दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार संतुलन जरूरी?, द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर के करीब?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 29, 2026 05:26 IST2026-04-29T05:26:25+5:302026-04-29T05:26:25+5:30

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के सम्मान में समारोह, सहमति पत्रों और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना, यानी 54 अरब डॉलर करने के वादे को व्यापार असंतुलन की ठोस सच्चाई के बरक्स देखना चाहिए.

South Korea is important Trade balance Bilateral trade close to $27 billion blog Prabhu Chawla | दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार संतुलन जरूरी?, द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर के करीब?

सांकेतिक फोटो

Highlightsकूटनीतिक विचलन नहीं मानना चाहिए.16 वर्षों से कूटनीतिक चुप्पी थी. तीन गुना बढ़कर 15.2 अरब डॉलर हो गया.

प्रभु चावला

हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग के भारत दौरे से एक दिन पहले विदेश मंत्रालय ने साउथ ब्लॉक में अपनी प्रथागत पूर्व यात्रा ब्रीफिंग आयोजित की. पत्रकारों को जानकारी देते हुए सचिव ने एक असामान्य खुलासा किया : “कोरिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर के करीब है, पर यह काफी असंतुलित है. हमारा निर्यात करीब 6.5 अरब डॉलर के दायरे में है, जबकि कोरिया का निर्यात करीब 21.4 अरब डॉलर है. इसलिए दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) को पुनर्संतुलित करने की जरूरत है.” इसे कूटनीतिक विचलन नहीं मानना चाहिए.

सरकार की ओर से उस सच्चाई का खुलासा किया गया, जिस पर 16 वर्षों से कूटनीतिक चुप्पी थी. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के सम्मान में समारोह, सहमति पत्रों और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना, यानी 54 अरब डॉलर करने के वादे को व्यापार असंतुलन की ठोस सच्चाई के बरक्स देखना चाहिए.

दक्षिण कोरिया को भारतीय निर्यात 2021-22 के आठ अरब डॉलर के मुकाबले 2024-25 में गिरकर 5.82 अरब डॉलर रह गया. जबकि इसी दौरान भारत में कोरियाई निर्यात बढ़कर 21.06 अरब डॉलर हो गया. जाहिर है, 2010 में सीईपीए लागू होने के बाद 2024-25 में भारत का व्यापार घाटा लगभग तीन गुना बढ़कर 15.2 अरब डॉलर हो गया.

वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच कोरिया को भारतीय निर्यात 11 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से कम हुआ, जबकि कोरियाई आयात में सालाना 10 फीसदी की वृद्धि हुई. द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य नया नहीं है. वर्ष 2019 में भी यही लक्ष्य रखा था. नई बात यह है कि भारत ने स्वीकार किया है कि व्यापार असंतुलन को सुधारे बिना 50 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने से भारत का व्यापार घाटा और बढ़ेगा. भारतीय क्षोभ के केंद्र में वे कोरियाई ब्लूचिप सब्सिडीयरी हैं, जिनका भारतीय परिचालन मूल्य और नकदी पैदा करने की शक्ति मूल कोरियाई कंपनियों की तुलना में बहुत अधिक है.

इस प्रसंग में सबसे कष्टप्रद आयाम ‘वियतनाम विरोधाभास’ है. वर्ष 2024 तक भारत में कोरिया का संचयी एफडीआई लगभग 10 अरब डॉलर था. बावजूद इसके कि भारतीय अर्थव्यवस्था वियतनाम की अर्थव्यस्था से 10 गुना बड़ी है, उच्च रॉयल्टी, आईपीओ कैश-आउट और लाभांश प्रवाह के माध्यम से कोरियाई कंपनियां भारतीय उपभोक्ताओं से अर्जित मुनाफे से वियतनामी कारखानों को सब्सिडी दे रही हैं, जो फिर तैयार माल भारत निर्यात करते हैं. क्यों?

स्वदेशी नेता यह सवाल पूछते हैं कि क्या कोरियाई समूहों को भारत से निकाली गई नगदी को एक छोटे पड़ोसी देश में विनिर्माण सुविधाओं में निवेश करना चाहिए, जो फिर भारतीय उद्योग को ही कमजोर करता है? यह बेहद क्षुब्ध करने वाली स्थिति है कि भारत को एक दुधारू गाय समझ लिया गया है. यह आत्मनिर्भरता के भारतीय विमर्श की आत्मा पर प्रहार है.

उदारीकरण के दशकों-दशक इस वादे के भरोसे रहे कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घरेलू उद्योग को उत्प्रेरित करेगा, तकनीक हस्तांतरित करेगा व संतुलित विकास पैदा करेगा. जबकि वास्तविकता में नीति उन विदेशी दिग्गजों की ओर झुक गई है जो मुनाफे, रॉयल्टी, विशेष लाभांश और आईपीओ की आय को अपने देश ले जाते हैं.

दूसरी ओर, भारतीय फर्में उच्च अनुपालन लागत, विलंबित अनुमोदन और रॉयल्टी के बोझ से जूझ रही हैं, जो स्थानीय नवाचार को भूखा रखता है. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के भारत दौरे के बाद सीईपीए को अपग्रेड करने की बात होने के साथ-साथ हिसाब-किताब करने का समय आ गया है.

इसके बावजूद यह मौलिक प्रश्न बना हुआ है : क्या दिल्ली नियमों को फिर से लिखने का साहस जुटा पाएगी, या कोरियाई या जापानी प्रभाव एक बार फिर उस यथास्थिति को बनाए रखेगा, जो भारत की औद्योगिक संप्रभुता को खत्म करते हुए संपत्ति निकालती है? इस प्रश्न का उत्तर न केवल भारत-कोरिया व्यापार संबंधों के भविष्य को परिभाषित करेगा,

बल्कि भारत द्वारा हस्ताक्षरित हर रणनीतिक साझेदारी की विश्वसनीयता भी तय करेगा. भारत के पास वह प्रभाव है, जिसका उसने पहले कभी उपयोग नहीं किया. यह दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार और विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है.

भविष्य बताएगा कि अपने कोरियाई समकक्षों के सामने बैठे नई दिल्ली के वार्ताकारों में धन को बाहर जाने से रोकने की इच्छाशक्ति है, या एक बार फिर वह दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और रात्रिभोज की मेजबानी करते हुए मुनाफे को अगली उड़ान से सियोल जाते हुए देखेंगे.

Web Title: South Korea is important Trade balance Bilateral trade close to $27 billion blog Prabhu Chawla

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