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खुद के लिए कभी ना खरीदें "लाफिंग बुद्धा", ये है वजह

By मेघना वर्मा | Updated: January 25, 2018 13:28 IST

लॉफिंग बुद्धा चीनी देवता हैं। चीन में इन्हें 'पुताइ' के नाम से जाना जाता है। भारतीय मान्यता के अनुसार होतेई बौद्ध बनें और जैसे ही उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई तो वे जोर-जोर से हंसने लगे, तब से उन्हें "लाफिंग बुद्धा" कहते हैं।

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प्राचीन इतिहास से ही हमारे देश में वास्तु शास्त्र का अनोखा महत्व रहा है। घर, फैक्ट्री बनवाते समय कई लोग वास्तु नियमों का पालन करते हैं। लेकिन आजकल वास्तु शास्त्र के साथ-साथ भारत में 'फेंग शुई' भी काफी प्रसिद्ध हो गया है। इसे भारतीय 'चीनी वास्तु शास्त्र' के नाम से भी जानते हैं। फेंग शुई में गुड लक बढ़ाने के लिए कई सारी चीजें उपलब्ध हैं। और फेंग शुई के अनुसार इन चीजों को गिफ्ट करने का महत्व है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम फेंग शुई के फेमस प्रोडक्ट 'लाफिंग बुद्धा' की बात करेंगे।

लाफिंग बुद्धा के संदर्भ में भी यही कहा जाता है कि इसे खुद नहीं खरीदना चाहिए, बल्कि गिफ्ट में देना या लेना चाहिए। चीन में समृद्धि के लिए लाफिंग बुद्धा को पूजा जाता है। फेंगशुई में मान्यता है कि घर में लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति रखने से सौभाग्य बढ़ता है। इसीलिए भारत में भी काफी लोग अपने-अपने घरों और दुकानों में इनकी मूर्तियां रखने लगे हैं। मान्यता है कि लोगों को अपने खुद के लिए लाफिंग बुद्धा कभी नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है। आज हम आपको लाफिंग बुद्धा से जुड़े ऐसे ही कुछ तथ्य बताएंगे। और बताएंगे कि क्यों लाफिंग बुद्धा को अपने लिए नहीं खरीदना चाहिए। 

महात्मा बुद्ध के शिष्य थे लॉफिंग बुद्धा

महात्मा बुद्ध के कई शिष्यों में से एक थे जापान के होतेई। मान्यता के अनुसार होतेई बौद्ध बने और जैसे ही उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई तो वे जोर-जोर से हंसने लगे। इसके बाद उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था लोगों को हंसाना और सुख-संपदा पर्दान करना। होतेई जहां भी जाते वहां लोगों को हंसाते और लोग उनके साथ काफी खुश रहते थे। इसी कारण जापान में लोग उन्हें हंसता हुआ बुद्धा यानी लॉफिंग बुद्धा कहने लगे। धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई, एक देश से दूसरे देश और अब पूरी दुनिया में उन्हें मानने वाले करोड़ो लोग हैं।

स्वार्थी भाव से नहीं खरीदना चाहिए "लाफिंग बुद्धा"

वहीं चीन में प्रचलित मान्यता के अनुसार लॉफिंग बुद्धा चीनी देवता हैं। चीन में इन्हें पुताइ के नाम से जाना जाता है। वे एक भिक्षुक थे और उन्हें मौज-मस्ती करना, घुमना-फिरना बहुत पसंद था। वे जहां भी जाते थे, वहां अपना बड़ा पेट और विशाल बदन दिखाकर सभी को हंसाते थे। तभी से लोग इन्हें देवता की तरह मानने लगे और इनकी मूर्तियां घर में रखने लगे।

माना जाता है कि किसी भी व्यक्ति को इतना स्वार्थी नहीं होना चाहिए कि वह खुद के लिए धन और खुशहाली की कामना हेतु लाफिंग बुद्धा खरीदें। जो लोग ऐसा करते हैं, जो अपने लिए ही लाफिंग बुद्धा खरीदते हैं, उन्हें कभी भी लाफिंग बुद्धा से आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो सकता। वह मात्र सजावट की वस्तु बनकर ही रह जाता है और जिस उद्देश्य, यानि धन, खुशहाली और सकारात्मकता, की प्राप्ति हेतु इसे खरीदा जाता है वह फलित नहीं हो पाता।

यह तभी फलदायी साबित होता है जब कोई व्यक्ति इसे बिना किसी स्वार्थ और सामने वाले का हित सोचते हुए ही इसे भेंट करे।

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