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COVID-19 vaccination in India: ऐतिहासिक उपलब्धि है 50 करोड़ टीकाकरण

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 14, 2021 10:28 IST

भारत ने कोरोना वायरस के खिलाफ चल रहे टीकाकरण अभियान के तहत 50 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाने की तिहासिक उपलब्धि हासिल की है

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ठळक मुद्देटीकाकरण अभियान के तहत 50 करोड़ से अधिक लोगों को टीकादेश में केवल 9 महीने में दो मेड इन इंडिया कोविड वैक्सीन बनकर तैयार हुई देश को वैक्सीनेशन में पहले 10 करोड़ का आंकड़ा छूने में 85 दिन लगे थे

लेखक- जगत प्रकाश नड्डा (बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष)

सात अगस्त 2021 को भारत ने कोरोना को परास्त करने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 50 करोड़ वैक्सीनेशन का आंकड़ा पार कर लिया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज गति से चलने वाला वैक्सीनेशन प्रोग्राम है। तमाम अवरोधों के बावजूद यह उपलब्धि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, कोरोना वॉरियर्स के लगन और वैज्ञानिकों एवं उद्यमियों के साहसिक प्रयास का परिचायक है। 

यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्न के प्रधानमंत्री  की दूरदर्शी सोच का नतीजा था कि देश में केवल 9 महीने में ही एक नहीं, बल्कि दो-दो मेड इन इंडिया कोविड वैक्सीन बनकर तैयार हुई और वैज्ञानिक तरीके से इसका रोल-आउट भी हुआ। 

16 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन कार्यक्रम की शुरुआत की थी। यह शुरुआत इतनी आसान न थी। देश को वैक्सीनेशन में पहले 10 करोड़ का आंकड़ा छूने में 85 दिन लगे थे लेकिन इसके बाद लगातार इसमें तेजी आती गई। 

सरकार के हस्तक्षेप से अनिवार्य लाइसेंसिंग की प्रक्रि या आसान की गई ताकि अन्य वैक्सीन उत्पादक कंपनियां भी इससे जुड़ सकें और वैक्सीन उत्पादन में तेजी आ सके। कोविशील्ड और कोवैक्सीन के साथ-साथ स्पुतनिक का भी देश में उत्पादन शुरू हुआ। 

इसी सात अगस्त को जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड वैक्सीन को भी मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी लगातार पूरे वैक्सीनेशन कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करते रहे और इसका परिणाम हुआ कि 10 करोड़ से 20 करोड़ का आंकड़ा पार करने में भारत को महज 45 दिन लगे। 

इसी तरह 20 से 30 करोड़ तक पहुंचने में केवल 29 दिन, 30 से 40 करोड़ तक पहुंचने में 24 दिन और 40 करोड़ से 50 करोड़ वैक्सीन डोज एडमिनिस्टर करने में सिर्फ 20 दिन लगे। आगे भी हम रुकने वाले नहीं हैं। 50 करोड़ वैक्सीनेशन डोज एडमिनिस्टर करने का आंकड़ा निस्संदेह मील का पत्थर है लेकिन हम इस गति को बनाए रखेंगे और इस वर्ष के अंत तक हर देशवासी को वैक्सीनेट करने में सफल होंगे।

16 जनवरी को देशव्यापी वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू होने के बाद जब 21 जून 2021 से इसकी कमान केंद्र ने पूरी तरह अपने हाथ में ले ली, तब से लगातार वैक्सीन की गति में काफी तेजी आई है। मोदी सरकार 75 प्रतिशत टीके खरीदकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त दे रही है। 

इस साल के अंत तक हमारे पास लगभग 136 करोड़ वैक्सीन डोज उपलब्ध होंगे। अगस्त में लगभग 25.65 करोड़, सितंबर में 26.15 करोड़, अक्तूबर में कुल 28।25 करोड़, नवंबर में 28.25 करोड़ और दिसंबर में 28.5 करोड़ खुराक का उत्पादन होने वाला है। 

अन्य वैक्सीन को मान्यता देने की प्रक्रि या भी सरल बनाई गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्नण संगठन ने टीकों की फास्ट ट्रैक मंजूरी के लिए कई कदम उठाए हैं। क्लिनिकल ट्रायल और वैक्सीन के अप्रूवल के लिए फास्ट ट्रैक प्रोसेसिंग सिस्टम बनाया गया है।

संसद के मौजूदा मानसून सत्न में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड और वैक्सीनेशन पर सर्वदलीय बैठक बुलाई तो कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस बैठक में आए ही नहीं। इससे पहले भी जब-जब वैक्सीन को लेकर प्रधानमंत्री ने बैठक बुलाई तो इसमें भी विपक्षी पार्टियों ने राजनीति की। 

कभी छत्तीसगढ़ और बंगाल की मुख्यमंत्री बैठक में शामिल नहीं होते तो कभी दिल्ली के मुख्यमंत्री रणनीतिक बैठक को सार्वजनिक कर देते हैं। कभी झारखंड के मुख्यमंत्नी बैठक को लेकर अनाप-शनाप बयान देते हैं तो कभी पंजाब और राजस्थान की कांग्रेसी सरकारों का अनर्गल प्रलाप होने लगता है। यही अपने आप में कहने के लिए काफी है कि विपक्ष ने किस तरह भारत के वैक्सीनेशन कार्यक्रम को पटरी से उतारने की कोशिश की।

कोरोना वायरस महामारी के दौरान हमारे डॉक्टरों, नर्सो और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने मानवता की जो सेवा की है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी। ऐसी कई कहानियां हैं जब हमारे कोरोना वॉरियर्स ने अपनी जान की परवाह न करते हुए, कोरोना पीड़ित लोगों की सेवा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। 

कई महिला डॉक्टर एवं नर्स ने मानवता की सेवा के लिए अपनी ममता की कोख को भी दांव पर लगा दिया। इनमें से कई ने तो गर्भावस्था में रहते हुए भी अपने आपको पीड़ितों की सेवा में समर्पित कर दिया। कई तो महीनों अपने परिवार से नहीं मिल पाए। 

उनके लिए मरीजों की बेहतरी ही लक्ष्य बन गया। कोरोना से मुक्त होने के बाद जब मरीजों के चेहरे पर मुस्कान खिलती तो उनमें ही उन्हें आत्मसंतोष मिलता था। ऐसे सभी डॉक्टर्स, नर्स, स्वास्थ्यकर्मियों एवं इस व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में लगे फ्रंटलाइन वर्कर्स को मैं नमन करता हूं।

हम सब जानते हैं कि पहले बीमारियों का टीका भारत आने में कितने-कितने साल लग जाते थे। इस बार दुनिया चकित रह गई कि जो भारत वैक्सीन के लिए दुनिया के अन्य देशों पर आश्रित रहा करता था, उसने कैसे न केवल विश्वस्तरीय वैक्सीन विकसित की, इस कार्यक्र म को देश में सफलतापूर्वक लागू किया बल्कि संकट के समय दुनिया के अन्य देशों की मदद भी की। 

आज से पहले भारत के बारे में शायद ऐसी कल्पना भी न की जा सकती थी। यह प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा है जो हर भारतवासी के लिए सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रहा है। उनके नेतृत्व में हम न रुकेंगे, न थकेंगे और इसी जज्बे व लगन के साथ वैक्सीनेशन कार्यक्रम को और गति देंगे। हम इस वर्ष के अंत तक देश के हर नागरिक को वैक्सीनेट करने के लक्ष्य को साकार करने में जरूर सफल होंगे।

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