Narendra Modi Government Policies are responsible for Petrol and Diesel Price Hike | मोदी सरकार के इन दो "डबल स्टैंडर्ड" की वजह से अक्षय कुमार को डिलीट करना पड़ा 6 साल पुराना ट्वीट
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अभिनेता अक्षय कुमार को अपना छह साल पुराना साल 2012 का एक ट्वीट डिलीट करना पड़ा। तब उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने के आसार देखकर जनता को अपनी-अपनी साइकिल साफ कर लेने का सुझाव दिया था। अक्षय ने वो ट्वीट 27 फ़रवरी 2012 को किया था। आज 22 मई 2018 को पेट्रोल और डीजल की कीमतें  पिछले 70 सालों  साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुकी हैं। एक यूज़र ने अक्षय कुमार का पुराना ट्वीट निकालकर उनसे साइकिल माँगी तो उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर  दिया। अक्षय कुमार के पुराने ट्वीट के सामने आने के बाद लोगों ने दूसरे फिल्मी सितारों के भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से जुड़े पुराने ट्वीट खोज निकाले। अमिताभ बच्चन ने 24 मई 2012 को पेट्रोल-डीजल की महँगाई पर जोक शेयर किया था। अनुपम खेर ने 14 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तंज करते हुए एक चुटकुला शेयर किया था। 

पीएम नरेंद्र मोदी 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मनमोहन सिंह सरकार द्वारा पेट्रोल की कीमत में 7.50 रुपये की बढ़ोतरी करने पर नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों को "शासन चलाने का नाकामियों का जीता जागता सबूत बताया था।" तब नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) से देश की स्थिति को गंभीरता से लेने की माँग की थी। 22 मई 2012 को पेट्रोल की कीमत दिल्ली में करीब 73.18 रुपये थी। इस समय दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 76.87 रुपये और डीजल की 68.08 रुपये है। कर्नाटक चुनाव के बाद 21 मई को लगातार नौवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। मुंबई में पेट्रोल 84.70 रुपये और डीजल 79.79 रुपये की कीमत पर मिल रहा है। लेकिन अभी तक इस पर किसी बॉलीवुड स्टार ने ट्वीट नहीं किया है।  न ही पीएम नरेंद्र मोदी का इस पर कोई बयान आया है।

देखिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने पर अमिताभ बच्चन और अनुपम खेर ने ट्वीट  किए थे ये जोक

नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। देश की सत्ता संभालने के छह महीने के अंदर उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को डीरेगुलराइज (विनियमन) कर दिया। यानी पेट्रोल-डीजल पर से सरकार का नियंत्रण हटा दिया। मोदी सरकार ने कहा कि विनियमन के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार घटेंगी-बढ़ेंगी जिसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा। इसे देश की जनता की किस्मत ही समझना चाहिए कि सरकार के फैसले के कुछ समय बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की  कीमतें पिछले एक दशक के निचले स्तर पर पहुँच गयी। पीएम मोदी इसका श्रेय लेने से नहीं चूके, उन्होंने खुद को नसीबवाला बताया। लेकिन उनका नसीब आम जनता के काम नहीं आया। देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों उस अनुपात में नहीं कम हुईं जिस अनपात में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरी थीं। मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 100 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगा दिये। जिनकी वजह से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं हुई। सरकार ने तर्क दिया कि वो इस पैसे का उपयोग आधारभूत संरचना के विकास में उपयोग करेगी। ये अलग बात है कि 2012 में खुद मोदीजी का मानना था कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का बाकी सभी चीजों पर असर पड़ता है। 

आज हालात ये है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के मामले में भारत ने दुनिया के ज्यादातर देशों को पीछे छोड़ दिया है। पेट्रोल-डीजल से जुड़ी भारत सरकार की नीतियों की समीक्षा करते हुए आर्थिक मामलों के जानकार निशात शाह लिखते हैं, "जब 2014 के बाद से लगातार चार साल तक कच्चे तेल की कीमतें कम होती रहीं तो मोदी सरकार ने इसाक फायदा उपभोक्ताओं तक पहुँचने देने के बजाय टैक्स बढ़ाकर सरकारी खर्च बढ़ाने का फैसला किया। मोदी सरकार ने प्रति लीटर नौ रुपये के टैक्स को बढ़ाकर 21 रुपये कर दिया था जो अब 19 रुपये है।" इस तरह मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल को सरकार के नियंत्रण से बाहर करने के लिए कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा सीधा जनता की जेब पहुँचने का तर्क दिया था उसे खुद ही गलत साबित कर दिया। मोदी सरकार ने साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम हों या ज्यादा उसे उतना ही पैसा चुकाना होगा।

मोदी सरकार के पास पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम करने का दूसरा मौका तब आया जब सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) लागू कर रही थी। मोदी सरकार ने ऐन-केन-प्रकारेण पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा। जीएसटी लागू करते समय मोदी सरकार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि इससे सभी अप्रत्यक्ष कर खत्म हो जाएंगे। देश की टैक्स प्रणाली सरल और आधुनिक हो जाएगी। मोदी सरकार ने इसे आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म बताया। लेकिन जब 1800 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी लागू हो रहा था तो मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल को इससे चुपचाप बाहर कर दिया। जीएसटी में सभी वस्तुओं और सेवाओं पर शून्य, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत टैक्स लगाया गया। अगर पेट्रोल-डीजल जीएसटी के तहत रखे जाते तो इन पर अधिकतम 28 प्रतिशत ही टैक्स लगता। मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखकर इन पर 100 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स जनता से वसूल कर रही है।

अगर मोदी सरकार ने इन दोनों मुद्दों पर दोहरा मापदण्ड न अपनाया होता तो अक्षय कुमार को अपना छह साल पुराना ट्वीट डिलीट नहीं करना पड़ता। न ही पीएम मोदी के छह साल पुराने ट्वीट और वीडियो का सोशल मीडिया पर मजाक बन रहा होता। न ही लोगों को मई 2018 में नरेंद्र मोदी का मई 2012 का वो बयान याद आ रहा होता जिसमें उन्होंने कहा था, "...देश की जनता के अंदर भारी आक्रोश है और इसके कारण और भी चीजों पर बहुत बड़ा बोझ होने वाला है। सरकार पर भी बहुत बड़ा बोझ होने वाला है। मैं आशा करूँगा कि प्रधानमंत्रीजी देश की स्थिति को गंभरीता से लें और पेट्रोल के दाम बढ़ाएं हैं उसे वापस करें।"


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Web Title: Narendra Modi Government Policies are responsible for Petrol and Diesel Price Hike
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