज्ञ कुछ भी कह रहे हों. उन्होंने यह संख्या 117 में से 80 सीटों पर रखी. 

राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी 40 सीटों से नीचे होगी और अकाली 20 सीटों को पार नहीं कर पाएंगे. सभी संकेतों के मुताबिक आप पंजाब में सबसे बड़ी पार्टी होगी.

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