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दुनिया भर में कोविड-19 का टीका विकसित करने की होड़, अमेरिकी कंपनी निकली आगे

By भाषा | Updated: May 20, 2020 20:16 IST

अमेरिका स्थित कंपनी 'मॉडर्ना' ने कहा कि उसके टीके ''एमआरएनए-1273'' के शुरुआती आंकड़े दर्शाते हैं कि इसने आठ स्वस्थ लोगों के भीतर प्रतिरोधक एंटीबॉडी पैदा कर दी है।

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ठळक मुद्देदुनिया भर के वैज्ञानिक कोविड-19 का टीका विकसित करने में शिद्दत से जुटे हैं। सबकी निगाहें अमेरिका स्थित कंपनी 'मॉडर्ना' द्वारा स्वस्थ लोगों के एक छोटे से समूह पर किये गए परीक्षण के नतीजों पर टिकी हैं।

नई दिल्ली। दुनिया भर के वैज्ञानिक कोविड-19 का टीका विकसित करने में शिद्दत से जुटे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें अमेरिका स्थित कंपनी 'मॉडर्ना' द्वारा स्वस्थ लोगों के एक छोटे से समूह पर किये गए परीक्षण के नतीजों पर टिकी हैं। विशेषज्ञों ने हालांकि कहा है कि टीका बनने में महीनों या फिर एक साल तक लग सकता है।

उन्होंने कहा है कि अमेरिका स्थित बायो-टेक्नोलॉजी कंपनी मॉडर्ना के नतीजों ने उसे टीका विकसित करने के दौड़ में शामिल 118 उम्मीदवारों में आगे कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम जानकारी के अनुसार, आठ ‘कोविड-19 टीकों’ का नैदानिक परीक्षण किया जा रहा है जबकि 110 उम्मीदवार अभी खोज ही कर रहे हैं।

मॉडर्ना ने कहा कि उसके टीके ''एमआरएनए-1273'' के शुरुआती आंकड़े दर्शाते हैं कि इसने आठ स्वस्थ लोगों के भीतर प्रतिरोधक एंटीबॉडी पैदा कर दी है। इसके अलावा जिन कोविड-19 टीकों पर निगाहें टिकी हुई हैं, उनमें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया जा रहा टीका भी शामिल है। इस टीके का छह बंदरों के एक समूह पर परीक्षण किया गया, जो कारगर साबित हुआ है। इसके विश्वसनीय नतीजे सामने आए हैं और पिछले महीने के अंत में इसका मानव शरीर पर भी परीक्षण शुरू कर दिया गया।

ब्रिटेन स्थित आंकड़ा विश्लेषक एवं परामर्श कंपनी 'ग्लोबल डाटा' में संक्रामक रोग से जुड़े विभाग के एसोसिएट निदेशक माइकल ब्रीन ने कहा, ''चूंकि मॉडर्ना के पास एकमात्र टीका है, जिसने कोविड-19 रोग के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया है, लिहाजा हमारे ख्याल से यह कंपनी टीका विकसित करने की दौड़ में काफी आगे है।''

ब्रीन ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''मानव शरीर पर जिन टीकों का परीक्षण किया गया है उनमें से केवल दो टीके ही कारगर साबित हुए हैं।'' उन्होंने कहा कि मॉडर्ना के अध्ययन से साबित होता है कि इस टीके के इस्तेमाल से मानव शरीर में वायरस के खिलाफ एक एंडीबॉडी विकसित की जा सकती है।

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