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शादी के बाद हाथों में चूड़ियां क्यों पहनती हैं महिलाएं? जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

By मेघना वर्मा | Updated: December 12, 2019 10:32 IST

वैदिक काल से चली आ रही इस प्रथा को निभाना हर महिला के लिए जरूरी बताया जाता है। खासकर शादी-शुदा महिलाओं के लिए चूड़ी पहनना बेहद शुभ माना जाता है।

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ठळक मुद्देवैदिक काल से चली आ रही इस प्रथा को निभाना हर महिला के लिए जरूरी बताया जाता है। महिलाएं के चूड़ी पहनने की इस प्रथा को देवी दुर्गा से जोड़ा गया है।

हिन्दू धर्म में महिलाओं के 16 श्रृंगार का काफी महत्व बताया गया है। इन श्रृंगारों में सुहागिन महिलाओं के लिए चूड़ी को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है। चूड़िया ना सिर्फ महिलाओं की सुंदरता बढ़ाती है बल्कि इसके कई अन्य फायदे भी हैं। चूड़ी पहनने की प्रथा सदियों से चली आ रही है, आप में से भी कई महिलाएं चूड़ियां पनती होंगी मगर क्या आपको इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण पता है? 

वैदिक काल से चली आ रही इस प्रथा को निभाना हर महिला के लिए जरूरी बताया जाता है। खासकर शादी-शुदा महिलाओं के लिए चूड़ी पहनना बेहद शुभ माना जाता है। आइए आपको बताते हैं क्या है चूड़ी पहनने के पीछे का वैज्ञानिक और धार्मिक कारण।

चूड़िया पहनने का धार्मिक कारण

महिलाएं के चूड़ी पहनने की इस प्रथा को देवी दुर्गा से जोड़ा गया है। मां दुर्गा के 16 श्रृंगार में चूड़ियों को चढ़ाया जाता है। देवी दुर्गा के हाथों में भी चूड़ियों को देखा जा सकता है। वहीं हिन्दू धर्म में महिलाओं को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है इसलिए भी उनको चूड़ी पहनना शुभ होता है। मान्यता तो ये भी है कि चूड़ियों का दान करने से इंसान को पुण्य की प्राप्ती होती है। सिर्फ यही नहीं अगर बुध की अनुकूलता पानी हो तो भी महिलाओं को चूड़िया पहनना शुभ बताया जाता है।

क्या है चूड़ियां पहनने का वैज्ञानिक कारण

महिलाओं की चूड़ियां पहनने का कई वैज्ञानिक कारण भी बताया जाता है। बताया जाता है कि महिलाएं जिस धातु की चूड़िया पहनती हैं उनको उसी के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है। महिलाओं की चूड़ियों को उनके स्वास्थ्य से भी जोड़ा गया है। 

माना जाता है कि चूड़ी पहनने से सांस के रोगों व दिल की बिमारी की आशंकाएं कम हो जाती हैं। सिर्फ यही नहीं चूड़ी पहनने से मानसिक संतुलन भी बना रहता है। माना ये भी जाता है कि चूड़ियों की आपस में टकराने वाली आवाज से नकारात्म ऊर्जा भी खत्म हो जाती है। वहीं कलाई के नीचे 6 इंच तक एक्यूप्वाइंट्स होते हैं जो एक साथ दबने से शरीर पर लाभदायी असर छोड़ते हैं।

पुराने समय में पुरुष घर से बाहर खेतों या जंगलों में काम करने के लिए जाते थे जबकी महिलाएं घर का काम किया करती थीं। उस समय महिलाओं का काम पुरुषों के अपेक्षा कम माना जाता था, हां उस समय मिक्सर ग्राएंडर, वॉशिंग मशीन जैसी सुविधाएं भले ही ना रही हों मगर फिर भी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के काम को कम ही समझा जाता था। वहीं ज्यादा फीजिकल वर्क ना करने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए भी महिलाओं को चूड़ियां पहनने की सलाह दी जाती थी। 

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