80000 वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चे दाखिले से वंचित?, बिहार में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं कर रहे हैं निजी स्कूल

By एस पी सिन्हा | Updated: January 17, 2026 16:36 IST2026-01-17T16:35:08+5:302026-01-17T16:36:15+5:30

पोर्टल पर डेटा अपडेट न होने की वजह से नामांकन की पूरी प्रक्रिया तकनीकी रूप से अटक गई है।

80000 children disadvantaged and weaker sections denied admission Private schools in Bihar not following Right to Education Act | 80000 वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चे दाखिले से वंचित?, बिहार में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं कर रहे हैं निजी स्कूल

सांकेतिक फोटो

Highlightsसाल करीब 80 हजार वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चे दाखिले से वंचित रह सकते हैं।पोर्टल पर नहीं दिखेंगी, तब तक ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी।पूरे राज्य में स्थिति चिंताजनक है, वहीं पटना जिला एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर रहा है।

पटनाः बिहार में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के कार्यान्वयन में निजी स्कूलों की लापरवाही के कारण हजारों गरीब बच्चों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है। दरअसल, राज्य के लगभग 52 प्रतिशत निजी स्कूलों ने अब तक ‘ज्ञानदीप पोर्टल’ पर अपनी रिक्त सीटों की जानकारी साझा नहीं की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 15,919 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं, जिसमें 8,217 डिफॉल्टर स्कूलों ने जानकारी नहीं दी है। जबकि निर्धारित समय-सीमा 31 दिसंबर को बीत चुकी है। पोर्टल पर डेटा अपडेट न होने की वजह से नामांकन की पूरी प्रक्रिया तकनीकी रूप से अटक गई है।

अनुमान है कि इस साल करीब 80 हजार वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चे दाखिले से वंचित रह सकते हैं। जब तक सीटें पोर्टल पर नहीं दिखेंगी, तब तक ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी। समय निकलने के कारण अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। जहां एक ओर पूरे राज्य में स्थिति चिंताजनक है, वहीं पटना जिला एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर रहा है।

यहां के 935 स्कूलों ने समय पर अपनी सीटों की जानकारी अपडेट कर दी है, जो राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन है। वहीं, अधिकांश अन्य जिलों में स्कूलों का रवैया बेहद सुस्त रहा है, जिसके कारण विभाग की योजनाएं विफल होती दिख रही हैं। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए विभाग अब कड़े रुख अपनाने की तैयारी में है।

डिफॉल्टर स्कूलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। विभाग जल्द ही डेडलाइन बढ़ाने पर निर्णय ले सकता है ताकि छूटे हुए स्कूल अपनी जानकारी अपलोड कर सकें। विभाग का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी कारणों से किसी भी गरीब बच्चे का शिक्षा का अधिकार न छीना जाए।

Web Title: 80000 children disadvantaged and weaker sections denied admission Private schools in Bihar not following Right to Education Act

ज़रा हटके से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे