जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: कोरोना की दूसरी लहर के बीच विकराल हुई रोजगार की चुनौती

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Published: April 16, 2021 11:26 AM2021-04-16T11:26:23+5:302021-04-16T11:28:10+5:30

भारत में कोरोना महामारी उफान पर है. रोज नए डराने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. कोरोना की दूसरी लहर ने आर्थिक मोर्च पर भी एक बार फिर भारत के सामने चुनौती रख दी है.

Jayantilal Bhandari blog: challenge for Jobs and economy again amid Covid second wave | जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: कोरोना की दूसरी लहर के बीच विकराल हुई रोजगार की चुनौती

कोरोना महामारी और रोजगार बढ़ाने की चुनौती (फाइल फोटो)

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कोविड के कारण देश के सामने फिर से स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. देश में कोविड-19 संक्रमण का आंकड़ा प्रतिदिन दो लाख को पार कर गया है. कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या के लिहाज से ब्राजील को पीछे छोड़कर भारत विश्व में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है.

हाल ही में 12 अप्रैल को बार्कलेज के द्वारा भारत में कोरोना संक्रमण से बढ़ रही आर्थिक चुनौतियों के मद्देनजर प्रकाशित ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पिछले कुछ दिनों के दौरान महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य प्रमुख आर्थिक केंद्रों में लगाए गए लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों से देश को हर सप्ताह 1.25 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है. 

अगर मौजूदा प्रतिबंध मई 2021 के आखिर तक बने रहे तो आर्थिक गतिविधियों का नुकसान करीब 10.5 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.34 फीसदी रहेगा.

विनिर्माण गतिविधियों में फिर सुस्ती

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि देश की विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि की रफ्तार फिर सुस्त पड़ गई है और पिछले माह मार्च 2021 में यह सात माह के निचले स्तर पर आ गई. 5 अप्रैल को जारी मासिक सर्वे के मुताबिक आईएचएस मार्केट इंडिया का विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मार्च में घटकर सात माह के निचले स्तर 55.4 पर आ गया. 

फरवरी में यह सूचकांक 57.5 पर था. इसी तरह सर्विस सेक्टर का सूचकांक मार्च में घटकर 54.6 रह गया, जो कि फरवरी में 55.3 रहा था. इससे रोजगार की नई चिंताएं खड़ी हो गई हैं.

हाल ही में उद्योग चेंबर सीआईआई ने कोरोना की दूसरी घातक लहर के मद्देनजर देश के 710 सीईओ के बीच एक सर्वेक्षण किया है. इस सर्वेक्षण में 70 फीसदी सीईओ ने कहा कि लॉकडाउन श्रमिकों की आवाजाही, वस्तुओं की आपूर्ति, उत्पादन को प्रभावित करते हुए रोजगार और अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव डालेगा. 

सर्वे में 57 फीसदी सीईओ ने कहा कि उनके पास किसी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए कच्चा माल है. 31 फीसदी ने कहा कि उन्होंने नाइट कफ्यरू की स्थिति को देखते हुए अपनी फैक्ट्री में ही कामगारों के ठहरने का इंतजाम किया हुआ है. 

कोरोना की लहर रोकने के लिए निर्णायक रणनीति की जरूरत

सर्वे में यह भी कहा गया है कि इस समय बेहद सख्त स्वास्थ्य व सुरक्षा मानक लॉकडाउन से बेहतर विकल्प हैं. निस्संदेह तेजी से बढ़ती हुई कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए त्वरित और निर्णायक रणनीति की जरूरत इसलिए है, क्योंकि इसका संबंध लोगों के जीवन के साथ-साथ उनकी आजीविका और प्रवासी मजदूरों के पलायन की मुश्किलों से है. 

साथ ही देश की विकास दर से भी है. 14 अप्रैल को गोल्डमैन सैश ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 10.5 फीसदी पर पहुंच सकती है. कोरोना की दूसरी लहर इस लक्ष्य के सामने असाधारण चुनौती बनकर खड़ी हो गई है.  

ऐसे में देशभर में कोरोना की दूसरी घातक लहर से लॉकडाउन के कारण उद्योग-कारोबार की बढ़ती चिंताओं को रोकने, प्रवासी मजदूरों के पलायन की मुश्किलों को रोकने और देश की विकास दर बढ़ने के वैश्विक अनुमानों को साकार करने के मद्देनजर एक बार फिर नई रणनीति जरूरी है. 

कोरोना संकट के बीच भारत किन बातों पर दे ध्यान

इस रणनीति में जान बचाने के साथ-साथ आजीविका भी बचाने की प्राथमिकता के साथ इन पांच बातों पर ध्यान देना होगा. एक, भारत में कोरोना वैक्सीन के अधिकतम निर्माण और वितरण की रणनीति कारगर रूप से क्रियान्वित हो. 

दो, अधिक से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन किया जाए. तीन, लॉकडाउन से बाजार में ब्रेक डाउन के बढ़ते हुए खतरे और दुष्परिणाम को रोकने की रणनीति तुरंत तैयार हो. चार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए नई राहत शीघ्र घोषित की जाए और पांच, पलायन कर रहे मजदूरों को रोकने और उनकी सुविधा के लिए कारगर रणनीति घोषित की जाए.

गौरतलब है कि देश में 14 अप्रैल तक कोरोना टीके की 11 करोड़ 43 लाख से अधिक खुराक दी जा चुकी है. सरकार के द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने रूस में तैयार टीके स्पुतनिक वी के इस्तेमाल के साथ-साथ विदेशी टीकों को देश में मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाने का रास्ता साफ कर दिया है. 

सरकार ने 14 अप्रैल को इंजेक्शन रेमडेसिवीर का उत्पादन करीब दोगुना यानी 78 लाख वायल (शीशी) प्रति माह करने की मंजूरी दी है. अब भारत में कोरोना टीकाकरण अभियान की रफ्तार बढ़ाने के साथ जिस तरह करीब 6.5 प्रतिशत खुराक की बर्बादी हो रही है, उस अपव्यय को रोका जाना जरूरी है. 

साथ ही देश में जहां अधिकतम टीकाकरण लाभप्रद होगा, वहीं टीकों के अधिकतम उत्पादन के साथ टीका निर्माण करने वाली कंपनियों को खुले बाजार में टीका मुहैया कराने का अवसर भी शीघ्रतापूर्वक दिया जाना लाभप्रद होगा.

Web Title: Jayantilal Bhandari blog: challenge for Jobs and economy again amid Covid second wave

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