फांसी देने से पहले कैदी के कान में ये बोलता है जल्लाद

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: July 25, 2018 15:57 IST2018-07-25T15:57:17+5:302018-07-25T15:57:17+5:30

अगर कोई भी व्यक्ति संविधान के खिलाफ जाकर किसी भी प्रकार का जुर्म करता है तो उस जुर्म की सजा का उल्लेख संविधान में किया गया है।

Do you know what the prisoner speaks before the execution of executioner | फांसी देने से पहले कैदी के कान में ये बोलता है जल्लाद

फांसी देने से पहले कैदी के कान में ये बोलता है जल्लाद

क्या आपने कभी जल्लाद द्वारा किसी कैदी को फांसी देते हुए देखा है ? हकीकत में न सही पर फिल्मों में तो देखा ही होगा की कैसे जल्लाद किसी कैदी को फांसी देता है और फांसी देने से पहले कैदी के कान में कुछ कहता है। अब हो सकता है की फिल्मों में अपने कभी इस बात पर ध्यान ही न दिया हो लेकिन असल जिन्दगी में तो यही होता है। 

क्या आप जानते भी हैं कि फांसी देने के कितने सारे नियम बनाए  गए हैं ? आज हम आपको उन नियमों के बारे में ही बताने जा रहे हैं और साथ ही फांसी से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में भी। फांसी देना मतलब किसी व्यक्ति को मौत के घाट उतारना जो की बहुत ज्यादा मुश्किल काम है। फांसी के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं जैसे फांसी का फंदा कैसा होगा, फांसी देने का समय, फांसी की प्रक्रिया आदि शामिल रहता है। भारत में जब किसी कैदी को फांसी दी जाती है तो जल्लाद फांसी देने से पहले कैदी के कान में एक बात कहता है। आखिर वो बात क्या है ये हम आपको बताते हैं 

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सबसे पहले तो एक खास बात आपको बता दें कि भारत में केवल दो ही जल्लाद हैं। जिन्हे सरकार द्वारा कैदियों को फांसी देने की सैलरी भी दी जाती है। फांसी देंना कोई मामूली सा काम नहीं है बल्कि आप किसी को अपने हाथों से मौत के घाट उतार रहे हो जोकि बहुत ही कठिन काम है। इस काम को करना हर किसी के बस की बात नहीं है इसके लिए बहुत बड़ा कलेजा चाहिए। किसी भी आम इंसान को फांसी देने के लिए सरकार जल्लाद को 3000 रुपये देती है जबकि किसी आतंकवादी को फांसी देने के लिए कीमत बढ़ा दी जाती है। आपको बता दें कि इंदिरा गाँधी के हत्यारों को फांसी देने के लिए जल्लाद को 25000 रुपये दिए गए थे। 

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चलिए हम आपको बताते हैं कि जल्लाद आखिर कैदी के कान में क्या कहता है। आप ये तो जानते ही हैं कि भारत में संविधान सर्वोपरी है और कोई भी व्यक्ति संविधान के खिलाफ नहीं जा सकता। अगर कोई भी व्यक्ति संविधान के खिलाफ जाकर किसी भी प्रकार का जुर्म करता है तो उस जुर्म की सजा का उल्लेख संविधान में किया गया है। ऐसे ही यदि कोई व्यक्ति किसी का कत्ल करता है तो उसको सजा-ए-मौत यानि उम्र कैद या फांसी की सजा सुनाई जाती है। फांसी देने से पहले जल्लाद कैदी के कान में माफ़ी मांगता है और कहता है कि 'मुझे माफ कर दो भाई, मैं मजबूर हूँ' अगर कैदी हिन्दू हो तो जल्लाद उसे राम-राम बोलता है और अगर कैदी मुस्लिम हो तो जल्लाद उसे सलाम बोलता है। साथ ही जल्लाद उनसे यह भी कहता है कि 'मैं सरकार के द्वारा दिए गए हुक्म का गुलाम हूँ और चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता।' बस इतना कह कर ही जल्लाद फांसी का फंदा खींच देता है। 

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फांसी से जुडी एक और रोचक बात भारत में जिन अपराधियों को फांसी की सजा दी जाती है, उन सबका फांसी का फंदा बिहार के बक्सर जेल में तैयार कराया जाता है। साथ ही यह भी निर्देश हैं कि फांसी के फंदे की रस्सी डेढ़ इंच से ज्यादा मोटी होनी चाहिए और फंदे की कीमत भी बहुत कम ही रखी जाती है। दस साल पहले फांसी का फंदा 182 रुपये में जेल को उपलब्ध कराया गया था।  

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Web Title: Do you know what the prisoner speaks before the execution of executioner

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