Beauty Products: Today's Beauty Products brings the bad habits into the heart | Blog: तन के कालेपन को मन में उतारने का काम कर रहे हैं आज के ब्यूटी प्रॉडेक्ट

गोरे रंग पर न इतना गुमान कर गोरा रंग दो दिन में ढल जाएगा...लेकिन सौन्दर्य प्रसाधनों की कृपा ने ढलेगा। सुंदरता का मापदंड तन की खूबसूरती से बड़ी ही आसानी से माप लिया जाता है। आमतौर पर ऐसा होता है कि हम तन के रंग से इंसानी सुंदरता को माप लेते हैं मसलन अगर कोई गोरा हो तो 'सुंदर' और अगर काला है तो 'बदसूरत' करार दिया जाता है। विचित्र बात ये है कि हमारे समाज की सोच ही ऐसी बन गई है कि इसी मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं सौन्दर्य प्रसाधन। कुछ समय पहले एक सर्वे में साफ हुआ था कि दबते रंग के लोगों के अंदर अपने रंग को लेकर एक कुंठा होती है जिस कारण से वह महंगे से महंगे सौन्दर्य प्रसाधन का प्रयोग करते हैं और खुद को सुंदर बनाने के लिए वह तमाम तरह के ब्यूटी प्रोटेक्ट खुद पर थोप देते हैं।

दशकों से सौन्दर्य प्रशाधन की ओर लोग भागते रहे हैं। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है प्रसाधनों की बाजार में मांग भी बढ़ती जा रही है। हमारे आस-पास सैकड़ों की तादात में ऐसे ब्यूटी प्रशाधन हैं जो खुद की ओर आकर्षित करने का काम करते हैं। इसका एक मात्र कारण है लोंगो की सोच। सांवले रंग को लेकर एक सोच आम जीवन में बना ली गई है कि गोरे रंग के लिए ब्यूटी प्रोटेक्ट अपनाना जरूरी है। अगर गोरे होना है तो ये प्रोड्क्ट प्रयोग में लाएं। इन प्रोडक्टस को बढ़ावा देने के लिए पार्लर भी अपना ही योगदान दे रहे हैं। ये लोगों को इनकी तरफ खींचने का एक जरिया बन रहे हैं। आज पार्लर ग्राहकों को प्रोडक्ट के प्रयोग के लिए जागरूक करने का काम कर रहे हैं। अब कई ब्यूटी प्रोडक्स ने ही ब्रांड के पार्लर भी खोल लिए हैं । 

ऐसे में  अब सवाल ये भी उठता है कि क्या पार्लर भी लोगों को उनके रंग को लेकर कुठां पैदा करते हैं ताकि वह उन प्रोडक्ट्स का प्रयोग कर जो उन्हें सुन्दर बनाने में मदद करें। बेटा काला होगा लेकिन बहू गोरी चाहिए यहां पर आ जाती है गलत सोच। कहीं ना कहीं इस सोच के कारण भी इन प्रसोधनों का प्रयोग तेजी से किया जा रहा है।। वहीं, आज के प्रोडेक्ट इंसान को कुछ का कुछ बना देते हैं। कभी कभी खुद भी लगता है जनाब ये हम हीं या कोई और। वहीं, देखने में आ रहा है कि जिन प्रोडक्ट्स का के दाम जितने ऊंचे हैं उतने ही ऊंचे उनके वादे होते हैं। आज बाजार में एक से एक महंगी कीमत के ब्यूटी प्रोडेक्ट हैं जो लोगों को अपनी तरफ मोहित करते हैं। ऐसा भी देखने में आ रहा है जो ब्रांड जितना महंगा होगा उतना प्रयोग उतना ही ज्यादा किया जा रहा है। 

ब्यूटी प्रोडक्ट को घर घर पहुंचाने का अहम किरदार निभाते हैं, विज्ञापन।  इसको बढ़ावा वैसे विज्ञापनों ने सबसे ज्यादा दिया। हर तरफ आपको ये विज्ञापन आपको खुद वा खुद सांवले रंग से गोरे होने की तरह खींचते हैं। इसके लिए भले बजट बिगड़े लेकिन हम इसको प्रयोग करके ही अपने मन को शांत करते हैं। जैसे-जैसे प्रोडक्ट बाजार में कदम बढ़ा रहे हैं विज्ञापनों का रूप भी बदलता जा रहा है। नई-नई तकनीक से दिखाया जाता है कि किस तरह से काले रंग से एक क्रीम को 15 दिन लगाने से आप गोरे हो जाएंगे और इसके लिए ये ब्यूटी कंपनियां बड़े-बड़े स्टार को उनका विज्ञापन करने के लिए बाजार में उतारती हैं ताकि लोग ये जाकर उसका इस्तेमाल कर लें कि उनका स्टार भी इसको प्रयोग में लाता है। कई स्टार्स ने इस तरह के विज्ञापनों को करने से आज मना भी किया है।

ऐसा नहीं केवल लड़कियां ही इनको प्रयोग कर रही हैं।अब ये ब्यूटी प्रोडक्ट लड़कों को भी अपनी तरफ खींचने का काम कर रहे हैं। आज बाजार में लड़कों को भी गोरा और स्मार्ट बनाने के इस तरह के कई प्रोडक्ट आ चुके हैं। ये महंगे प्रोडक्ट भले आपको सुन्दर कर कुछ पलों के लिए लेकिन ये आपकी सेहत के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। रांची में इस तरह के प्रोडेक्ट को हानिकारक बताया गया था जिसके बाद पहली बार रांची में औषधि निदेशालय ने मार्च में ही राजधानी से सौंदर्य प्रसाधानों का सैंपल जांच के लिए सेंट्रल ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री चेन्नई को भेजा। औषधि निरीक्षक शैल अंबष्ट ने बताया कि जो सैंपल भेजे गये हैं, उनमें ब्रांडेड कंपनियों के शैंपू और टेलकम पाउडर शामिल हैं। इनकी सैंपलिंग काफी पहले ही की जा चुकी थी। अगर सभी मिलकर कदम उठाकर ये कहने लगे न कि काला रंग नहीं काला मन है तो इन प्रोडक्ट को एक दिन में सही रास्ता मिल सकता है। एक बात साफ जिस दिन लोगों के मन से गोरे काले का भेज खत्न होगा उसी दिन इन प्रोडेक्ट का भा खाना भी बंद होगा।