भारत में कैंसर कितनी बड़ी चिंता और पूरा इलाज खोजने की कोशिश में कहां तक पहुंचे हैं वैज्ञानिक?

By निरंकार सिंह | Published: November 7, 2022 10:19 AM2022-11-07T10:19:07+5:302022-11-07T10:19:52+5:30

भारत सहित दस देशों के वैज्ञानिकों की अलग-अलग टीमें कैंसर के जीनों के रहस्य जानने में जुटी हैं. कुछ सफलताएं मिली हैं लेकिन अभी मंजिल दूर है. पहले तो इस बीमारी पता ही तब चलता था, जब यह भयंकर रूप ले लेती थी.

How much cancer in India is big concern and how far have scientists reached in trying to find complete cure? | भारत में कैंसर कितनी बड़ी चिंता और पूरा इलाज खोजने की कोशिश में कहां तक पहुंचे हैं वैज्ञानिक?

कैंसर से डरने की नहीं, सावधान रहने की है जरुरत (फाइल फोटो)

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भारत में हर साल 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है. इसका लक्ष्य कैंसर के लक्षणों और उपचार के बारे में जागरूकता फैलाना है. 2014 में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने घोषणा की कि सात नवंबर को हर साल राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा. कैंसर आज भी दुनिया की सबसे भयावह बीमारियों में से एक है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में 10 भारतीयों में से एक को अपने जीवनकाल में कैंसर होने और 15 में से एक की इस बीमारी से मौत होने की आशंका जताई गई है.

रिपोर्ट के अनुसार 2018 में भारत में कैंसर के 11.6 लाख नए मामले सामने आए थे. पिछले साल डब्ल्यूएचओ और उसके साथ काम करने वाली ‘इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर’ (आईएआरसी) ने दो रिपोर्ट जारी की थी. एक रिपोर्ट बीमारी पर वैश्विक एजेंडा तय करने पर आधारित है और दूसरी रिपोर्ट इसके अनुसंधान एवं रोकथाम पर केंद्रित है. 

वर्ल्ड कैंसर रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2018 में कैंसर के लगभग 11.6 लाख मामले सामने आए और कैंसर के कारण 7,84,800 लोगों की मौत हो गई. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और दवाओं ने हैजा, प्लेग, पोलियो, टीबी जैसे कई असाध्य रोगों पर विजय पा ली है, पर खतरनाक कैंसर सभी चिकित्सा विधियों को चकमा देने वाला साबित हुआ है.  

भारत सहित दस देशों के वैज्ञानिकों की अलग-अलग टीमें कैंसर के जीनों के रहस्य जानने में जुटी हैं. पहले इसका पता ही तब चलता था, जब यह बीमारी भयंकर रूप ले लेती थी. अब वक्त रहते इसका पता लगाकर इलाज के जरिये लोगों की जान बचाने की दिशा में वैज्ञानिकों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. इस टेस्ट के जरिये लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद प्रोटीन में होने वाले परिवर्तन को डिटेक्ट किया जाता है. 

एक स्वस्थ इंसान में इस तरह का परिवर्तन औसतन प्रति मिलियन (दस लाख) पर पांच का होता है. लेकिन कैंसर से पीड़ित किसी इंसान में यह परिवर्तन प्रति मिलियन पर औसतन 50 से 100 के बीच होता है.
कैंसर के मोर्चे पर भारतीय वैज्ञानिकों को भी बड़ी कामयाबी मिली है. डीएस रिसर्च सेंटर कोलकाता के वैज्ञानिकों ने खाद्य पदार्थों की पोषक ऊर्जा से उस औषधि को तैयार कर लिया है जो कैंसर कोशिकाओं  पर लगाम लगाकर उसका उन्मूलन करने में सक्षम है. 

वैज्ञानिक परीक्षणों में भी इस औषधि के नतीजे बेहतर पाए गए हैं. कोलकाता के जाधवपुर विश्वविद्यालय के नैदानिक अनुसंधान केंद्र (सीआरसी) के निदेशक डॉ. टी.के. चटर्जी के अनुसार, ‘डीएस रिसर्च सेंटर की पोषक ऊर्जा से तैयार की गई औषधि सर्वपिष्टी के पशुओं पर किए गए परीक्षण के परिणाम उत्साहजनक पाए गए हैं.

Web Title: How much cancer in India is big concern and how far have scientists reached in trying to find complete cure?

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